नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के छह दिन बाद भी राहत-बचाव का काम जारी है. इस बीच त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश में बड़ी अड़चन आई है. रात करीब 3 बजे रास्ता बनाने के लिए ब्लास्टिंग की गई थी, लेकिन इसके बाद भी सुरंग के अंदर जाने का रास्ता नहीं बन सका.
रेस्क्यू टीम सुरंग में लगी तीन परतों वाली रिब्स और लोहे की सरियों को काटकर भीतर जाने का रास्ता बनाने में जुटी है. अभी तक अभियान को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली है. मुश्किल यह भी है कि टनल के अंदर लगातार पानी भर रहा है. इसे बाहर निकालने के लिए जनरेटर और पंप की व्यवस्था की जा रही है.
पर्याप्त उपकरणों की कमी बनी रोड़ा
नेपाली मीडिया के मुताबिक, पर्याप्त उपकरण नहीं होने से काम में दिक्कत आ रही है. सुरंग के अंदर लगी लोहे की रुकावटों को हटाकर रास्ता बनाने में समय लग रहा है. इसके बावजूद टीमें उपलब्ध संसाधनों के साथ फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.
वहीं, नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए अमेरिका ने 'लेवल-4: यात्रा न करें' एडवाइजरी जारी की है. रसुवागढ़ी, टिमुरे, स्याफ्रुबेँसी समेत नेपाल-चीन सीमा के इलाकों में जाने से मना किया गया है. भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के आसपास भी सावधानी बरतने को कहा गया है.
इसके अलावा, पूरे नेपाल को 'लेवल-2: अधिक सावधानी बरतें' श्रेणी में रखा गया है. इसकी वजह नागरिक अशांति है. सितंबर 2025 के प्रदर्शन फिलहाल रुके हैं, लेकिन शहरों में दोबारा प्रदर्शन या स्थानीय अशांति की आशंका है. अमेरिकी नागरिकों को भीड़ से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देश मानने की सलाह दी गई है.
फिलहाल, ब्लास्टिंग के बाद रास्ता नहीं खुलने से बचाव अभियान को झटका लगा है. इसके बावजूद रेस्क्यू टीम ने काम बंद नहीं किया है. अब लोहे की सरियों और रिब्स को काटकर रास्ता बनाने पर जोर है. पानी निकालने की तैयारी भी साथ चल रही है.