22 महीने में 55वी बार फटा हवाई का ये ज्वालामुखी, 700 फुट ऊंचा लावा का फव्वारा

कीलाउए के उत्तरी वेंट से 17 अक्टूबर को 700 फुट ऊंचे लावा फव्वारे निकले. छह घंटे चले एपिसोड 55 के बाद अलर्ट घटाया गया, लेकिन गैस खतरा जारी है.

Advertisement
हवाई द्वीप के कीलाउए ज्वालामुखी से 17 अक्टूबर को 700 फुट ऊंचे लावा फव्वारे निकले. (Photo: X) हवाई द्वीप के कीलाउए ज्वालामुखी से 17 अक्टूबर को 700 फुट ऊंचे लावा फव्वारे निकले. (Photo: X)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:24 PM IST

हवाई के प्रसिद्ध ज्वालामुखी कीलाउए 17 अक्टूबर 2026 को 55वीं बार फटा. हवाई ज्वालामुखी राष्ट्रीय उद्यान में उत्तरी वेंट से 700 फुट ऊंचे लावा के फव्वारे निकले. राख का बादल 25,000 फुट तक पहुंच गया. यह नजारा करीब छह घंटे चला और सुबह 9:03 बजे खत्म हुआ. दिसंबर 2024 से चल रहे विस्फोटों का यह नया चैप्टर था.

सुबह 3:19 बजे हवाई समय पर उत्तरी वेंट से लावा के फव्वारे शुरू हुए. पांच बजे तक ये 700 फुट से ज्यादा ऊंचे हो गए. लावा क्रेटर के फर्श पर फैल गया. आग के पंख जैसे चमकते दृश्य देखने को मिले. अंतरिक्ष से भी राख का विशाल बादल दिख रहा था. यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के हवाईयन ज्वालामुखी वेधशाला ने इसकी पुष्टि की. हवा उत्तर-पूर्व से चल रही थी, इसलिए गैस और सामग्री दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली.

Advertisement

यह भी पढ़ें: मौत के बाद 'आत्मा' दूसरे ब्रह्मांड में चली जाती है... साइंटिस्ट ने किया बड़ा दावा

लगभग दो महीने बाद यह फिर फटा है. पिछली बार 25 अगस्त को फटा था. बीच में छोटी-छोटी गतिविधियां चलती रहीं, लेकिन इतने ऊंचे फव्वारे नहीं निकले. पूरा विस्फोट हलेमाउमाउ क्रेटर के अंदर सीमित रहा, जिससे आसपास के इलाकों को बड़ा खतरा नहीं हुआ.

खतरा और सतर्कता

लावा का फव्वारा खत्म होने के बाद अधिकारियों ने अलर्ट लेवल घटा दिया. फिर भी पार्क के अंदर गैस का खतरा बना हुआ है. सल्फर डाइऑक्साइड से वॉग यानी ज्वालामुखीय कोहरा बन सकता है, जो सांस की समस्या पैदा करता है. पर्यटकों को आधिकारिक सलाह मानने और बंद क्षेत्रों से दूर रहने को कहा गया है.

यह भी पढ़ें: खुद का हथियार संभलता नहीं, चला है हूतियों को निपटाने... ऐसे हथियारों की बदौलत कैसे लड़ेगा PAK

Advertisement

कीलाउए सक्रिय ज्वालामुखी है. ऐसे विस्फोट होते रहते हैं. वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं. मैग्मा का दबाव बढ़ने से ये फव्वारे निकलते हैं. यह प्रक्रिया ज्वालामुखी की गतिशीलता को समझने में मदद करती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »