मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच रूस अपने सहयोगी ईरान को युद्ध में मजबूत करने के लिए लगातार मदद कर रहा है.पश्चिमी खुफिया रिपोर्ट में बताया गया है कि रूस तेहरान को घातक ड्रोन, दवाएं और खाने की खेप भेज रहा है. रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान को युद्ध में टिके रहने में मदद करने के लिए मॉस्को और तेहरान के बीच ये सीक्रेट डील हुई है.
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस अपने सहयोगी ईरान को घातक हथियारों के रूप में ड्रोन की आपूर्ति करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर चुका है. साथ ही दवाइयां और खाद्य सामग्री भी भेज रहा है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, मॉस्को ईरान को युद्ध में मजबूत बनाने के लिए यह सहायता दे रहा है.
रिपोर्ट में कहा गाय है कि इजरायल और अमेरिका के तेहरान पर हमलों के कुछ दिनों बाद ही रूसी और ईरानी वरिष्ठ अधिकारियों ने सीक्रेट रूप से ड्रोन आपूर्ति पर चर्चा शुरू कर दी थी. डिलीवरी की प्रक्रिया मार्च की शुरुआत में शुरू कर दी गई है और इसके मार्च के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है.
उन्नत ड्रोन की जरूरत
रिपोर्ट में बताया गया है कि रूस और ईरान के बीच ये बातचीत तब शुरू हुई जब ईरान को अपनी रक्षा क्षमताएं बढ़ाने की सख्त जरूरत महसूस हुई. रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के सीनियर रिसर्च फेलो एंटोनियो जियोस्टोजी के अनुसार, ईरान को और अधिक संख्या में नहीं बल्कि 'बेहतर' और 'उन्नत' ड्रोन की जरूरत है. उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका-इजरायल हमलों के तुरंत बाद रूस से ड्रोन डिलीवरी पर चर्चा शुरू हुई थी.
उनका दावा है कि रूस ने ईरानी 'शाहेद' डिजाइनों में इंजन, नेविगेशन और एंटी-जामिंग क्षमताओं के साथ बड़े सुधार किए हैं, जिन्हें अब वह वापस ईरान को सौंप रहा है. रूस द्वारा भेजे जा रहे 'गेरान-2' जैसे मॉडल ईरान के घरेलू सिस्टम से कहीं अधिक उन्नत माने जा रहे हैं.
पेरिस के साइंसेज पो विश्वविद्यालय की प्रोफेसर निकोल ग्राजेव्स्की का मानना है कि तेहरान इन रूसी ड्रोनों की 'रिवर्स इंजीनियरिंग' कर सकता है. इससे ईरान को अपनी स्वदेशी प्रणालियों को बेहतर बनाने और इजरायली रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में बड़ी मदद मिल सकती है.
एस-400 देने से इनकार
उधर, अपनी बढ़ती नजदीकी के बावजूद रूस ने ईरान की 'एस-400' एयर डिफेंस सिस्टम की मांग को फिलहाल ठुकरा दिया है. पश्चिमी अधिकारियों का मानना है कि रूस अमेरिका के साथ सीधे तनाव को और बढ़ाने का जोखिम नहीं लेना चाहता. हालांकि, पिछले साल दिसंबर में दोनों देशों के बीच 500 वर्बा लॉन्च यूनिट और 2,500 मिसाइलों की आपूर्ति के लिए एक बड़ा समझौता जरूर हुआ है.
इसके अलावा पिछले साल रूस और ईरान ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जो एक-दूसरे की रक्षा की सीधी गारंटी तो नहीं देता, लेकिन गहरा सहयोग सुनिश्चित करता है.
खुफिया सूत्रों का दावा है कि पिछले हफ्ते इजरायल ने कैस्पियन सागर में रूस और ईरान के बीच एक प्रमुख सैन्य हस्तांतरण मार्ग को निशाना बनाकर हमले किए थे, ताकि हथियारों की इस सप्लाई चेन को तोड़ा जा सके.
फैलाई जा रही हैं फेक न्यूज
वहीं, इस पूरे मामले पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे केवल अफवाह और फेक न्यूज करार दिया है. उन्होंने कहा कि इस वक्त बहुत सारी फेक न्यूज फैलाई जा रही हैं. एक बात सच है कि रूस और ईरान के बीच केवल बातचीत जारी है. हालांकि, पश्चिमी अधिकारियों का कहना है कि मॉस्को न केवल ईरान की लड़ने की क्षमता बढ़ा रहा है, बल्कि तेहरान के राजनीतिक शासन की स्थिरता को भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.