यमन के हूती विद्रोही (अंसार अल्लाह) पिछले कई सालों से मिडिल ईस्ट में सक्रिय हैं. ये लाल सागर में जहाजों पर हमले करते रहे हैं. क्षेत्रीय तनाव बढ़ाते रहे हैं. इनके पास बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य आधुनिक हथियार हैं. सवाल यह है कि ये हथियार कहां से आते हैं?
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ पैनल और अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार मुख्य स्रोत ईरान है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स इन हथियारों, कलपुर्जों, तकनीक और ट्रेनिंग की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता है. यह सहयोग 2009 से 2014 के बीच शुरू हो गया था.
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हिज्बुल्लाह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह सलाहकार भेजता है. तकनीकी ट्रेनिंग देता है. समन्वय करता है. कुछ संयुक्त राष्ट्र रिपोर्टों में इराकी विशेषज्ञों का भी जिक्र है. हमास को भी ईरान से मदद मिलती है. वैचारिक समानता है, लेकिन हमास से हूतियों को सीधे बड़े पैमाने पर हथियार भेजने के ठोस सबूत कम हैं. दोनों का संबंध मुख्य रूप से ईरान के साझा नेटवर्क से जुड़ा है.
कुछ पुराने हथियार 2015 से पहले यमन सरकार के स्टॉक से जब्त किए गए थे. इनमें सोवियत या रूसी और चीनी डिजाइन के हथियार शामिल हैं. ड्रोन के कलपुर्जे और दोहरे उपयोग वाले सामान कॉमर्शियल सप्लाई चेन से भी आते हैं. इनमें चीन और अन्य देशों के पार्ट्स शामिल होते हैं जो बिचौलियों के जरिए पहुंचते हैं.
हथियार पहुंचने के तरीके
हथियार पहुंचाने का मुख्य तरीका समुद्री तस्करी है. ईरान के बंदरगाहों जैसे बंदर अब्बास से 'ढो' नाम की नावें निकलती हैं. यमन के तट के पास समुद्र में सामान उतारती हैं. फिर छोटी नावों या जमीनी रास्तों से हूती इलाकों में पहुंचाया जाता है. हॉर्न ऑफ अफ्रीका यानी सोमालिया और जिबूती तथा ओमान के रास्ते इस्तेमाल होते हैं.
बड़े सिस्टम पूरे के पूरे नहीं भेजे जाते- जैसे मिसाइल. ज्यादातर कलपुर्जे भेजे जाते हैं. फिर यमन में स्थानीय स्तर पर असेंबल किए जाते हैं या बनाए जाते हैं. इसमें ईरानी और हिज्बुल्लाह के तकनीकी विशेषज्ञ मदद करते हैं. हूती कार्यकर्ताओं को ईरान, लेबनान, इराक या यमन में ही ट्रेनिंग दी जाती है.
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पिछले कुछ सालों में हूतियों ने स्थानीय उत्पादन क्षमता बढ़ाई है. वे ईरानी डिजाइन और बाजार में उपलब्ध पार्ट्स का इस्तेमाल करके ड्रोन और कुछ मिसाइल सिस्टम खुद बनाने लगे हैं. फिर भी एडवांस सिस्टम के लिए बाहरी मदद पर निर्भरता बनी हुई है.
मुख्य हथियारों के प्रकार और उनकी खासियत
प्रमुख हथियार इस प्रकार हैं. संख्या और क्षमता समय के साथ बदलती रहती है. रेंज और क्षमता अनुमानित हैं जो ईरानी सिस्टम और इस्तेमाल के आधार पर बताई गई हैं...
बैलिस्टिक मिसाइल सबसे महत्वपूर्ण हैं. ये ज्यादातर ईरानी डिजाइन- जैसे फतेह, शहाब, कियाम या रेजवान परिवार से ली गई हैं. कुछ स्थानीय रूप से असेंबल या बदली जाती हैं. उदाहरण हैं बुर्कान सीरीज, बद्र, असेफ या आसिफ एंटी-शिप वेरिएंट और तूफान या हातिम.
इनकी रेंज 300 किलोमीटर से लेकर 2000 किलोमीटर से ज्यादा तक हो सकती है. कुछ एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल में टर्मिनल गाइडेंस होती है जो चलते जहाजों को निशाना बना सकती है. इनका इस्तेमाल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और जहाजों के खिलाफ किया गया है.
