नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच भारत ने राहत और बचाव के लिए मदद बढ़ा दी है. त्रासदी के 8वें दिन भारत का पांचवां विमान नेपाल के लिए रवाना हो गया है. इस विमान में 11 सदस्यीय बचाव दल भेजा गया है. टीम के साथ विशेष राहत और बचाव उपकरण भी भेजे गए हैं. इसके अलावा 5.5 टन जरूरी दवाएं भी नेपाल भेजी गई हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पांचवां भारतीय विमान नेपाल के लिए रवाना हो चुका है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी शेयर की है. उन्होंने कहा कि भारत लगातार नेपाल की मदद के लिए काम कर रहा है.
विशेष उपकरणों के साथ पहुंची रेस्क्यू टीम
भारत की ओर से भेजी गई 11 सदस्यीय टीम राहत और बचाव अभियान में मदद करेगी. टीम के पास विशेष उपकरण हैं. इन उपकरणों की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जाएगी. मुश्किल इलाकों में राहत कार्य को भी तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. कई जगहों पर सड़कें और घर मलबे में दब गए हैं. बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं. इस भयावह हादसे में अब तक 1093 लोग अपनी जान गवां चुके है. वहीं 4 हजार से अधिक लोग लापता है. ऐसे में राहत टीम और जरूरी सामान की जरूरत लगातार बनी हुई है.
5.5 टन जरूरी दवाएं भी भेजी गईं
भारत ने बचाव दल के साथ बड़ी मात्रा में दवाएं भी भेजी हैं. प्लेन में कुल 5.5 टन जरूरी दवाएं भेजी गई हैं. इन दवाओं का इस्तेमाल बाढ़ से प्रभावित लोगों के इलाज में किया जाएगा. आपदा के बाद बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में दवाओं की यह खेप काफी अहम मानी जा रही है.
भारत इससे पहले भी नेपाल को राहत सामग्री और बचाव सहायता भेज चुका है. पांचवें विमान के रवाना होने के साथ भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश के साथ खड़े होने का संदेश दिया है.
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं. दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर भी मजबूत संबंध हैं. आपदा के समय भारत पहले भी नेपाल की मदद करता रहा है. इस बार भी भारत ने राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है.\
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गौरतलब है, नेपाल में बचाव अभियान लगातार जारी है. कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचना अभी भी चुनौती बना हुआ है. ऐसे में भारत की भेजी गई टीम विशेष उपकरणों के साथ स्थानीय एजेंसियों की मदद करेगी. दवाओं की खेप से प्रभावित लोगों को जरूरी मेडिकल हेल्प उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी.