अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, 21 घंटे पाकिस्तान में बिताने के बाद खाली हाथ वापस लौट गए. शांति वार्ता फेल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश दे दिया है.
वेंस हमेशा से ईरान के साथ इस तरह के युद्ध के खिलाफ रहे हैं. उन्होंने क्षेत्रीय अराजकता और बड़ी संख्या में हताहतों की चेतावनी दी थी. ऐसे में जब वो 16 घंटे की बंद कमरे की बैठकों के बाद जब वो प्रेस के सामने आए, तो उनके चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी.
वेंस ने अपनी पाकिस्तान यात्रा की शुरुआत काफी उम्मीदों के साथ की थी. उन्होंने कहा भी था कि अगर ईरान नेक नीयत से बातचीत करने के लिए तैयार है तो अमेरिका भी खुला हाथ बढ़ाएगा.
बंद कमरों में हुई लगातार 16 घंटों से ज्यादा की बैठकों के बाद वेंस पाकिस्तान के एक ग्रैंड बॉलरूम में दाखिल हुए और एक लंबी सांस ली. जब वो प्रेस को संबोधित करने के लिए मंच पर पहुंचे, तो उनके चेहरे पर मायूसी दिखाई दी.
वेंस पर व्हाइट हाउस की निगरानी
उपराष्ट्रपति वेंस के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद भी ईरान के साथ मतभेद सामने आ ही रहे थे. वहीं बैठक के दौरान भी वेंस की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी गई थी. उनके आने के ऐलान के बाद उनके काफिले के नूर खान एयर बेस छोड़ने के 15 मिनट बाद तक प्रतिबंध लगा रहा.
अमेरिकी दूतावास की उनकी यात्रा तब तक सार्वजनिक नहीं की जा सकती थी जब तक वो अपने अगले स्थान पर नहीं पहुंच गए. वो फाइव स्टार होटल 'द सेरेना' में रुके थे. जब अमेरिकी डेलिगेशन ने ईरानियों के साथ मुलाकात की या जब उन्होंने पाकिस्तानियों के साथ द्विपक्षीय बैठक की, तो किसी भी पत्रकार को कमरे में जाने की इजाजत नहीं थी.
वॉशिंगटन में भी व्हाइट हाउस के अधिकारी ये जानने के लिए फोन कर रहे थे कि इस्लामाबाद में बातचीत के दौरान क्या हो रहा है.
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वेंस के लिए पाकिस्तान यात्रा उनके कार्यकाल का सबसे हाई-प्रोफाइल असाइनमेंट था. व्हाइट हाउस के अधिकारियों को उम्मीद थी कि वो मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी को बढ़ावा देने के लिए देश भर की यात्रा करेंगे. हालांकि पहले वो हंगरी में प्रधान मंत्री विक्टर ओर्बन के लिए प्रचार करने में बिजी रहे और फिर वार्ता के लिए पाकिस्तान गए.
वेंस ने 'बेनतीजा वार्ता' को बताया 'बुरी खबर'
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने वार्ता फेल होने को 'बुरी खबर' बताया था. उन्होंने वार्ता की विफलता के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. उनके मुताबिक अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए, लेकिन ईरान ने इससे इनकार कर दिया.