अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव को लेकर भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का रुख काफी हद तक सामने आ गया है. एशियन एंड पैसिफिक आइलैंडर अमेरिकन वोट (APIAVote) के सर्वे के मुताबिक, 66% भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने कहा कि वे कांग्रेस और सीनेट, दोनों चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देंगे.
यानी राजनीतिक उलझन के बावजूद इस समुदाय का झुकाव डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ ज्यादा दिखाई दे रहा है. अमेरिका में होने वाले इन चुनावों में 435 कांग्रेस सीटों और 35 सीनेट सीटों के लिए मतदान होगा. इसके अलावा कई स्थानीय सार्वजनिक पदों के लिए भी चुनाव होंगे. सर्वे में एशियाई और पैसिफिक आइलैंडर अमेरिकी कम्यूनिटी के वोटर्स से उनकी चुनावी प्राथमिकताओं और राजनीतिक भागीदारी को लेकर सवाल पूछे गए.
90% से ज्यादा वोटर मतदान के लिए तैयार
सर्वे में सामने आया कि 90% से ज्यादा रजिस्टर्ड एशियाई-अमेरिकी और पैसिफिक आइलैंडर वोटर्स ने इस चुनाव में वोट करने की योजना जताई है. हालांकि, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से इन समुदायों तक पहुंच बनाने की कोशिश उतनी मजबूत नहीं दिखी. करीब 42% एशियाई-अमेरिकी और पैसिफिक आइलैंडर वोटरों ने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनसे संपर्क नहीं किया.
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वहीं, 58% ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की ने भी उन तक पहुंच बनाने की कोशिश नहीं की. भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में कांग्रेस चुनाव के लिए 18% ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को समर्थन देने की बात कही. वहीं सीनेट चुनाव के लिए यह आंकड़ा 22% है.
महंगाई और रोजमर्रा का खर्च सबसे बड़ी चिंता
सर्वे में यह भी सामने आया कि एशियाई-अमेरिकी मतदाताओं के लिए राजनीति सिर्फ पार्टी पसंद तक सीमित नहीं है. उनकी सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा का बढ़ता खर्च है. 90% मतदाताओं ने इसे बेहद जरूरी मुद्दा माना. इसके बाद स्वास्थ्य सेवाएं (82%), रोजगार और बेरोजगारी (80%), सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर (80%) और शिक्षा (79%) प्रमुख मुद्दे हैं.
हालांकि 66% एशियाई-अमेरिकी और पैसिफिक आइलैंडर वोटर्स ने खुद को राजनीति में काफी एक्टिव बताया, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि राजनीति के बारे में सोचते-सोचते उन्हें अक्सर थका हुआ महसूस होता है.
बता दें कि इस सर्वे में 2,066 रजिस्टर्ड वोटरों को शामिल किया गया, जिनमें 242 भारतीय-अमेरिकी और 170 पैसिफिक आइलैंडर मतदाता थे. अनुमान है कि 2026 में करीब 1.6 करोड़ एशियाई-अमेरिकी और पैसिफिक आइलैंडर नागरिक वोट देने के काबिल होंगे. ऐसे में इनका रुख मिडटर्म चुनाव के नतीजों पर खासा असर डाल सकता है.