अमेरिका और इजरायल ने फरवरी में मिलकर ईरान पर धावा बोला था. लेकिन बाद में इजरायल का फोकस सीरिया और लेबनान के शहरों में हमले करने पर शिफ्ट हो गया था. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को एक फोन कॉल के दौरान नसीहत दी है कि वो सीरिया और लेबनान से अपनी सेनाओं को पीछे हटाना शुरू करें.
अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. इस दौरान ट्रंप ने इजरायल से सीरिया और लेबनान से अपने सैनिकों निकालने के लिए कहा.
ट्रंप और सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के बीच हाल ही में अहम बैठक हुई थी. दोनों नेताओं की मुलाकात तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के इतर हुई थी. इसके एक दिन बाद ही ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन करके ये नसीहत दी है.
दरअसल ट्रंप सरकार पिछले कई महीनों से इजरायल और सीरिया के बीच एक नया सुरक्षा समझौता कराने की कोशिश कर रहा है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन अब इस नतीजे पर पहुंचा है कि नेतन्याहू उन रियायतों को देने के लिए तैयार नहीं हैं जो अमेरिका चाहता था. इन रियायतों में दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद से कब्जे में लिए गए सीरियाई क्षेत्रों से इजरायली सेना को धीरे-धीरे वापस बुलाना शामिल है.
'वो आपको वहां नहीं चाहते, आपको पीछे हटना चाहिए'
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप ने पर्दे के पीछे नेतन्याहू से साफ कहा कि सीरियाई क्षेत्र में इजरायली सेना की मौजूदगी से तनाव पैदा हो रहा है और इससे युद्ध और भड़क सकता है. ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा, 'वो आपको वहां नहीं देखना चाहते. आपको अपनी सेना को दूसरी जगह तैनात करना चाहिए.'
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा, 'प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान इजरायल की सीमाओं पर सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने की अहमियत पर जोर दिया.'
बता दें कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान और दक्षिणी सीरिया के बड़े हिस्सों पर कब्जा किया हुआ है. इजरायल सरकार का दावा है कि भविष्य में किसी भी बड़े हमले को रोकने के लिए इन क्षेत्रों में सेना की मौजूदगी बेहद जरूरी है. यहां तक कि इजरायल सरकार के कुछ बड़े अधिकारी इन इलाकों पर अनिश्चित काल के लिए कंट्रोल चाहते हैं और वहां यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत कर रहे हैं.
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नेतन्याहू पर बढ़ा दबाव
अब ट्रंप की इस मांग ने इजरायली प्रधानमंत्री पर दबाव काफी बढ़ा दिया है. हालांकि, तीन महीने बाद इजरायल में होने वाले आम चुनाव नेतन्याहू के राजनीतिक अस्तित्व के लिए बेहद अहम हैं. ऐसे में इस बात की उम्मीद बहुत कम है कि नेतन्याहू सीरिया से सेना हटाने का कोई बड़ा कदम उठाएंगे या लेबनान में पहले से तय समझौते से आगे बढ़कर सैनिकों को पीछे हटने के लिए कहेंगे.