नेपाल में बाढ़ की तबाही का आज सातवां दिन है. पानी, मलबे और कीचड़ के बीच जिंदगी की तलाश जारी है, लेकिन हर गुजरते दिन के साथ हालात गंभीर होते जा रहे हैं. कहीं मलबे में दबे लोगों की तलाश चल रही है, तो कहीं बढ़ता नदी का पानी नई मुसीबत खड़ी कर रहा है. अब तक 1,003 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4 हजार लोग लापता हैं. राहत-बचाव अभियान के बीच लगातार हो रही बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई इलाकों में नदियां फिर उफान पर हैं. इसे देखते हुए प्रशासन ने दोबारा बाढ़ का अलर्ट जारी किया है.
नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने अब तक आठ जिलों से 1,003 शव बरामद किए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 321 मौतें चितवन जिले में हुई हैं. इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 216, नवलपरासी वेस्ट में 170, नुवाकोट में 95, गोरखा में 65, धादिंग में 57, रसुवा में 41 और तनाहुन में 38 शव मिले हैं.
लापता लोगों की संख्या भी लगातार चिंता बढ़ा रही है. इनमें 583 विदेशी सैलानी भी शामिल हैं. ऐसे में राहत टीमें मलबे से लेकर नदियों के किनारों तक एक-एक जिंदगी की तलाश में जुटी हैं. हालांकि, जगह-जगह सड़कें और पुल बह जाने के चलते जवानों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
26 अगस्त को आया था जलप्रलय
इस तबाही की शुरुआत 26 अगस्त को हुई थी. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पहाड़ से अचानक बर्फ और चट्टानें नीचे आ गिरीं. इसके बाद भोटेकोशी नदी का पानी तेजी से बढ़ा और देखते ही देखते सैलाब में बदल गया. पानी इतना तेज था कि रास्ते में आने वाले मकान, गाड़ियां, सड़कें और पुल बहते चले गए.
इस बाढ़ ने कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी भारी नुकसान पहुंचाया. तबाही का असर सीमा पार चीन तक पहुंचा. वहां भी 16 लोगों की मौत की खबर है, जबकि तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता
सात दिन बाद भी खतरा टला नहीं है. पूर्वी, मध्य और पश्चिमी नेपाल के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है. इसके चलते छोटी-बड़ी नदियों का पानी तेजी से बढ़ रहा है. नुवाकोट और रसुवा में अचानक तेज बहाव आने का खतरा सबसे ज्यादा बताया गया है.
काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर, सिंधुपालचोक, गोरखा, लमजुंग और कैलाली समेत दो दर्जन से ज्यादा जिलों के लोगों को सावधान रहने को कहा गया है. प्रशासन ने लोगों से नदी और नालों के किनारे जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है.
नदियों पर 24 घंटे नजर
अब प्रशासन की कोशिश सिर्फ बाढ़ से बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि अगली मुसीबत को पहले ही भांपने की है. कोसी, नारायणी, बागमती, कर्णाली और महाकाली जैसी बड़ी नदियों के जलस्तर और बहाव पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है. वहीं, रसुवा के तिमुरे इलाके में रियल-टाइम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इनसे सीमा क्षेत्र से आने वाले पानी की रफ्तार पर नजर रखी जा रही है. इस व्यवस्था को मौसम चेतावनी नेटवर्क से जोड़ा गया है, ताकि पानी का स्तर अचानक बढ़ने पर लोगों को समय रहते अलर्ट किया जा सके.
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मैदान में
लोगों को बचाने के लिए 21 हजार 300 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा गया है. सेना के हेलिकॉप्टर प्रभावित इलाकों में पहुंचकर फंसे लोगों तक खाना, पानी और दवाएं पहुंचा रहे हैं. अब तक करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है.
लेकिन बाढ़ ने नेपाल के रास्तों को भी बड़ी चोट पहुंचाई है. 19 बड़े पुल और कई अहम हाईवे बह गए हैं. चीन को जोड़ने वाला रसुवागढ़ी व्यापारिक रास्ता भी कट गया है. राजधानी काठमांडू से संपर्क बनाए रखने के लिए पृथ्वी और त्रिभुवन हाईवे पर वन-वे ट्रैफिक चलाया जा रहा है. मकसद साफ है कि रास्ते भले टूट गए हों, लेकिन राहत की रफ्तार नहीं रुकनी चाहिए.