पाकिस्तान ने ईरान के साथ दो प्रमुख बॉर्डर पार व्यापार मार्गों को अस्थाई रूप से बंद कर दिया है. गबद-रिमनान और तफ्तान क्रॉसिंग पर वाणिज्यिक गतिविधियां रोक दी गई हैं. इस्लामाबाद का कहना है कि यह कदम सुरक्षा के लिए और तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है. सैकड़ों ट्रक दोनों तरफ फंसे हुए हैं.
एलपीजी जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है. कुछ महीने पहले दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को 10 अरब डॉलर सालाना तक बढ़ाने की बात कर रहे थे. रिश्ते को भाईचारा बता रहे थे. लेकिन पाकिस्तान की आदत है धोखा देना. पीठ पर छुरी घोपना. पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने एक ज्ञापन जारी कर पहले के आदेश को रद्द कर दिया.
बलोचिस्तान सरकार के अनुसार यह अस्थाई बंद सुरक्षा सुधारने, तस्करी रोकने और बॉर्डर प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए है. क्वेटा चैंबर ऑफ कॉमर्स ने व्यापारियों को नई ऑर्डर न लगाने की सलाह दी है. करीब दो हजार ट्रक एलपीजी, चावल, फल और अन्य सामान लेकर फंसे बताए जा रहे हैं.
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गबद-रिमनान मार्ग से रोजाना हजारों टन एलपीजी आती थी, जिससे पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. यात्री आवाजाही कुछ जगहों पर जारी है, लेकिन व्यापार ठप है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे तकनीकी मुद्दों और सावधानी के कदम बताया है. दोनों देशों के अधिकारी बातचीत कर रहे हैं. जल्द सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है.
भाईचारे के रिश्ते और बिजनेस टारगेट
पाकिस्तान और ईरान लंबे समय से पड़ोसी और सांस्कृतिक रूप से करीबी देश रहे हैं. दोनों ने व्यापार बढ़ाने के लिए संयुक्त बॉर्डर बाजार, बार्टर व्यवस्था और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में काम किया था. अगस्त में संयुक्त व्यापार समिति की बैठक में 10 अरब डॉलर का टारगेट दोहराया गया था.
द्विपक्षीय व्यापार पहले से बढ़कर तीन अरब डॉलर के आसपास पहुंच चुका था. ईरान से बिजली आयात और नए क्रॉसिंग खोलने की भी चर्चा चल रही थी. ऐसे में अचानक व्यापार बंद होना कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है. बॉर्डर क्षेत्र में सुरक्षा समस्याएं पुरानी हैं. बलोचिस्तान और सिस्तान-बलोचिस्तान प्रांतों में तस्करी, अवैध गतिविधियां और अस्थिरता आम रही है. पाकिस्तान का कहना है कि बॉर्डर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह जरूरी था.
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आधिकारिक बयानों में सुरक्षा और तस्करी को प्रमुख वजह बताया गया है. कुछ पर्यवेक्षक क्षेत्रीय भू-राजनीति का भी जिक्र करते हैं, लेकिन पुष्ट सबूत सीमित हैं. ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण व्यापार पहले से जटिल था. पाकिस्तान अपनी बॉर्डरों को नियंत्रित करना चाहता है, खासकर जब घरेलू सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं.
इस कदम से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान हो रहा है. एलपीजी की कीमतें बढ़ सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है. लंबे समय में अगर बंद जारी रहा तो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर असर पड़ सकता है. वहीं, अगर जल्द समाधान निकलता है तो यह अस्थाई प्रशासनिक कदम साबित होगा.
पाकिस्तान-ईरान संबंधों में उतार-चढ़ाव पहले भी देखे गए हैं. व्यापारिक हित और सुरक्षा जरूरतें अक्सर टकराती रहती हैं. वर्तमान स्थिति में दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान ढूंढ रहे हैं. यह घटना याद दिलाती है कि पड़ोसी देशों के बीच घोषित भाईचारा व्यावहारिक चुनौतियों के आगे कितना टिकाऊ होता है.
समग्र रूप से यह अस्थाई स्थगन व्यापारियों और आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना है. आगे की बातचीत तय करेगी कि रिश्ते फिर से पटरी पर आते हैं या तनाव बढ़ता है.
ऋचीक मिश्रा