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सिंधु के बिना सूख रहा है PAK का हलक, SCO में शहबाज ने पानी को बताया Lifeblood...

सिंधु जल समझौते पर भारत के रुख की ओर इशारा करते हुए पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा कि साझा जल संसाधनों से जुड़े समझौते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं हैं, जिनका बिना किसी शर्त के पालन किया जाना चाहिए.

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शहबाज शरीफ ने SCO में सिंधु समझौते का मुद्दा उठाया है. (Photo: ITG)
शहबाज शरीफ ने SCO में सिंधु समझौते का मुद्दा उठाया है. (Photo: ITG)

सिंधु जल समझौते पर भारत के सख्त के रूख के बाद परेशान पाकिस्तान दुनिया के मंचों पर कथित 'इंसाफ' की गुहार लगा रहा है. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कीर्गिस्तान में चल रहे SCO शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाया है और पानी को  'Lifeblood of region' कहा है. 

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने राजनीतिक मक़सद के लिए पानी का हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि पानी को कभी भी "हथियार या दबाव डालने के ज़रिया" नहीं बनाया जाना चाहिए. 

पाकिस्तान के 2026-27 के लिए SCO की अध्यक्षता संभालने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद (CHS) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही. 

हालांकि पाकिस्तान ने आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी के तौर पर इस्तेमाल करने पर चुप्पी साध ली. 

शहबाज शरीफ ने कहा, "पानी इस क्षेत्र की जीवन-रेखा है और इसे कभी भी हथियार या दबाव बनाने या राजनीतिक लाभ उठाने के ज़रिया के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि साझा जल संसाधनों से जुड़े समझौते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं हैं, जिनका बिना किसी शर्त के पालन किया जाना चाहिए."

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यह भी पढ़ें: सिंधु जल समझौते पर फैसला देने वाले हेग कोर्ट को भारत ने क्यों हड़का दिया? PAK के फेवर में दिया था फैसला

शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग में शहबाज शरीफ ने ये मुद्दा तब उठाया है जब सोमवार (31 अगस्त) को भारत ने सिंधु जल समझौते पर वर्ल्ड बैंक के सहयोग से बने हेग कोर्ट के फैसले को मानने से साफ इनकार कर दिया था. 

हेग कोर्ट ने कहा था कि सिंधु जल समझौता अभी भी कायम है और भारत को इसका पालन करना चाहिए. इस कोर्ट ने भारत को जम्मू-कश्मीर में रातले हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट पर काम को सीमित करने को कहा था. 

भारत ने द हेग कोर्ट के इस फैसले को मानने से साफ इनकार कर दिया था और कहा था कि इस अदालत का गठन ही अवैध है और इस कोर्ट के फैसले का भारत के संप्रभु निर्णयों पर कोई असर नहीं होने वाला है. 
 

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