अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में अमेरिकी वायु संपत्तियों के नुकसान का पैमाना अब सामने आया है. द वॉर जोन की विजुअलाइजेशन रिपोर्ट में पेंटागन इंस्पेक्टर जनरल, कांग्रेसनल बजट ऑफिस और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस के आधार पर आंकड़े पेश किए गए हैं. इसमें MQ-9 रीपर ड्रोनों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है.
कुछ अनुमानों में 47 तक रीपर नष्ट होने का जिक्र है. साथ ही KC-135 टैंकर, F-15E स्ट्राइक ईगल और एक F-35 जैसे विमान भी क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए. कई घटनाएं ईरानी हमलों, फ्रेंडली फायर, दुर्घटनाओं या बचाव अभियानों के दौरान जानबूझकर नष्ट करने से जुड़ी हैं. अगस्त तक कुल युद्ध खर्च करीब 38 अरब डॉलर पहुंच चुका है. यानी 3.63 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा.
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ये नुकसान बताते हैं कि विवादित हवाई क्षेत्र में ड्रोन, टैंकर और निगरानी प्लेटफॉर्म पर कितना दबाव है. ड्रोन सबसे ज्यादा प्रभावित हुए लेकिन क्रूड विमानों के नुकसान ने भी चिंता बढ़ाई है.
ड्रोन और क्रूड विमानों के नुकसान की डिटेल
MQ-9 रीपर लंबे समय तक उड़ान भरने वाला सशस्त्र ड्रोन है जो निगरानी, खुफिया जानकारी और सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल होता है. पेंटागन इंस्पेक्टर जनरल रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 तक करीब 30 रीपर नष्ट हुए. ओपन-सोर्स आंकड़ों में यह संख्या और ज्यादा बताई गई है. कई रीपर जमीनी ठिकानों पर ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमलों में नष्ट हुए. कुछ संचार लिंक टूटने से दुर्घटनाग्रस्त भी हुए.
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क्रूड विमानों में KC-135 टैंकर सबसे अधिक प्रभावित दिखे. ये विमान हवा में ईंधन भरने का काम करते हैं जिससे लड़ाकू विमानों की रेंज बढ़ती है. कई टैंकर सऊदी अरब जैसे ठिकानों पर जमीनी हमलों में क्षतिग्रस्त हुए. एक KC-135 दुर्घटना में नुकसान हुआ. F-15E स्ट्राइक ईगल में कुछ फ्रेंडली फायर की घटनाएं दर्ज हुईं जबकि एक F35 फाइटर जेट दुश्मन फायर से क्षतिग्रस्त हुआ. ये आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक युद्ध में सपोर्ट प्लेटफॉर्म भी मुख्य लक्ष्य बन सकते हैं.
कांग्रेसनल बजट ऑफिस और पेंटागन रिपोर्ट्स के अनुसार अगस्त 2026 तक कुल खर्च करीब 38 अरब डॉलर पहुंच गया. यानी 3.63 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा. इसमें गोला-बारूद, उपकरण नुकसान और परिचालन लागत शामिल है. रीपर जैसे ड्रोन की इकाई लागत तीन से पांच करोड़ डॉलर तक होती है. दर्जनों नष्ट होने से अरबों का बोझ पड़ा है.
टैंकर और निगरानी विमानों की कमी से अभियानों की अवधि और पहुंच प्रभावित हो सकती है. यह संघर्ष फरवरी 2026 में शुरू हुआ था. ईरानी जवाबी हमलों ने क्षेत्रीय ठिकानों पर नुकसान पहुंचाया. फ्रेंडली फायर और दुर्घटनाओं ने भी आंकड़ों में योगदान दिया. बचाव मिशनों के दौरान कुछ संपत्तियां जानबूझकर नष्ट करनी पड़ीं ताकि दुश्मन के हाथ न लगें.
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युद्ध की प्रकृति और सबक
विजुअलाइजेशन से साफ होता है कि ड्रोन युद्ध का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं लेकिन वे असुरक्षित भी हैं. जमीनी ठिकानों पर पार्क किए गए ड्रोन आसान लक्ष्य साबित हुए. टैंकर जैसे सपोर्ट विमानों की सुरक्षा चुनौती बनी. विवादित क्षेत्र में निरंतर निगरानी और स्ट्राइक क्षमता बनाए रखना महंगा और जोखिम भरा है.
अमेरिकी सेना को गोला-बारूद के भंडार और आपूर्ति श्रृंखला में कमी का भी सामना करना पड़ा. ये नुकसान भविष्य के अभियानों की योजना बनाने में सबक देंगे. ड्रोन की संख्या बढ़ाने, बेहतर सुरक्षा और वैकल्पिक प्लेटफॉर्म विकसित करने की जरूरत रेखांकित हुई है. कुल मिलाकर यह आंकड़े आधुनिक संघर्ष की कीमत और जटिलता दोनों को उजागर करते हैं. दोनों पक्षों के बीच तनाव जारी रहने से और नुकसान की आशंका बनी हुई है.
ऋचीक मिश्रा