इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप पर जंगलों की आग ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. वेस्ट कालीमंतन प्रांत का पोंटियानक शहर घने धुएं की चादर में ढका है. हवा इतनी खराब हो गई है कि लोगों के लिए बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है. कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है, जिससे अस्पतालों में सांस से जुड़ी परेशानियों वाले मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं.
45 साल की मिमी मारलीना को जरूरी सामान लेने के लिए धुएं से भरी सड़क पर मास्क लगाकर निकलना पड़ा. उनके दो बच्चे खांसी, गले में दर्द और बुखार से परेशान हैं. मिमी को भी धुएं के बीच सांस लेने में तकलीफ हो रही है. उनका कहना है कि अभी दवाइयों से हालत संभाली जा रही है, लेकिन अगर धुआं लंबे समय तक बना रहा तो बीमारियां बढ़ सकती हैं. अब वह अपने बच्चों को ज्यादा समय घर के अंदर ही रखती हैं.
1.25 करोड़ लोग धुएं की चपेट में
इंडोनेशिया के सात प्रांतों में जंगलों की आग से उठे धुएं ने 1.25 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया है. 9 सितंबर तक धुएं से जुड़ी सांस की बीमारियों के मामले बढ़कर 1,13,333 हो गए. 1 सितंबर को यह आंकड़ा 50,891 था. यानी कुछ ही दिनों में मरीजों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई. पोंटियानक के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में भी मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. सितंबर के शुरुआती 11 दिनों में यहां सांस लेने में परेशानी के 187 मामले सामने आए. अब रोजाना 80 से 120 मरीज पहुंच रहे हैं.
पड़ोसी देशों तक पहुंचा धुएं का असर
जंगलों की आग का असर इंडोनेशिया तक सीमित नहीं है. पड़ोसी सिंगापुर और मलेशिया की हवा पर भी इसका असर पड़ा है. खेती के लिए जमीन साफ करने से उठने वाला धुआं, कालिख और हवा में मौजूद बेहद छोटे कण हालात को और खराब कर रहे हैं.
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यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के फायर एमिशंस वॉच के मुताबिक, 7 सितंबर तक के एक हफ्ते में इंडोनेशिया से 1.97 करोड़ मीट्रिक टन धुआं निकला. यह उस दौरान दुनिया के कुल उत्सर्जन का एक तिहाई से ज्यादा था.
धुएं के साथ पानी का संकट
लोगों की परेशानी सिर्फ जहरीले धुएं तक सीमित नहीं है. बारिश की कमी और पानी के स्रोतों में खारा पानी मिलने से साफ पीने का पानी जुटाना भी मुश्किल हो गया है. कई जगह लोगों को पानी के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है.