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'कर्ज लेकर भेजा, अब 4 साल की बेटी बिन मां के हो गई...', सऊदी में कत्ल कर दी गई बांग्लादेशी स्वीटी की कहानी

सऊदी अरब के मक्का में एक मस्जिद में कथित तौर पर 'अश्लील हरकत' की दोषी पाए जाने पर स्वीटी और नजरुल को मौत की सजा दी गई है. इन्हें कत्ल किए जाने की खबर बांग्लादेश में तूफान बनकर आई है. स्वीटी के पिता का कहना है कि कुछ ही दिन पहले उसकी बेटी से बात हुई थी और उसने रिहा होने की उम्मीद जताई थी. लेकिन घटनाओं का टर्न इस परिवार के दुखद खबर लेकर आया.

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स्वीटी अख्तर 4 साल पहले सऊदी अरब गई थी.  (सांकेतिक तस्वीर )
स्वीटी अख्तर 4 साल पहले सऊदी अरब गई थी. (सांकेतिक तस्वीर )

"मैंने स्वीटी की शादी करवाई थी, लेकिन वह चल नहीं पाई और उसने दोबारा शादी नहीं की. इसीलिए वह हमारा पेट पालने के लिए विदेश चली गई. मेरे हसबैंड मजदूर हैं, मिट्टी खोदने का काम करते हैं. वह वहां छह महीने तक काम करती रही, फिर महिलाओं के बीच झगड़ा हो गया और पुलिस ने मेरी बेटी को गिरफ्तार कर लिया. तब से स्वीटी जेल में है. एक साल तक हमारी उससे फोन पर कोई बात नहीं हो पाई. फिर, एक दिन अचानक हमारी उससे बात हो गई. मुझे अपनी बेटी वापस चाहिए."

ये बयान स्वीटी अख्तर के पिता का है. वही स्वीटी जिसे एक दूसरे बांग्लादेशी नजरुल इस्लाम के साथ कथित तौर पर मक्का के एक मस्जिद में 'अश्लील हरकत' करने के जुर्म में सऊदी अरब में कत्ल कर दिया गया है.  

स्वीटी की चार साल की बेटी भी अब बिन मां के हो गई है. स्वीटी की शादी टूटी तो उसने सऊदी जाने का फैसला किया, इस दौरान उसकी बड़ी बहन ब्यूटी ने बच्ची को अपने पास रख लिया और वही उसकी परवरिश कर रही है. लेकिन इस मासूम बच्ची के लिए अपनी मां का इंतजार कभी न खत्म होने वाला बनकर रह गया.

कर्जा लेकर बेटी को भेजा था सऊदी

स्वीटी के पिता फजल मियां चार साल पहले की उस घटना को याद करते हैं जब उन्होंने कर्जा लेकर अपनी बेटी को सऊदी अरब भेजा था. 

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बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार में स्वीटी की कहानी छपी है. 

स्वीटी के अब्बा फजल मियां ने चार साल पहले बेटी को सऊदी अरब भेजने के लिए 1.5 लाख टका उधार लिए थे. आज तंगैल के रहने वाले इस दिहाड़ी मजदूर को एक ऐसी ख़बर की आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है जिसे कोई भी पिता सुनना नहीं चाहेगा. 

ये खबर यह है कि उसकी बेटी का कत्ल कर दिया गया है. 

पांच महीने तक पैसा भेजती रही
 
फजल मियां ने कहा, "पहले पांच महीने तक उसने घर पर पैसे भेजे. लेकिन एक दिन उसने फ़ोन करके बताया कि उसे जेल भेज दिया गया है."

यह भी पढ़ें: 'बिना मुकदमे के कत्ल कर दिया गया बेटा...', सऊदी शासन से गुस्सा, बांग्लादेश से मांगा इंसाफ, नजरुल की कहानी

फजल मियां ने द डेली स्टार ने कहा, "स्वीटी ने बताया कि सऊदी अरब में अन्य महिला कर्मचारियों के साथ बहस होने के बाद उसे फंसाकर जेल में डाल दिया गया था. इसके बाद लगभग एक साल तक परिवार का उससे संपर्क टूट गया.

फजल ने बताया कि बाद में स्वीटी ने फिर से घर पर फोन करना शुरू कर दिया. वो आमतौर पर महीने में एक बार कॉल करती थी. लेकिन उसने कभी भी अपने मुक़दमे या सज़ा के बारे में परिवार को कुछ नहीं बताया. 

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उन्होंने याद करते हुए कहा, "अपनी आखिरी कुछ कॉलों में से एक में उसने कहा था कि शायद दो महीने में वह जेल से रिहा हो जाएगी. उसने 15 दिन पहले ही जेल से हमें फोन किया था. तब भी उसने अपनी सज़ा के बारे में कुछ नहीं बताया."

परिवार को तीन दिन पहले पता चला कि सऊदी अधिकारियों ने कथित तौर पर स्वीटी को मौत दे दी है, लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें बांग्लादेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.

विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा कि उन्हें सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को फांसी दिए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन वे उनकी पहचान की पुष्टि नहीं कर पाए हैं.

फजल ने कहा, "हमें नहीं पता कि मेरी बेटी के साथ क्या हुआ है. हमें यह भी नहीं पता कि वह जिंदा है या मर चुकी है. हमने बस कुछ अफवाहें सुनी हैं."

स्वीटी की अम्मी जोहरा ने बताया कि उनकी बेटी का तलाक हो चुका था और उसकी चार साल की एक बेटी है. स्वीटी के सऊदी अरब चले जाने के बाद, उसकी बड़ी बहन ब्यूटी ने बच्ची की परवरिश की ज़िम्मेदारी ले ली.

जोहरा ने कहा, "मैं चाहती हूं कि सरकार मुझे बताए कि मेरी बेटी के साथ क्या हुआ है. मुझे मेरी बेटी वापस चाहिए. चाहे वह ज़िंदा हो या मर चुकी हो, मुझे बस अपनी बेटी वापस चाहिए."

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पति-पत्नी नहीं थे स्वीटी और नजरुल 

हालांकि ब्राह्मणबरिया सदर उपज़िले के सुल्तानपुर यूनियन के बिरमपुर गांव के रहने वाले नजरुल के पिता ब्दुल बशीर ने इस दावे को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी शादी नहीं हुई थी और परिवार स्वीटी को नहीं जानता था. 

बांग्लादेश के न्यूज पोर्टल 'जागो न्यूज़' से बात करते हुए अब्दुल बशीर ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को तब विदेश भेज दिया था जब वह कॉलेज में ही था, ताकि वह परिवार की आर्थिक मदद कर सके. 

उन्होंने कहा, "उसने शादी कब की? वह महिला नज़रुल की पत्नी नहीं थी. हम तो उसे जानते तक नहीं हैं. मैंने सुना है कि वे एक ही जगह पर काम करते थे."

फिलहाल इस मामले में बांग्लादेश ने सऊदी अरब सरकार से पूरी जानकारी मांगी है. 

बता दें कि सऊदी अरब में 14 अक्टूबर 2026 को दो बांग्लादेशी नागरिकों नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को मौत की सजा दी गई. सऊदी गृह मंत्रालय के अनुसार दोनों ने मक्का की एक मस्जिद में ‘अश्लील/अनैतिक कृत्य’ किया था, जिससे मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन हुआ. अदालत ने ताजीर के तहत मृत्युदंड सुनाया, जिसे उच्च अदालत ने बरकरार रखा और शाही आदेश से लागू किया गया. 

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