भारत सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई जाने वाले अपने नागरिकों को सलाह दी है कि यात्रा शुरू करने से पहले पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा जरूर करवा लें. यह सलाह मंगलवार को दुबई में भारत के वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जारी की. मिशन ने बताया कि अचानक बीमारी या इमरजेंसी की स्थिति में कई भारतीयों को भारी भरकम अस्पताल बिल चुकाने पड़े हैं. बीमा में कैशलेस सुविधा और जरूरत पड़ने पर मरीज को भारत वापस लाने का खर्च भी शामिल होना चाहिए.
यह सलाह उन सभी भारतीयों के लिए है जो घूमने या पर्यटन के मकसद से यूएई जा रहे हैं. दुबई के वाणिज्य दूतावास ने अपनी पोस्ट में साफ कहा है कि ऐसे सभी लोग यात्रा शुरू होने से पहले पर्याप्त और सही मेडिकल बीमा ले लें. यानी बीमा सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि ऐसा होना चाहिए जो जरूरत के वक्त सच में काम आए.
एडवाइजरी में बीमा की शर्तों पर भी जोर दिया गया है. बीमा ऐसा हो जिसमें कैशलेस इलाज की सुविधा मिले. इसके साथ ही अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी की हालत में मरीज को भारत वापस लाने यानी मेडिकल रिपैट्रिएशन का खर्च भी उसमें शामिल होना चाहिए. कैशलेस सुविधा का आम मतलब है कि इलाज के समय मरीज को अपनी जेब से अस्पताल को पैसे नहीं देने पड़ते.
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इस सलाह के पीछे की वजह भी मिशन ने बताई है. अबू धाबी में भारतीय दूतावास और दुबई तथा उत्तरी अमीरात में भारत के वाणिज्य दूतावास के पास ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें भारतीय नागरिक अचानक मेडिकल इमरजेंसी में फंस गए और उन पर भारी बिल आ गया. कई बार ये बिल इतने बड़े थे कि मरीज या उसके परिवार वाले उन्हें चुका ही नहीं सकते थे. भारतीय मिशन के मुताबिक इसकी वजह अपर्याप्त बीमा कवरेज रही.
यह एडवाइजरी सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं है. जो भारतीय यूएई में रोजगार वीजा पर रह रहे हैं या किसी के आश्रित के तौर पर वहां रहते हैं, उन्हें भी सलाह दी गई है कि वे अपना मेडिकल बीमा जांच लें. उन्हें यह पक्का करना है कि बीमा यूएई में होने वाले सभी मेडिकल खर्च को कवर करता हो. साथ ही बीमा में भारत तक मेडिकल रिपैट्रिएशन का खर्च भी शामिल होना चाहिए.