हूतियों बनाम यमन सेना की जंग में सऊदी कहां से आ गया? सेना और हथियारों के मामले में दोनों पक्षों की क्या स्थिति

सऊदी अरब 2015 से यमन सरकार का समर्थन कर हूतियों के खिलाफ लड़ रहा है. दोनों पक्षों में सैनिकों, टैंकों, मिसाइलों और जेट्स की भारी असमानता है. हूती ड्रोन-मिसाइल पर निर्भर है. सऊदी आधुनिक हवाई ताकत वाला है.

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सऊदी अरब इस समय यमन का साथ दे रहा है लेकिन हूती लड़ाकों की संख्या ज्यादा है. (Photo: ITG) सऊदी अरब इस समय यमन का साथ दे रहा है लेकिन हूती लड़ाकों की संख्या ज्यादा है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST

यमन का गृहयुद्ध 2014 में शुरू हुआ जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार को बाहर धकेल दिया गया. 2015 में सऊदी अरब ने यमनी सरकार का समर्थन करते हुए सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हवाई हमले शुरू किए. मकसद हूतियों को रोकना और ईरान के प्रभाव को कम करना था. हूतियों पर ईरान का समर्थन होने का आरोप लगता है.

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सऊदी की दक्षिणी सीमा यमन से लगती है. हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमले सऊदी शहरों और तेल सुविधाओं तक पहुंचने लगे. सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए सऊदी शामिल हुआ. 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ लेकिन 2026 में तनाव फिर बढ़ गया. 

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हूतियों ने तटीय क्षेत्रों में बढ़त बनाई और सऊदी पर हमले तेज किए. सऊदी ने जवाबी हवाई हमले किए. अमेरिकी खुफिया समर्थन भी मिल रहा है. यह संघर्ष अब सिर्फ यमन तक सीमित नहीं. लाल सागर शिपिंग और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो रही है. सऊदी शांति चाहता है लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है.

सऊदी अरब, यमन और हूतियों की सैन्य शक्ति

सऊदी अरब

  • एक्टिव सैनिक: लगभग 2,82,000  
  • वायु शक्ति: 917 विमान संचालित करती है, जिनमें 283 एडवांस फाइटर जेट और 81 हमलावर जेट शामिल हैं. 
  • भूमि और समुद्र: लगभग 1500 टैंक, 7000 बख्तरबंद वाहन और आधुनिक नौसेना के पास गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट तथा कॉर्वेट हैं. 
  • क्षमताएं: विशाल रक्षा खर्च और उच्च तकनीक वाले पश्चिमी सैन्य हार्डवेयर से समर्थित, हालांकि लंबी दूरी के हमलों से आंतरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए महंगे एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर पर भारी निर्भर.
  • सऊदी अरब के पास उन्नत मिसाइल सिस्टम हैं. चीनी डीएफ सीरीज बैलिस्टिक मिसाइल. स्टॉर्म शैडो क्रूज मिसाइल सैकड़ों में. ब्रिमस्टोन और प्रेसिजन गाइडेड बम हजारों. एंटी-मिसाइल डिफेंस मजबूत जैसे पैट्रियट.

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यमन (आधिकारिक सरकारी बल)

  • एक्टिव सैनिक : प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) और क्षेत्रीय संरचनाओं के तहत बिखरे और बटें हुए. 
  • वायु शक्ति: गंभीर रूप से कमजोर. कुल लगभग 160 विमान और लगभग 68 पुराने फाइटर जेट. 
  • क्षमताएं: सऊदी वायु समर्थन से डिफेंसिव मैकेनिज्म मिलता है. लेकिन कमांड संरचनाओं और स्थानीय गुटों के कारण बाधित, जिनमें यूनिटी नहीं है.  
  • यमनी सरकार के पास सीमित मिसाइल. हाल में ड्रोन क्षमता बढ़ाई गई. एफपीवी और आत्मघाती ड्रोन इस्तेमाल हो रहे. सऊदी और सहयोगियों से सप्लाई मिलती है.

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हूती आंदोलन (अंसार अल्लाह)

  • एक्टिव सैनिक: 3,50,000 लड़ाके. स्थानीय भर्ती और क्षेत्रीय नेटवर्क से मजबूत. 
  • असममित शस्त्रागार: एडवांस बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल (जैसे बुरकान, तूफान और कुद्स) के साथ सुसाइड ड्रोन्स जैसे कासेफ. 
  • रणनीतिक लाभ: लाल सागर के महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्रों और बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण, एंटी-शिप मिसाइलों और ड्रोन स्वार्म का उपयोग कर वैश्विक शिपिंग को बाधित करना तथा क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे को धमकाना. 
  • एकजुटता: केंद्रीकृत कमांड संरचना और गहरी वैचारिक प्रेरणा के साथ काम करती है, जिससे एक छोटी ताकत सऊदी अरब जैसे तकनीकी रूप से श्रेष्ठ विरोधियों पर उच्च आर्थिक और प्रतिष्ठा संबंधी लागत थोप सकती है. 
  • हूतियों के पास सीमित भारी टैंक हैं. ज्यादातर हल्के वाहन, पिकअप टेक्निकल्स और कब्जा किए गए हथियारों पर निर्भर. आर्टिलरी और मोर्टार इस्तेमाल करते हैं लेकिन आधुनिक टैंक बेड़ा छोटा है.

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तीनों की तुलना 

सऊदी पारंपरिक सैन्य शक्ति में बहुत आगे है. आधुनिक जेट्स, टैंक और मिसाइल डिफेंस. लेकिन यमन जैसे युद्ध में जमीनी नियंत्रण मुश्किल. हूती सस्ते और प्रभावी ड्रोन-मिसाइल से हमला करते हैं. लड़ाकों की एकजुटता और इलाके का फायदा उठाते हैं.

यमनी सरकार सऊदी बिना कमजोर है. अनुभव बढ़ा है लेकिन एकजुटता कम. हूती संगठित और प्रेरित दिखते हैं. ईरानी समर्थन उनकी मिसाइल क्षमता बढ़ाता है.

संघर्ष लंबा चल सकता है. सऊदी हवाई श्रेष्ठता से दबाव बना सकता है लेकिन पूरी जीत हासिल करना बेहद कठिन. हूती हमले जारी रखकर बातचीत का दबाव बनाते हैं. क्षेत्रीय प्रभाव और तेल सुरक्षा दांव पर है. दोनों पक्षों को नुकसान हो रहा है. शांति के प्रयास जारी रखने होंगे वरना मानवीय संकट बढ़ेगा.

यह तुलना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ संख्या नहीं बल्कि तकनीक, रणनीति और समर्थन मायने रखते हैं. सऊदी की ताकत रक्षात्मक है जबकि हूती आक्रामक असमान तरीके अपनाते हैं.  

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