अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट में अपनी पहली मल्टी नेशनल, मल्टी डोमेन हमलावर ड्रोन टास्क फोर्स 'फाल्कन स्ट्राइक' के गठन की घोषणा की है.
ये टास्क फोर्स अमेरिकी सेना और क्षेत्रीय साझेदारों द्वारा संचालित वे अटैक ड्रोन्स का इस्तेमाल करेगी जो हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे से हमले करने में सक्षम अनमैन्ड सिस्टम को एक साथ लाएगी. अमेरिका ने इस पहल में शामिल होने के लिए क्षेत्रीय साझेदार देशों से बातचीत शुरू कर दिया है. ये कदम अमेरिकी रीपर ड्रोन के भारी नुकसान के बाद उठाया गया है.
टास्क फोर्स फाल्कन स्ट्राइक
अमेरिकी सेना के अनुसार, टास्क फोर्स फाल्कन स्ट्राइक का उद्देश्य मिडिल ईस्ट में हमलावर ड्रोन क्षमताओं का विस्तार करना है. अमेरिकी सेना ने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है और उन्हें इस पहल में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित करेगी. हालांकि, अमेरिका ने उन देशों के नामों का खुलासा नहीं किया है, जिनके इसमें शामिल होने की उम्मीद है. खाड़ी क्षेत्र में उसके सहयोगियों, जैसे- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, बहरीन और कतर ने अभी तक टास्क फोर्स में अपनी भागीदारी की पुष्टि नहीं की है. सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि ये टास्क फोर्स क्षेत्रीय सहयोगियों के नवाचार का लाभ उठाएगी.
फाल्कन स्ट्राइक नौ महीने पहले स्थापित टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक की सफलता पर आधारित है, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का पहला समर्पित एकतरफा हमलावर ड्रोन दस्ता था. स्कॉर्पियन स्ट्राइक ने दिसंबर में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत से पहला हवाई हमलावर ड्रोन लॉन्च किया था.
युद्ध में 45 रीपर ड्रोन तबाह
इसके अलावा इस इकाई ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और जुलाई में ईरानी बंदरगाह सुविधाओं पर हमलों के दौरान मानवरहित हमलावर पोतों का इस्तेमाल किया था. नई टास्क फोर्स का नेतृत्व यूएस स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंट्रल (SOCCENT) के जवान करेंगे.
होर्मुज के आसपास अमेरिकी ड्रोनों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका ने कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन गंवा दिए हैं जो उसके कुल बेड़े का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है. इन नुकसानों के कारण पेंटागन पर ड्रोन स्टॉक को फिर से भरने का दबाव बढ़ गया है. ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस से 67 बिलियन डॉलर के फंड की मांग की है.