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अब धान की फसल पर भी मिलेगा भावांतर योजना का लाभ, MP के किसानों को बड़ी सौगात

Bhavantar Yojana: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धान उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना शुरू करने का ऐलान किया है. जिसमें MSP और बाजार मूल्य के बीच का अंतर किसानों को दिया जाएगा.

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धान किसानों को MSP और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई करेगी सरकार (Photo-X/@DrMohanYadav51)
धान किसानों को MSP और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई करेगी सरकार (Photo-X/@DrMohanYadav51)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब धान की फसल को भी भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा. राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार मूल्य के बीच के अंतर की राशि का किसानों को भुगतान करेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य है और प्रदेश सरकार खेत से लेकर बाजार तक किसानों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र धान उत्पादन के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां की छत्री धान को हाल ही में जीआई टैग मिलने से इस क्षेत्र की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है.उन्होंने कहा कि अब प्रदेश सरकार धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई करेगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके.

3,941 किसानों को मिला श्रीअन्न बोनस
मुख्यमंत्री ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश के 3,941 किसानों के खातों में 2 करोड़ 84 लाख रुपये की बोनस राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर की. किसानों को कोदो-कुटकी पर 1,000 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया गया.

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उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो-कुटकी की खरीद कर रही है. श्रीअन्न उत्पादक किसानों को एमएसपी के साथ बोनस भी उपलब्ध कराया जा रहा है.

संबल योजना के तहत 365 करोड़ की सहायता राशि जारी
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के अंतर्गत प्रदेश के 16,754 से अधिक श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता राशि ट्रांसफर की. इसके साथ ही सिवनी जिले में 629 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया गया. इन कार्यों पर लगभग 494.16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें. धान और गेहूं के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाएं, ताकि पूरे साल आय के नए स्रोत उपलब्ध हो सकें. उन्होंने कहा कि अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों पर भी ध्यान देना चाहिए.

 

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