नेपाल की भयावह बाढ़ में बचने वाले दीपक तमांग ने अपनी आपबीती सुनाई है. उन्हें पहले लगा कि जमीन हिल रही है. लेकिन जब उन्होंने देखा कि पानी, कीचड़ और पत्थरों का तेज बहाव तिमुरे बाजार की ओर आ रहा है तो वह जान बचाने के लिए ऊंची जगह की तरफ भाग गए.
बाढ़ में बचे लोगों ने बताया कि मंजर बेहद डरावना था. लोग अपनी जान बचाने के लिए जगह-जगह भाग रहे थे, कहीं घर गिर रहे थे तो कहीं लोग पानी और मलबे में बह गए. बुधवार 26 अगस्त को आई इस बाढ़ ने कई गांवों और कस्बों को तहस-नहस कर दिया गया.
675 लोगों की मौत हो गई है जबकि 2400 लोगों के लापता होने की खबर है. जब अचानक बाढ़ का पानी आया तो तमांग उस समय नेपाल-तिब्बत सीमा के पास तिमुरे कस्बे में थे. प्रभावित इलाकों में अब भी लोग मलबे में अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं.
नेपाली न्यूज पोर्टल 'ऑनलाइन खबर' की रिपोर्ट के मुताबिक तमांग ने उन्हें बताया कि जब वे उस दिन अपने घर से बाहर निकले और पहाड़ी की ओर भागे तो बाढ़ के कारण कुछ घर पहले ही तबाह हो गए थे.
तमांग ने कहा, "यह मंजर बहुत डरावना था लेकिन मेरे पास ज्यादा विकल्प नहीं थे. मेरे पीछे बाढ़ थी तो सामने पहाड़ी की दीवार जैसी ढलान."
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उन्होंने कहा कि बिना कुछ सोचे वे ढलान की ओर भागे और पहाड़ी की खड़ी चढ़ाई करने की कोशिश करते रहे. इस दौरान वे कई बार गिरे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. और ऊपर चढ़ने के लिए कांटेदार झाड़ियों का सहारा लिया. तमांग ने इसे जिंदगी और मौत के बीच अपनी आखिरी दौड़ बताया. उन्होंने कहा कि जब-जब वे नीचे गिरे उन्हें ऐसा लगा कि यही उनकी जिंदगी का आखिरी पल है.
काफी मशक्कत के बाद तमांग पहाड़ी की चोटी पर पहुंचे. यहां से उन्होंने बाढ़ का और भयावह दृश्य देखा. उन्होंने कहा, "मेरी आंखों के सामने मेरे कुछ दोस्त बह गए लेकिन मैं कुछ नहीं कर सका."
तमांग को जंगल में लकड़ी रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक पुराना गोदाम दिखा, यहां अपनी जान बचाने में कामयाब रहे और भी कई लोग थे. ये सभी वह लोग थे जो बाढ़ से बचने के लिए यहां आए थे. बचाव दल के इंतजार में बिना बिस्तर के ही इन लोगों ने रात गुजार दी. लगभग 24 घंटे बाद उन्हें वहां से निकाला गया.
नेपाली अखबार 'नया पत्रिका' को फोटो पत्रकार ने बताया कि उन्होंने घटना के करीब 1 घंटे बाद सुबह 10 बजे काठमांडू से यात्रा शुरू की थी और कुछ घंटों बाद त्रिशूली बाजार पहुंचे. यहां उन्होंने देखा कि बाजार के 50-60 घर कीचड़ में दबे हुए थे. कई जगह तो हालात इतने बुरे थे कि सिर्फ घरों की छतें नजर आ रही थी. सड़कों और घरों के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया था. हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहा था. तो वहीं कई लोग ऐसे भी थे तो बिना अपनी परवाह किए अपने परिजनों को खोज रहे थे.
इस आपदा में एक भारतीय-अमेरिकी दंपति अंजना राजा और पट्टाभिरामन वेंकटेशन भी फंस गए थे. हालांकि बाद में दोनों को एयरलिफ्ट करके काठमांडू पहुंचाया गया.
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अंजना राजा ने बताया कि बाढ़ में एक पल को उन्हें ऐसा लगा कि उनकी मृत्यु होने वाली है. वेंकटेशन ने बताया कि मलबे में एक दीवार भी तेजी से बहता आ रहा था. जिसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे सुनामी आ रही हो. अंजना राजा ने बताया कि पानी का तेज बहाव पानी और कीचड़ से भरा हुआ था. अंजना ने बताया कि जब उन्होंने अपने आस-पास घर गिरे देखे तो वे ज़ोर से अपने पति की ओऱ चिल्लाई 'भागो' और दोनों अपनी बस से कूद गए. दोनों तेजी से पहाड़ी की ओर भागे.
उन्हें पता नहीं था कि वे जा किस ओर रहे हैं. लेकिन उस समय बिना-कुछ सोच समझे वे बस ऊपर चढ़ते गए. अंजना राजा ने कहा, "मुझे उस वक्त ऐसा लगा कि बस अब हम मरने वाले हैं, मैंने अपने पति से भी यही कहा. मैंने मौत को अपनी आंखों के सामने देखा." उन्होंने बताया कि उन्हें खुद भी नहीं पता कि वे कैसे ऊपर चढ़े. वेंकटेशन ने उनके बच जाने को 'किसी चमत्कार से कम नहीं' बताया है.
फिलहाल भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव बढ़ने की आवाज सुनाई देने के बाद रसुवा, नुवाकोट तथा धादिंग के नदी किनारे के इलाकों में लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है. तलाशी और बचाव अभियान के लिए 11,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.