फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार ने उस घटना को याद किया है, जिसमें कॉकपिट के अंदर उन पर हमला हुआ था और उनकी जान खतरे में पड़ गई थी. उन्होंने बताया कि सिर पर जोरदार वार लगने के बाद वह बार-बार होश खो रहे थे. कुछ देर के लिए उन्हें लगा कि शायद वह बच नहीं पाएंगे, लेकिन उन्होंने खुद को संभालने और प्लेन में सवार लोगों की जान बचाने की कोशिश जारी रखी.
स्काई न्यूज अरबिया को दिए इंटरव्यू में कैप्टन मछार ने कहा कि मुझे एहसास हुआ कि मुझे कुछ करना होगा. मैं ऐसे नहीं मर सकता. मैं अपनी मौत स्वीकार नहीं कर सकता. उन्होंने उस घटना को एक चमत्कार बताया और कहा कि उस वक्त प्लेन में मौजूद सभी लोगों में जिंदा बचने का मजबूत इरादा था.
भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने बताया कि दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 की उड़ान सामान्य तरीके से चल रही थी. फ्लाइट के करीब दो घंटे बाद को-पायलट हमाम अल हमामी ने नमाज पढ़ने की इच्छा जताई. मछार ने सम्मान के तौर पर अपना ध्यान दूसरी ओर कर लिया. इसी दौरान उनके सिर के पिछले हिस्से पर जोरदार वार किया गया.
कैप्टन मछार ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि प्लेन की छत का कोई हिस्सा टूटकर उनके सिर पर गिरा है. लेकिन कुछ ही सेकंड में उन्हें एहसास हुआ कि उन पर हमला हो रहा है. उन्होंने कहा कि वार इतने तेज थे कि उनकी नजर धुंधली पड़ गई. उन्हें सामने की चीजें साफ दिखाई नहीं दे रही थीं.
यह भी पढ़ें: ऑपरेशन के बाद रिकवरी मोड में कैप्टन स्मित मछार, विदेश मंत्रालय ने दिया हेल्थ अपडेट
बार-बार बेहोश हो रहे थे मछार
कैप्टन मछार ने बताया कि हमले के बाद वह बार-बार बेहोश हो रहे थे. उन्होंने सीट बेल्ट खोली और आगे के वार से बचने की कोशिश की. इस दौरान उनके हाथ में भी चोट आई. उन्होंने दूसरे कैप्टन को कॉकपिट में बुलाने की कोशिश की और दरवाजा खोलने के लिए स्विच तक पहुंचने की कोशिश की.
उन्होंने बताया कि एक बार वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, लेकिन हमलावर की धमकी के बाद दरवाजा फिर बंद हो गया. इसके बाद उन्होंने प्लेन के इंजन की आवाज में बदलाव महसूस किया और विमान को तेजी से नीचे जाते हुए महसूस किया.
मछार ने कहा कि वह उपकरणों को देखे बिना भी इंजन की आवाज और प्लेन की स्पीड से समझ पा रहे थे कि कुछ गड़बड़ है. उन्होंने बताया कि उनकी यादें कई हिस्सों में बंटी हुई हैं. उन्हें याद है कि वह दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे और अपने पैरों का सहारा लेकर आगे बढ़ रहे थे. बाद में उन्होंने खुद को कॉकपिट और गैली के बीच पड़ा पाया.
कैप्टन स्मित मछार ने इससे पहले अस्पताल से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत में भी घटना के बारे में बताया था. उन्होंने कहा था कि सिर के पीछे लगातार वार किए गए और शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हुआ है.
यह भी पढ़ें: बहादुरी को सम्मान... कैप्टन स्मित मछार को इजरायल देगा वीरता पुरस्कार
नेतन्याहू से बातचीत में मच्छार ने कहा था कि मेरे अंदर एक आखिरी लड़ाई बाकी थी. उन्होंने बताया कि उस वक्त उन्हें लगा कि उनके पास कार्रवाई करने का एक और मौका है. वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, जिससे यात्रियों और क्रू को हस्तक्षेप करने का मौका मिला.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट के को-पायलट ने इमरजेंसी क्रैश एक्स से मछार पर हमला किया था. प्लेन में मौजूद यात्रियों, केबिन क्रू और ड्यूटी पर नहीं रहे कुछ पायलटों ने स्थिति संभालने में मदद की और हमलावर को काबू किया. इसके बाद दूसरे पायलटों ने विमान के नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाली. प्लेन को सऊदी अरब के तबूक की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई. प्लेन में सवार सभी 180 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. हादसे में किसी की मौत नहीं हुई.
वहीं जांच के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि को-पायलट की योजना विमान पर नियंत्रण हासिल कर उसे तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल से टकराने की थी. UAE के अधिकारी मामले की जांच विमान हाईजैक करने की कोशिश के तौर पर कर रहे हैं. जांच अभी जारी है.
यह भी पढ़ें: 'दुनिया Made in India प्लेन की चर्चा भी करेगी', PM मोदी ने कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी को सराहा
प्लेन उतरने के बाद को-पायलट को हिरासत में ले लिया गया. मछार को पहले तबूक के अस्पताल में इलाज मिला और बाद में आगे के इलाज के लिए अबू धाबी ले जाया गया. भारतीय दूतावास ने 6 अक्टूबर को कहा था कि उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है.
कैप्टन स्मित ने बेटे को किया था पहला फोन
स्काई न्यूज अरबिया को दिए इंटरव्यू में मछार ने अपने इलाज और मदद करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया. घटना के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने दो साल के बेटे को फोन किया था. उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्हें सबसे ज्यादा यह बात याद रहती है कि प्लेन में मौजूद हर व्यक्ति ने जिंदा बचने के लिए पूरी कोशिश की.
मछार ने बताया कि घटना के बाद उन्हें कई बार पहले वार की याद अचानक आती थी और उस दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती थी. जब विमान जमीन पर उतरा, तब उन्हें एहसास हुआ कि वह खतरे से बाहर हैं.
यह भी पढ़ें: अमेरिकी संसद में गूंजा भारतीय पायलट का नाम, स्मित मछार को मिला खास सम्मान
भारतीय पायलट की बहादुरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तारीफ की है. मछार ने सऊदी अरब और UAE में मिले इलाज और सहयोग के लिए आभार जताया. उन्होंने कहा कि वह वहां मिले सहयोग को कभी नहीं भूलेंगे.