दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में मध्य हवा में घटी खौफनाक घटना ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है. हजारों फीट की ऊंचाई पर विमान के कॉकपिट के भीतर ओमानी सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर अचानक क्रैश एक्स से हमला कर दिया और प्लेन का नियंत्रण छीनकर उसे तेजी से नीचे गिराने की कोशिश की.
देखते ही देखते विमान तेजी से नीचे जाने लगा, जिससे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई. लेकिन गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन स्मित मछार ने हार नहीं मानी और अपनी अदम्य सूझबूझ से एक विशाल हवाई हादसे को टाल दिया.
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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मछार ने कहा कि मैं उस मोमेंट में मैं अपनी लाइफ के लिए लड़ रहा था. बट एक ऐसा मोमेंट था जब मेरे को रियलाइज हुआ कि मैं गिर चुका हूं, अगर मैंने कुछ नहीं किया तो बहुत सारे लोगों की जान जाएगा. उस टाइम पे मैं खुद से बोला अगर मैं नहीं उठूंगा तो दिक्कत होगी. मैं 17 साल से ज्यादा प्लेन उड़ा रहा हूं. 11 साल से कैप्टन हूं. मुझे पता चलता है आँख बंद करके भी जहाज में क्या हो रहा है.
जब मैं नीचे गिरा हुआ था तब मुझे तब मुझे एहसास हो रहा था की नीचे जा रहा है. मुझे बिल्कुल पता था की ये एक लास्ट पुश होगा. दरवाजा बस वही है. मैं मार खा ही रहा था. बस वो खोल दिया सर. बाकी सब आ गए.
कॉकपिट का दरवाजा खुलते ही बाहर मौजूद क्रू मेंबर्स और यात्रियों (जिनमें इजरायली नागरिक यानिव हयून और अन्य शामिल थे) को अंदर दाखिल होने का मौका मिला. उन्होंने तुरंत हमलावर को-पायलट पर धावा बोल दिया और उसे दबोचकर विमान के कंट्रोल से दूर कर दिया, जिसके बाद प्लेन को सुरक्षित रूप से संभाला जा सका.
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इसके तुरंत बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. कैप्टन स्मित मछार को तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी आपातकालीन सर्जरी हुई और अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कैप्टन मछार के परिवार से फोन पर बात कर उनकी बहादुरी की सराहना की और उन्हें देश का असली 'हीरो' करार दिया. इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कैप्टन की जमकर तारीफ की और कहा कि उनकी बहादुरी ने एक और 9/11 जैसी भयानक त्रासदी को होने से रोक दिया.
उड्डयन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैप्टन मछार अंतिम क्षणों में कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल न होते, तो अंदर से बंद कॉकपिट के कारण कोई भी मदद के लिए नहीं पहुंच पाता और 174 यात्रियों तथा क्रू सदस्यों की जान चली जाती. लगभग 9,750 से अधिक घंटों का विशाल उड़ान अनुभव रखने वाले कैप्टन स्मित मछार ने यह साबित कर दिया कि अत्यधिक संकट की स्थिति में भी साहस और त्वरित निर्णय क्षमता कैसे सैकड़ों मासूम जिंदगियों की रक्षा कर सकती है.
ऋचीक मिश्रा