तुर्की अधिकारियों ने रविवार को LGBTQ+ समूहों और लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है. तुर्की ने कई LGBTQ+ सदस्यों को हिरासत में लिया और संगठनों के दफ्तरों में घुसकर तलाशी ली.
रविवार को तुर्की अधिकारियों ने उस स्थानों पर छापेमारी की जहां ये लोग एकत्रित होते थे. चुनाव से ठीक पहले पुलिस ने रात एक बजे इस्तांबुल, अंकारा, इज़मिर, आयदिन और मर्सिन जैसे बड़े शहरों में एक साथ छापेमारी की.
क्या बोले तुर्की के मंत्री
सोशल मीडिया पर तुर्की के मंत्री अकिन गुरलेक ने घोषणा की कि 162 संदिग्धों, नौ संगठनों और 13 व्यवसायों की जांच राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के परिवारों और बच्चों से संबंधित 10 साल पुराने कार्यकारी आदेश के तहत "बच्चों, परिवार की संस्था और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा" के लिए की जा रही है.
गुरलेक ने कहा कि संविधान द्वारा राज्य को परिवारों और बच्चों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके तहत बच्चों, युवाओं या परिवारों को निशाना बनाने वाले किसी भी आपराधिक संगठन, शोषण नेटवर्क या गैर कानूनी गतिविधि को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
बता दें, रविवार तड़के की गई इन छापेमारियों में कई प्रमुख LGBTQ+ अधिकारों और HIV जागरूकता समूहों के मौजूदा और पूर्व सदस्यों को निशाना बनाया गया. इन संगठनों की वेबसाइटों को भी ब्लॉक किया गया है. तुर्की के मंत्री गुरलेक ने बताया कि ऐसे संगठनों को अंतरराष्ट्रीय स्रोतों और एजेंसियों से भारी फंडिंग मिलने की बात सामने आई है.
ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन ने की छापेमारी की निंदा
वहीं, ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन ने रविवार को की गई इन छापेमारियों की निंदा की है. संगठन का कहना है कि यह कोई न्यायिक जांच नहीं है. संगठन ने इसे एक राजनीतिक अभियान बताया है. उनका कहना है कि इसका मकसद समाज को एक ही तरह के पारिवारिक ढांचे में ढालना और परिवार और बच्चों की सुरक्षा के बहाने LGBTI+ और स्वतंत्र नागरिक समाज को समाप्त करना है.
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'जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी' अपने रूढ़िवादी समर्थकों को खुश करने के लिए LGBTQ+ समूहों के खिलाफ लगातार मुखर रही है. 2015 में, इसने 'इस्तांबुल प्राइड' पर प्रतिबंध लगाया था. जबकि पिछले वर्षों में हजारों लोग इसमें शामिल होते थे.
आधुनिक तुर्की गणराज्य से पहले के ओटोमन साम्राज्य ने 1858 में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाया था, लेकिन इसके बावजूद अब भी काफी सामाजिक भेदभाव मौजूद है.