यमन में हूती विद्रोहियों के हमले लगातार तेज हो रहे है. इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पश्चिमी तट पर बढ़ती हिंसा के कारण 1 लाख से ज्यादा लोग देश के अंदर ही अपना घर छोड़ चुके हैं. हजारों लोगों ने सुरक्षित जगह की तलाश में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पार कर जिबूती में शरण ली है.
यूएन ने हालात पर गहरी चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि कई परिवारों को अचानक अपना घर छोड़ना पड़ा. उनके पास अपना सामान लेने का भी ज्यादा समय नहीं था. कई लोग बेहद मुश्किल हालात में विस्थापित हुए हैं.
यूएन के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने मंगलवार को हालात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यमन में नागरिकों पर लड़ाई का असर लगातार बढ़ रहा है. लोग मारे जा रहे हैं. कई लोग घायल भी हुए हैं.
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यूएन के इमरजेंसी रिलीफ कोऑर्डिनेटर टॉम फ्लेचर ने राहत के लिए 9 मिलियन डॉलर जारी किए हैं. यह रकम सेंट्रल इमरजेंसी रिस्पॉन्स फंड से दी गई है. इसका इस्तेमाल विस्थापित परिवारों की मदद के लिए किया जाएगा. उन इलाकों में भी राहत पहुंचाई जाएगी, जहां इन लोगों को शरण मिली है.
यूएन के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि पहले से दबाव में चल रहे मानवीय राहत अभियान पर अब और दबाव बढ़ गया है. राहत एजेंसियों के सामने लोगों तक मदद पहुंचाना मुश्किल होता जा रहा है.
'रास्ते बंद, राहत पहुंचाना भी मुश्किल'
लड़ाई की वजह से कई प्रमुख रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई है. कुछ रास्तों पर आवाजाही सीमित कर दी गई है. कई जगहों पर इसे पूरी तरह रोक दिया गया है. इस वजह से राहतकर्मी उन लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिन्हें मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है. यूएन ने यह भी कहा कि राहत सामग्री और संसाधन तेजी से कम हो रहे हैं.
यूएन ने लड़ाई में शामिल सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा की अपील की है. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने को कहा है. साथ ही राहत सामग्री को सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के पहुंचने देने की मांग की है.
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लड़ाई से प्रभावित लोगों के लिए अदन और ताइज में अस्थायी कैंप बनाए गए हैं. इन कैंपों में बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं. कई लोगों ने अपना घर और सामान पीछे छोड़ दिया है. अदन के कैंप में भी बड़ी संख्या में टेंट लगाए गए हैं. कैंप में बच्चों के साथ परिवार भी रह रहे हैं. कुछ लोग घायल हालत में भी वहां पर मौजूद है.
हूतियों का यमन में बढ़ा दबदबा
यमन में हालिया लड़ाई के बीच हूती विद्रोहियों का प्रभाव बढ़ा है. उन्होंने लाल सागर के तट के पास कई इलाकों में बढ़त बनाई है. इससे सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकार की सेना पर दबाव बढ़ा है.
हूतियों ने देश के उत्तर में अपने प्रभाव वाले इलाकों से आगे बढ़ते हुए पश्चिमी हिस्से के कई शहरों और कस्बों पर भी नियंत्रण बढ़ाया है. कुछ द्वीपों तक भी उनका प्रभाव पहुंचा है. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास बढ़ती लड़ाई ने चिंता और बढ़ा दी है. यह दुनिया के अहम समुद्री रास्तों में शामिल है. यहां से सामान और तेल की आवाजाही होती है.
यमन में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है. इस क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का असर समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है. संयुक्त राष्ट्र ने ऐसे हालात में नागरिकों की सुरक्षा और राहत कार्यों को सबसे ज्यादा जरूरी बताया है.
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मक्का के पास सऊदी अरब एअर डिफेंस ने किया ड्रोन इंटरसेप्ट
सऊदी अरब की जॉइंट फोर्सेज कमांड के मुताबिक, रॉयल सऊदी एयर डिफेंस ने 15 सितंबर को शाम करीब 6:50 बजे एक संदिग्ध ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया. कमांड का कहना है कि ड्रोन को हूती मिलिशिया ने लॉन्च किया था. इसे मक्का अल-मुकर्रमा के दक्षिण में शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही रोक लिया गया.
कमांड ने इसे मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश बताया है. इससे पहले 2017 में बैलिस्टिक मिसाइल से हमले की घटना सामने आई थी.