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नेपाल में पूर्व गोरखा सैनिकों का प्रदर्शन, भारतीय सेना में भर्ती प्रक्रिया फिर शुरू करने की मांग

नेपाली गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने पोखरा में प्रदर्शन कर भारतीय सेना में अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भर्ती पुनः शुरू करने की मांग की है. ये भर्ती 2020 में रुकी थी. प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है और चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज होगा.

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नेपाल में पूर्व गोरखा सैनिकों का प्रदर्शन. (photo: ITG)
नेपाल में पूर्व गोरखा सैनिकों का प्रदर्शन. (photo: ITG)

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा से पहले नेपाल के पोखरा शहर में पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शन किया. उनकी मांग है कि 'अग्निपथ योजना' के तहत भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती फिर से शुरू की जाए. नेपाली नागरिक ब्रिटिश भारतीय सेना और भारत की आज़ादी के बाद भारतीय सेना में सेवा देते रहे हैं, लेकिन 2020 से नेपाली युवाओं की भर्ती रुकी हुई है.

नेपाली समाचार पोर्टल राटोपाटी के अनुसार, प्रदर्शन बुधवार (12 अगस्त) को इंडियन एक्स-सर्विसमैन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा द्वारा आयोजित किया गया. समूह ने जिला प्रशासन कार्यालय के माध्यम से संघीय सरकार को दो-सूत्रीय ज्ञापन सौंपा. इसमें भर्ती तुरंत फिर शुरू करने और ‘सैनिक’ शब्द वाले पूर्व सैनिक संगठनों के नवीनीकरण की मांग की गई है.

207 साल पुराने इतिहास

गोरखा ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री ने राटोपाटी से कहा कि सुगौली संधि के बाद नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती 207 वर्षों से चल रही थी, लेकिन अग्निपथ योजना शुरू होने के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए नेपाली युवाओं को इस अवसर से वंचित कर दिया है. उन्होंने कहा कि भर्ती बंद होने से नेपाली युवाओं के रोजगार के अवसर छिन गए हैं और गोरखा सैनिकों की पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा भी खतरे में है.

खाड़ी देशों की 50 डिग्री गर्मी से कई गुना बेहतर है नौकरी

ज्ञापन में कहा गया कि अग्निवीर के चार साल के कार्यकाल में युवा लगभग 45 से 50 लाख रुपये कमाते हैं और विभिन्न सुविधाएं भी मिलती हैं. ये पेशा खाड़ी देशों में 50 डिग्री तापमान में न्यूनतम वेतन पर काम करने से सैकड़ों गुना बेहतर है.

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नेपाल सरकार ने जताई थी अनिश्चितता

दरअलस, भारत ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी, जिसके तहत अग्निवीर चार साल सेवा करते हैं और उनमें से अधिकतम 25 प्रतिशत को लंबी सेवा के लिए रखा जा सकता है. भारतीय सशस्त्र बल इस रिटेंशन प्रतिशत को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में भर्ती रुकी थी. बाद में अग्निपथ योजना लागू होने पर नेपाल सरकार ने 4 साल की सेवा के बाद युवाओं के भविष्य पर स्पष्टता न होने का हवाला देकर गोरखा भर्ती की अनुमति नहीं दी. पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी कहा था कि अब काठमांडू को फैसला करना है, क्योंकि नेपाल और भारत के नागरिकों के लिए अलग योजनाएं नहीं हो सकतीं.

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का नेपाल दौरा

खबरों के अनुसार, भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ 16 अगस्त से पांच दिन के लिए नेपाल का दौरा करेंगे. इस दौरे के दौरान दोनों सेनाओं के बीच चली आ रही परंपरा को निभाते हुए, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल जनरल सेठ को 'नेपाली सेना के जनरल' की मानद उपाधि से सम्मानित करेंगे.

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, जनरल सेठ के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से भी शिष्टाचार मुलाकात करने की संभावना है.

द काठमांडू पोस्ट ने नेपाल सेना के ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत के हवाले से कहा, 'जब भी किसी देश में नया सेना प्रमुख पद संभालता है, तो उच्च-स्तरीय दौरे करने की परंपरा होती है, जिसके दौरान दोनों प्रमुखों को जनरल की मानद उपाधि से सम्मानित किया जाता है.'

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पूर्व गोरखा सैनिकों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

नेपाली गोरखा सैनिकों का इतिहास 1815 से जुड़ा है, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद उन्हें भर्ती करना शुरू किया था. 1947 में भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत छह गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना का हिस्सा बनीं. पोखरा में प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों ने चेतावनी दी है कि यदि भारतीय सेना में भर्ती दोबारा शुरू करने की उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो वह आंदोलन को और तेज करेंगे.

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने 3 अगस्त को 'द प्रिंट' को बताया कि अब ये तय करने की जिम्मेदारी काठमांडू की है कि क्या वह अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में सेवा के लिए अपने सैनिकों को भेजेगा या नहीं.

'द प्रिंट' की रिपोर्ट के अनुसार, जनरल चौहान (रिटायर्ड) ने इस बात पर भी जोर दिया कि नेपाल के नागरिकों के लिए एक योजना और भारतीय नागरिकों के लिए दूसरी योजना नहीं हो सकती.

गौरतलब है कि जनरल चौहान और उनसे पहले के प्रमुख दिवंगत जनरल बिपिन रावत दोनों ने ही अपने सैन्य करियर की शुरुआत 11वीं गोरखा राइफल्स से की थी.

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