ईरान का 'ट्रंप कार्ड'... डोनाल्ड को अमेरिकी चुनाव में चित करने के लिए होर्मुज में चक्रव्यूह!

ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले की नई रणनीति अपना रहा है. मकसद तेल कीमतें ऊंची रखना और अमेरिकी चुनाव प्रभावित करना है. हमले अब होर्मुज से आगे भी हो रहे हैं. सिविलियन स्पॉटर रखे जा रहे हैं निगरानी के लिए.

Advertisement
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर के ऊपर ईरानी मिसाइल. ये नजारा तेहरान के आजादी स्क्वॉयर का है. (Photo: Reuters) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर के ऊपर ईरानी मिसाइल. ये नजारा तेहरान के आजादी स्क्वॉयर का है. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. ईरान अब जहाजों पर हमले की नई रणनीति अपना रहा है. दो सीनियर ईरानी अधिकारियों ने बताया कि तेहरान का मकसद तेल की कीमतें ऊंची रखना और नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को प्रभावित करना है. यह खबर आम आदमी के लिए भी जरूरी है क्योंकि तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं.  

Advertisement

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी का वह संकरा रास्ता है जहां से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और तरलीकृत गैस गुजरता है. फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने इस रास्ते पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश शुरू की. उसने जहाजों के आवागमन पर पाबंदियां लगाईं. 

यह भी पढ़ें: रूस ने 39 मिसाइल-120 ड्रोनों से यूक्रेन की बिजली-रेलवे पर किया बड़ा हमला

नतीजा यह हुआ कि यातायात काफी कम हो गया और तेल की कीमतें बढ़ गईं. कुछ तेल अब भी गुजर रहा है लेकिन जोखिम बहुत ज्यादा है. बीमा खर्च बढ़ गया है और जहाजरानी कंपनियां सतर्क हो गई हैं. ईरान इसी दबाव को और बढ़ाने की कोशिश में है.

नई रणनीति क्या है?

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक करीब दस दिन पहले नई रणनीति शुरू हुई. इसमें हमलों का तरीका और गति दोनों बदले गए. पहले से अलग तरह के हमले किए जा रहे हैं. फैसला देश के सबसे ऊंचे स्तर पर लिया गया. पूरे सिस्टम में तालमेल से लागू किया जा रहा है. 

Advertisement

एक अधिकारी ने कहा कि मकसद अमेरिका और उसके सहयोगियों के तेल कीमतें कम करने के प्रयासों को नाकाम करना है. दूसरे अधिकारी ने इसे शतरंज का खेल बताया. उन्होंने कहा कि जब भी कीमतें गिरने के करीब पहुंचती हैं तो हम उन्हें फिर से ऊपर धकेल देते हैं. अब जहाज होर्मुज में ही नहीं बल्कि उसके बाहर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे.

स्पॉटर्स का इस्तेमाल और अमेरिकी जवाब

अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने बताया कि ईरान की रडार क्षमताएं नष्ट होने के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने नई तरकीब अपनाई है. वे छोटे नावों में बिना हथियार वाले स्पॉटर्स यानी नजर रखने वाले लोगों को भेज रहे हैं. ये लोग लक्ष्यों की जानकारी देते हैं. 

यह भी पढ़ें: सूखने लगा पाकिस्तान का गला! सिंधु के पानी रोकने के बाद अब आई नई मुसीबत

पिछले हफ्ते एक घटना में अमेरिकी बलों ने एक ढो नाम की नाव में स्पॉटर्स को पकड़ा. उन्हें नाव छोड़ने को कहा गया और फिर नाव को नष्ट कर दिया गया. कोई हताहत नहीं हुआ. ईरान की नौसेना को भारी नुकसान होने के कारण वह अब तेजी से तेल निर्यात बढ़ने से पूरी तरह नहीं रोक पा रहा. फिर भी हमलों की संख्या बढ़ गई है.

चुनाव और तेल कीमतों का खेल... हमलों में अचानक उछाल

Advertisement

पिछले 48 घंटों में कम से कम पांच घटनाएं हुई हैं. इनमें टैंकरों और अन्य व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन हमले शामिल हैं. यह स्तर अक्टूबर की शुरुआत के हमलों के बराबर है. समुद्री सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि यह जानबूझकर गति बढ़ाई गई लगती है. हमले अब होर्मुज से आगे बढ़कर ओमान की खाड़ी और कतर तथा संयुक्त अरब अमीरात के तटों के पास भी हो रहे हैं. संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र ने कहा है कि व्यापारी जहाजों के लिए खतरा अभी भी गंभीर स्तर पर है. ड्रोन उड़ान, निगरानी और रेडियो से धमकियां जारी हैं.

यह भी पढ़ें: चीन के पुर्जों से हूती अब खुद बना रहे खतरनाक हाइपरसोनिक मिसाइल

नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं. इनमें कांग्रेस का नियंत्रण तय होगा. युद्ध की लागत हर महीने अरबों डॉलर बताई जा रही है और यह चुनाव प्रचार का बड़ा मुद्दा बन गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चुनाव से पहले फिर हमला नहीं करेंगे. अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी बढ़ा रहा है.

प्रतिबंध कड़े कर रहा है ताकि तेहरान समझौते के लिए तैयार हो. ईरान चाहता है कि तेल कीमतें ऊंची बनी रहें ताकि अमेरिका पर दबाव बना रहे. एक अधिकारी ने साफ कहा कि होर्मुज जल्द ही पूरी तरह बंद हो सकता है. कोई भी जहाज जो पाबंदियों का उल्लंघन करेगा उसे गुजरने नहीं दिया जाएगा.

Advertisement

तेल की कीमतें अगर और बढ़ीं तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है. भारत जैसे देश जो खाड़ी से बहुत सारा तेल मंगवाते हैं उनके लिए आयात महंगा पड़ सकता है. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट और खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं. जहाजरानी खर्च बढ़ने से सामान की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है. वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही तनाव में है. अगर होर्मुज पूरी तरह बंद हो गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है.

आगे क्या हो सकता है

ईरान अपना दबाव बनाए रखना चाहता है जबकि अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है. दोनों तरफ से कोई समझौता दूर नजर आ रहा है. समुद्री रास्ते पर खतरा बना रहेगा तो बीमा और सुरक्षा खर्च ऊंचे ही रहेंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह खेल लंबे समय तक चल सकता है. आम आदमी के लिए सबसे जरूरी है कि तेल आपूर्ति स्थिर रहे. फिलहाल स्थिति नाजुक है और कोई भी बड़ी घटना बाजार को हिला सकती है. दुनिया की नजर होर्मुज पर टिकी हुई है क्योंकि यहां का तनाव सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता बल्कि हर देश की जेब पर असर डालता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »