इजरायल के साथ युद्ध के दौरान लेबनान में जिन लोगों के घर पूरी तरह तबाह हो गए या रहने लायक नहीं बचे, उन्हें हिज्बुल्लाह मुआवजा देगा. हिज्बुल्लाह की कार्यकारी परिषद के प्रमुख ने प्रभावित परिवारों को 14,000 अमेरिकी डॉलर तक की मदद देने का ऐलान किया है.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अली दामौश ने लेबनान सरकार पर कई आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि वो विस्थापित लोगों की मदद करने के अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में नाकाम रही है.
उन्होंने बताया कि बेरूत और उसके दक्षिणी उपनगरों में जिन परिवारों के घर उजड़े हैं, उन्हें 14,000 अमेरिकी डॉलर दिए जाएंगे, जबकि लेबनान के बाकी हिस्सों में प्रभावित परिवारों को 12,000 अमेरिकी डॉलर मिलेंगे.
इस कुल रकम में 8,000 डॉलर सिर्फ फर्नीचर के लिए हैं, जबकि बाकी की रकम किराए का खर्च उठाने के मकसद से दी जा रही है. हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि इस योजना से कुल कितने परिवारों को फायदा मिलेगा और इस पर कुल कितना खर्च आएगा. माना जा रहा है कि ये धन ईरान से आया है, जिसने दशकों से हिज्बुल्लाह को अरबों डॉलर और हथियार मुहैया कराए हैं.
इस कदम का मकसद ईरान समर्थित इस संगठन और राजनीतिक दल के अपने आधार के बीच समर्थन को मजबूत करना है. इसके साथ ही लेबनान सरकार और अमेरिका को चुनौती देना है, जो हिज्बुल्लाह की फंडिंग रोकने की कोशिश कर रहा है.
पहली बार हिज्बुल्लाह की ओर से मदद का ऐलान
बता दें कि ये पहली बार है जब इजरायल के साथ हुए दो युद्धों के बाद हिज्बुल्लाह की ओर से इस तरह की वित्तीय मदद की पेशकश की गई है. इन युद्धों में लेबनान में 8,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और हजारों घर तबाह हो गए थे.
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के मुताबिक, युद्ध के चरम पर लगभग 1.2 मिलियन (12 लाख) लोग विस्थापित हुए थे. हालांकि सीजफायर के बाद ज्यादातर लोग अपने घर लौट आए हैं, लेकिन अभी भी 300,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हैं.
इस बीच, अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने लेबनान के मीडिया आउटलेट 'दिस इज बेरूत' से पिछले हफ्ते कहा था कि हिज्बुल्लाह ने वादा किया कि ये पैसा अस्तित्व में ही नहीं है. उन्होंने कहा था कि अगर ये पैसा ईरान में भी हुआ, तो भी हमारी कोशिशों के कारण ये हिज्बुल्लाह तक नहीं पहुंच पाएगा.
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'उन्हें आश्रय देने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे'
इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अली दामौश ने कहा, 'हम अमेरिकी प्रशासन के बयानों से परेशान नहीं हैं. हम अपने लोगों की सेवा करने के लिए काम कर रहे हैं और उन्हें आश्रय देने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे ताकि वो अपने सामान्य जीवन में वापस लौट सकें.'
उन्होंने कहा कि मामलों की समीक्षा करने और मुआवजा हासिल करने के लिए लोगों को हिज्बुल्लाह के बनाए गए केंद्रों पर जाना होगा.