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मूंग खरीद पर MP सरकार के फैसले को किसानों ने बताया 'लॉलीपॉप', कहा- जारी रहेगा आंदोलन

मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर सरकार और किसानों के बीच हुई तीन घंटे की बातचीत बेनतीजा रही. सरकार ने 25% की जगह 60% मूंग खरीद, स्लॉट बुकिंग और खरीद की अवधि बढ़ाने समेत कई रियायतों का ऐलान किया, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए. इसके बाद प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान हुआ और देर रात पुलिस व किसानों के बीच हल्की झड़प भी हुई.

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पुलिस और किसानों के बीच हल्की झड़प भी हुई (फोटो- ITG)
पुलिस और किसानों के बीच हल्की झड़प भी हुई (फोटो- ITG)

मध्य प्रदेश में मूंग खरीद पर सरकार और किसानों के बीच बात नहीं बन पाई. इसके बाद देर रात किसानों ने अपना प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया. इससे पहले बुधवार रात MP सरकार और किसानों के बीच 3 घंटे तक बैठक चली थी. इसमें सरकार के 25% की जगह 60% मूंग खरीदी का फैसला किया था.

बैठक में मौजूद किसानों ने इसपर संतुष्टि भी जताई थी. लेकिन थोड़ी बार आधिकारिक बयान में सहमति नहीं बनने की बात कही. ऐलान के बाद प्रदर्शनकारी किसान और पुलिस आमने-सामने भी आ गई. वहां हल्की झड़प भी हुई. पुलिस ने लाउडस्पीकर से किसानों से शांति बनाए रखने की अपील करती दिखी. देखें VIDEO:- 

किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा के बाद MP सरकार का बयान भी आया है. इसमें बताया गया था कि मध्यप्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि अब हर पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है. इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है.

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया था. कहा गया था कि अब किसान 30 जुलाई की जगह 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे.

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इसी तरह उपार्जन की आखिरी तारीख भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की गई थी. साथ ही खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की गई थी. देखें VIDEO:- 

राज्य के कृषि और किसान कल्याण मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया है. यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं पेश करेगी. समिति की अनुशंसाओं के आधार पर जरूरी सुधार तत्काल किए जाएंगे. सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है. 

सरकार के फैसले से किसान सहमत नहीं

भारतीय किसान यूनियन के संतोष बटवारे ने कहा, हमने किसानों के सामने अपनी बात रखी, लेकिन वे सहमत नहीं हुए, इसलिए विरोध-प्रदर्शन जारी है. स्थिति यह है कि सरकार को किसानों के हित में फैसला लेना चाहिए. अगर किसानों के पास लगभग 4 से 6.5 क्विंटल उपज बचती है, तो उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भी लगभग 2,800 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है. हमने समझौता करने की कोशिश की और कम से कम 10,000–12,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे का प्रस्ताव रखा, लेकिन सरकार सहमत नहीं हुई."

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किसान सुबोध राय ने कहा, हमारी मांग मूंग की 100% खरीद की थी, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना. वे केवल 60% खरीद के लिए सहमत हुए हैं. टोकन सिस्टम को तुरंत हटा दिया गया है, लेकिन हम इसे किसानों को शांत करने और विरोध खत्म करने का सिर्फ एक अस्थायी उपाय मानते हैं. लगभग 19 किसान संगठन एक साथ आ रहे हैं और बातचीत के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. हम 100% खरीद की अपनी मांग पर अडिग हैं."

विरोध-प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक किसान बोले, बातचीत प्रति एकड़ 3 क्विंटल के बारे में हुई है और किसानों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही हम तय करेंगे कि प्रस्ताव स्वीकार करना है या नहीं. मैं राष्ट्रीय किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष भी हूं और किसानों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां गया था. हम अगला कदम तभी उठाएंगे जब किसान सहमत होंगे... सरकार 3 क्विंटल पर सहमत हो गई है और अगर हमारे साथी किसान इससे संतुष्ट हैं, तो हम इसे स्वीकार कर लेंगे; वरना, हम अपनी मांग पर अड़े रहेंगे."

 भोपाल में किसानों के प्रदर्शन की वजह?
- ⁠सरकार ने प्रति एकड़ केवल 1 क्विंटल 20 किलो मूंग ही समर्थन मूल्य MSP पर खरीदने की सीमा तय की है, जबकि किसानों के मुताबिक 1 एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल मूंग की उपज होती है.
- ⁠किसानों के मुताबिक सरकार प्रति क्विंटल 8668 रुपये की दर से केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही खरीद रही
- ⁠बची हुई 3 से 4 क्विंटल मूंग किसानों को खुले बाजार (मंडी) में मजबूरीवश 4000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के कम दाम पर बेचनी पड़ रही
- ⁠इससे किसानों को प्रति क्विंटल 3000 से 4000 रुपये तक का सीधा नुकसान हो रहा है. 

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