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रोहिणी के 'आध्यात्मिक विश्वविद्यालय' से फिर गायब हुई युवती! दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए जांच के निर्देश

युवती के माता-पिता ने आश्रम में उनकी बेटी के बंदी बनाए जाने और परिवार से संपर्क न करने देने की शिकायत की थी. कोर्ट ने आश्रम के प्रशासन, फंडिंग और प्रबंधन की भी गहन जांच का आदेश दिया है. यह आश्रम पहले भी महिलाओं के साथ अवैध गतिविधियों के आरोपों में घिरा रहा है. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आश्रमों के नियमन पर जवाब देने को कहा है.

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दिल्ली के रोहिणी स्थित विवादित 'आध्यात्मिक विश्वविद्यालय' एक बार फिर संगीन आरोपों के घेरे में है. आश्रम से एक युवती के रहस्यमय तरीके से 'लापता' होने की शिकायत के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस को इस मामले में तुरंत जांच रिपोर्ट और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.

मामला तब सामने आया जब एक युवती के माता-पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि उनकी बेटी को आश्रम के अंदर बंद रखा गया है और उसे परिवार से संपर्क नहीं करने दिया जा रहा है.

'सामान आश्रम में मिला, लेकिन लड़की गायब'
अदालत द्वारा नियुक्त किए गए एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को चौंकाने वाली जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आश्रम के प्रतिनिधियों से जब बात की गई, तो उन्होंने कहा कि युवती 'लापता' (Not Traceable) है और वह अब आश्रम में नहीं है.

हालांकि, सबसे अजीब बात यह रही कि आश्रम के लोगों ने यह स्वीकार किया कि युवती भले ही आश्रम छोड़कर चली गई है, लेकिन उसका सारा सामान और कपडे़ अभी भी आश्रम के भीतर ही रखे हुए हैं. इस पर हाईकोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए पुलिस को गुमशुदगी की हर कोण से जांच करने का निर्देश दिया.

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कौन चला रहा है आश्रम? 
सुनवाई के दौरान जब आश्रम के प्रतिनिधियों ने कोर्ट में यह कहने की कोशिश की कि वे आश्रम के प्रशासन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, तो अदालत का पारा चढ़ गया.

हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में सवाल उठाया कि विवादित बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित की मौत के बाद आखिर इस आश्रम का संचालन कौन कर रहा है? कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि आश्रम के प्रशासनिक ढांचे के साथ-साथ इसकी फंडिंग और खर्चों की भी गहन जांच की जाए.

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि राज्य के कानूनों के तहत इस तरह के 'आश्रमों' को कैसे रेगुलेट और प्रशासित किया जा रहा है.

साल 2017 से ही विवादों में है यह आश्रम

गौरतलब है कि रोहिणी का यह आध्यात्मिक विश्वविद्यालय लंबे समय से विवादों में रहा है. साल 2017 में आश्रम की आड़ में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के साथ अवैध बंधक बनाने, यौन शोषण और ब्रेनवाशिंग की शिकायतें सामने आई थीं. उस वक्त हाईकोर्ट के आदेश पर कई महिलाओं को वहां से रेस्क्यू कराया गया था.

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट लगातार इस आश्रम की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए था. अब नए सिरे से युवती के गायब होने और संदिग्ध फंडिंग का मामला सामने आने के बाद आश्रम के प्रबंधन पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.

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