आजकल मध्य पूर्व में सबसे ज्यादा चर्चा यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव की हो रही है. कई लोग पूछ रहे हैं कि हूती विद्रोही अभी सऊदी अरब की सीमा से कितनी दूर हैं और उनका खतरा कैसे बढ़ रहा है. यमन और सऊदी अरब के बीच लगभग 1450 किलोमीटर लंबी भूमि सीमा है.
हूती समूह, जिसे अंसार अल्लाह भी कहा जाता है, यमन के उत्तरी हिस्सों पर लंबे समय से कब्जा जमाए हुए है. खासकर सादा प्रांत और आसपास के इलाके सऊदी अरब के दक्षिणी प्रांतों जजान और नजरान से बिलकुल सटे हुए हैं. यानी कई जगहों पर हूती विद्रोही सऊदी सीमा पर ही खड़े हैं. दूरी शून्य के बराबर है. सालों से हूती इन क्षेत्रों में मौजूद हैं और वहां से सऊदी इलाकों पर मिसाइल, ड्रोन और गोले दागते रहे हैं.
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सीमा पर हूतियों की स्थिति और हालिया हमले
सऊदी अरब की दक्षिणी सीमा पर हूती विद्रोहियों का सीधा नियंत्रण होने का मतलब है कि वे कम दूरी वाली रॉकेट और तोपखाने की फायरिंग आसानी से कर सकते हैं. साथ ही लंबी दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन भी वहां से लॉन्च किए जाते हैं जो सऊदी के अंदर तक पहुंच जाते हैं.
सितंबर 2026 के मध्य में हूतियों ने नजरान क्षेत्र के शरूराह सैन्य अड्डे पर हमले का दावा किया. जजान के अल-तव्वाल इलाके में एक प्रोजेक्टाइल गिरने से दो लोग घायल हुए और मस्जिद समेत कई इमारतों को नुकसान पहुंचा. अभा, खामिस मुशैत जैसे शहरों में भी हमले हुए जहां दर्जनों लोग घायल बताए गए.
ये हमले साबित करते हैं कि सीमा से सटी स्थिति हूतियों को सऊदी के खिलाफ लगातार दबाव बनाने का मौका देती है. सऊदी वायु रक्षा इन हमलों को रोकने की कोशिश करती है लेकिन कुछ प्रोजेक्टाइल फिर भी पहुंच जाते हैं.
लाल सागर तट पर हालिया कब्जे और रणनीतिक बदलाव
भूमि सीमा पर हूती पहले से मौजूद थे लेकिन सितंबर 2026 की शुरुआत में उन्होंने लाल सागर तट पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया जो रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. इसके बाद धुबाब शहर और पेरिम द्वीप (मयून) पर भी कब्जा कर लिया.
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बाब अल-मंदेब खाड़ी के बीच में स्थित यह द्वीप दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. हूतियों के इन कब्जों से यमन के लगभग पूरे लाल सागर तट पर उनका नियंत्रण हो गया है. यह कब्जा भूमि सीमा से उनकी दूरी नहीं बढ़ाता बल्कि सऊदी अरब के लिए नई तरह का खतरा पैदा करता है.
सऊदी अरब हाल के वर्षों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की समस्याओं के कारण लाल सागर के रास्ते तेल निर्यात बढ़ा रहा था. यानबू जैसे बंदरगाहों से तेल भेजना उनके लिए वैकल्पिक रास्ता बन गया था. अब हूती बाब अल-मंदेब को नियंत्रित करने की स्थिति में आ गए हैं तो सऊदी जहाजों और तेल निर्यात पर सीधा खतरा मंडरा रहा है.
सऊदी अरब के लिए बढ़ते खतरे के मुख्य कारण
हूती विद्रोहियों का खतरा सिर्फ सीमा पर मौजूदगी तक सीमित नहीं रह गया है. कई वजहों से यह खतरा बढ़ रहा है.
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यमन के अंदर की स्थिति
यमन के अंदर भी लड़ाई जारी है. ताइज, मारेब और अल-जौफ जैसे इलाकों में सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेना और हूती भिड़ रहे हैं. सरकार की सेनाएं कुछ जगहों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं लेकिन लाल सागर तट पर हूतियों की हालिया जीत ने पूरे संतुलन को बदल दिया है.
सऊदी अरब यमनी सरकार की मदद कर रहा है और हवाई हमले भी कर रहा है. हूती इन हमलों का जवाब और बड़े हमलों से देने की चेतावनी दे रहे हैं. इससे पूरा संघर्ष और फैलने का खतरा बढ़ गया है. नागरिकों की स्थिति भी खराब हो रही है. हजारों लोग विस्थापित हो रहे हैं.
आर्थिक और सुरक्षा प्रभाव
सऊदी अरब के लिए यह स्थिति दोहरे खतरे वाली है. एक तरफ सीमा सुरक्षा की चिंता है तो दूसरी तरफ तेल अर्थव्यवस्था पर असर. सऊदी दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देशों में से एक है. अगर लाल सागर मार्ग प्रभावित हुआ तो वैश्विक तेल कीमतें बढ़ सकती हैं और सऊदी की आय पर असर पड़ सकता है.
साथ ही दक्षिणी प्रांतों में बार-बार हमले होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन भी प्रभावित हो सकता है. सऊदी सरकार ने पहले भी हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया था लेकिन लंबे युद्ध से थक चुकी है. अब वह बड़े पैमाने पर युद्ध से बचना चाहती है लेकिन हूतियों के बढ़ते हमलों से विकल्प कम हो रहे हैं.
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भविष्य की संभावनाएं और क्षेत्रीय असर
अगर मौजूदा तनाव जारी रहा तो सऊदी को और कड़ी कार्रवाई करनी पड़ सकती है. अमेरिका जैसे सहयोगी देशों से मदद की मांग भी बढ़ सकती है. हूती बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण रखकर न सिर्फ सऊदी बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को भी प्रभावित कर सकते हैं. जिबूती में अमेरिकी सैन्य अड्डा भी इन द्वीपों से करीब 30-32 KM दूर है. इससे अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ गई है.
कुल मिलाकर हूती विद्रोही भूमि सीमा पर पहले से मौजूद हैं. लाल सागर तट पर नए कब्जों से उन्होंने सऊदी अरब के लिए बहुआयामी खतरा पैदा कर दिया है. सीमा सुरक्षा, ऊर्जा मार्ग और क्षेत्रीय स्थिरता तीनों प्रभावित हो रहे हैं.
यह पूरा मामला सिर्फ दो देशों का नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक ऊर्जा बाजार से जुड़ा है. हूतियों की स्थिति और हमलों पर लगातार नजर रखना जरूरी है क्योंकि छोटी घटना भी बड़े संघर्ष में बदल सकती है. सऊदी अरब अपनी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों बचाने के लिए कूटनीति और सैन्य विकल्प दोनों पर काम कर रहा है लेकिन हूतियों की मौजूदा स्थिति ने चुनौती काफी बढ़ा दी है.
ऋचीक मिश्रा