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क्रूज मिसाइल भी महत्वपूर्ण हैं. ये ईरानी क़ुद्स या पावेह परिवार या चीनी सी-802 की कॉपी जैसे अल-मंदब, नूर या गदिर पर आधारित हैं. लैंड अटैक और एंटी-शिप दोनों वर्जन हैं. लंबी रेंज वाले 700 से 2000 किलोमीटर तक पहुंच सकते हैं. छोटे एंटी-शिप वर्जन 40 से 400 किलोमीटर के आसपास हैं. इनमें रडार या अन्य टर्मिनल सीकर लगे होते हैं.
ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन यानी एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं. ये ईरानी अबाबिल या शाहेद-131 और 136 जैसे डिजाइन पर आधारित हैं. हूती नामों में क़ासिफ, समद और वाईद शामिल हैं. इनकी रेंज कुछ सौ किलोमीटर से लेकर 1500 से 2500 किलोमीटर तक हो सकती है. वॉरहेड आमतौर पर 30 से 50 किलोग्राम का होता है. जहाजों, इंफ्रास्ट्रक्चर और लंबी दूरी के हमलों में इनका खूब इस्तेमाल हुआ है.
एंटी-शिप सिस्टम में उपरोक्त बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल के अलावा विस्फोटक ड्रोन बोट यानी बिना चालक वाली स्पीड बोट्स और पुराने सोवियत सिस्टम जैसे पी-21 या पी-22 स्टिक्स शामिल हैं. एयर डिफेंस सिस्टम में यमन के पुराने सोवियत एसएएम जैसे एस-75 और कुब, ईरानी प्रभावित सिस्टम जैसे बर्क या ताएर जैसे और एयर-टू-एयर मिसाइल को संशोधित करके बनाए गए 'थकिब' शामिल हैं. लंबी रेंज की क्षमता सीमित है.
एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और छोटे हथियारों में ईरानी कॉपी जैसे तोफन जो टो सिस्टम पर आधारित है, RPG-7, असॉल्ट राइफल और गोला-बारूद शामिल हैं. शुरुआती शिपमेंट में ये खूब थे. अन्य हथियारों में आर्टिलरी रॉकेट, लैंडमाइन, कुछ आर्मर्ड वाहन और एंटी एयरक्राफ्ट गन हैं जो यमन फोर्सेस से जब्त या विरासत में मिले.
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ईरान का हथियार ट्रांसफर से इनकार और वर्तमान स्थिति
ईरान कुछ बयानों में सीधे हथियार ट्रांसफर से इनकार करता है लेकिन राजनीतिक समर्थन स्वीकार करता है. पश्चिमी सरकारें, संयुक्त राष्ट्र पैनल ऑफ एक्सपर्ट्स और कई स्वतंत्र विश्लेषण इन ट्रांसफर को जारी और महत्वपूर्ण मानते हैं. अमेरिकी, यमन सरकार समर्थित और अन्य बलों ने कई बार ईरानी मूल के कलपुर्जे, मिसाइल, ड्रोन और संबंधित सामान जब्त किए हैं. इससे साफ है कि सप्लाई चेन अभी भी सक्रिय है.
हूतियों की क्षमता में वृद्धि इसलिए हुई क्योंकि वे स्थानीय निर्माण बढ़ा रहे हैं. इससे सप्लाई पर दबाव कम होता है और इंटरडिक्शन के बावजूद हथियार उपलब्ध रहते हैं. यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है क्योंकि ये हथियार लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग को प्रभावित करते हैं.
संरक्षण और प्रतिबंधों के बावजूद तस्करी के रास्ते बदलते रहते हैं. कुल मिलाकर हूतियों का हथियार भंडार ईरान की मदद और स्थानीय प्रयासों का मिलाजुला नतीजा है. यह स्थिति मिडिल ईस्ट की जटिल राजनीति और संघर्ष को और उलझाती है.
नोटः यह लेख सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है. इसमें कोई गुप्त जानकारी या निर्माण संबंधी निर्देश शामिल नहीं हैं. वर्तमान स्टॉक और सटीक क्षमता संघर्ष और प्रतिबंधों के कारण पूरी तरह सत्यापित करना मुश्किल है.
ऋचीक मिश्रा