इजरायल में चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सेना प्रमुख के बीच ईरान को लेकर टकराव की खबरों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नेतन्याहू ने ऐसी कार्रवाई का निर्देश दिया जिससे ईरान के साथ संघर्ष फिर भड़क सकता था. नेतन्याहू कार्यालय और रक्षा मंत्री ने ऐसी खबरों को खारिज किया है.
इजरायल चुनाव के आखिरी 24 घंटे में पहुंच गया है. लेकिन इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर से हैरान करने वाली खबर आई है.
रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इज़राइली सेना के बीच ईरान को लेकर कोई बड़ा कदम उठाने को लेकर टकराव हुआ है.
यह तनाव तब बढ़ा जब ऐसी खबरें आईं कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और सेना प्रमुख के बीच किसी 'कार्रवाई' को लेकर मतभेद हो गए. सेना को चिंता थी कि इस कदम से ईरान के साथ संघर्ष फिर से भड़क सकता है. हालांकि इज़रायल के 'चैनल 12' पर छपी इस खबर को नेतन्याहू के कार्यालय ने 'फेक न्यूज़' बताकर खारिज कर दिया.
रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने भी तुरंत इस खबर का खंडन किया. सोमवार को 'X' पर काट्ज़ ने लिखा, "मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि इज़रायल का चुनावों से पहले ईरान पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है." उन्होंने राजनीतिक और सैन्य नेताओं के बीच मतभेद की खबरों को "पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठा" बताया. हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर ईरान पहले हमला करता है तो इजरायल उसका कड़ा जवाब देगा.
इजरायल के विपक्षी उम्मीदवारों ने इन खबरों की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि वे अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने के लिए क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहे हैं. नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट ने उन्हें चेतावनी दी कि "वे अपने राजनीतिक हितों को देश की सुरक्षा से ऊपर रखने की हिम्मत न करें." उन्होंने X पर लिखा, "नेतन्याहू, मेरी नजर आप पर है."
विपक्षी गुट में शामिल 'यिसरायल बेतेनु' पार्टी के प्रमुख एविग्डोर लिबरमैन ने इजरायल के अटॉर्नी जनरल को एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने मांग की है कि नेतन्याहू के खिलाफ देशद्रोह के संभावित मामले की आपराधिक जांच की जाए. आरोप है कि नेतन्याहू "चुनाव के ठीक पहले इजरायल को युद्ध में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं, और चुनाव हारने के डर से (इजरायली) सैनिकों की जान तक दांव पर लगाने को तैयार हैं."
हालांकि इजरायल के लोग इस चुनाव को पिछले कई सालों का सबसे अहम चुनाव मान रहे हैं, लेकिन पूरे मध्य पूर्व में लोगों को उम्मीद नहीं है कि कोई भी जीते, इससे कोई बड़ा बदलाव आएगा. गाजा और ईरान के मामले में इजरायल की क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नेतन्याहू और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वियों की सोच लगभग एक जैसी ही है.
दक्षिणी गाजा में खान यूनिस से विस्थापित हुए जमाल अबू दीब का कहना है कि चाहे कोई भी जीते, फिलिस्तीनियों के लिए यह कोई अच्छी खबर नहीं होगी. उन्होंने कहा, "हर तरफ बस युद्ध और तबाही है." उन्होंने आगे बताया कि गाजा में आज भी हर दिन हमले हो रहे हैं, जिनमें लोग और बच्चे मारे जा रहे हैं. उन्होंने पूछा, "क्या आपको लगता है कि जो भी जीतेगा, वह हमें बेहतर जिंदगी देगा? बल्कि, इसका उल्टा ही होगा."
राफा से विस्थापित हुए इब्राहिम केशता ने कहा, "इन सबकी रणनीति एक जैसी है; इनमें कोई दया नहीं है, ये सबके लिए सिर्फ मौत और तबाही लाते हैं," "आइज़ेनकोट भी नेतन्याहू की तरह ही हैं; वे बिल्कुल उन्हीं जैसे होंगे. हमारे लोग रोज मारे जा रहे हैं, बिना किसी वजह के."
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हमारे लिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाती है, क्योंकि ऐसे शासन का इतिहास यही बताता है कि उसने हमारे क्षेत्र में हिंसा और खून-खराबे के अलावा कुछ नहीं दिया है."