अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की. बातचीत का विषय था मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति. ट्रंप ने ईरान युद्ध के लगभग चार हफ्ते बाद पीएम मोदी को फोन किया. इससे एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से बातचीत की थी. अमेरिकी रक्षा विभाग के अंडर सेक्रेटरी भी इस समय भारत दौरे पर हैं. अमेरिका की भारत के साथ इस बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता ने एक सवाल खड़ा कर दिया है कि ये सब अचानक से क्यों हो रहा है?
जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप का अचानक पीएम मोदी को फोन करना और भारत से संपर्क बढ़ाना एक डैमेज कंट्रोल की कोशिश है. लेकिन ये समय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान अब ईरान जंग को खत्म करने के लिए अमेरिका का प्रमुख मध्यस्थ बनकर उभर रहा है. कहा जा रहा है कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो सकती है. ऐसे हालात भारत के लिए असहज हो सकते हैं और अमेरिका इससे भलीभांति परिचित है.
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि ट्रंप पीएम मोदी को हालिया घटनाक्रमों से अवगत रखना चाहते थे. खास बात यह है कि यह फोन कॉल उस समय आई जब ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले की अपनी धमकी को पांच दिनों के लिए टाल दिया और कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत कर रहा है.
गोर ने बताया कि दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा की, खासकर इस बात पर कि होर्मुज खुला रहे. दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है. युद्ध के कारण यहां से आपूर्ति कम हुई है और तेल की कीमतें बढ़ गई हैं.
भारत, जो अपनी 90% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. ईरान ने कुछ भारतीय तेल और गैस टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन इससे देश में गैस संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इस तरह भारत इस संकट का भागीदार भी है और पीड़ित भी. प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि भारत तनाव कम करने और जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है और होर्मुज का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है.
ईरान युद्ध के बीच भारत की संतुलन नीति
इस पूरे घटनाक्रम में भारत बेहद संतुलित कूटनीतिक नीति अपना रहा है और किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर रहा है. इसके साथ ही, भारत ने ईरान, खाड़ी देशों, इजराइल और अमेरिका सभी के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं.
मोदी सरकार ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. भारत ने ईरान समेत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों से लगातार संपर्क बनाए रखा है. भारत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कोई एक साझेदारी उस पर हावी न हो जाए. वहीं, भारत ने पर्दे के पीछे मिस्र और ओमान जैसे देशों के साथ मिलकर अमेरिका और ईरान के बीच दूरी कम करने की कोशिश भी की है.
ट्रंप ने अचानक मोदी को क्यों फोन किया?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उनका देश बातचीत कराने के लिए तैयार है. ट्रंप ने भी उनके इस बयान को साझा किया. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का फोन कॉल भारत को संतुष्ट करने की कोशिश थी ताकि भारत इस घटनाक्रम को व्यक्तिगत रूप से न ले.
इसी दौरान, अमेरिकी रक्षा अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी ने भी भारत को क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया. ट्रंप की ओर से यह कॉल ऐसे समय किया गया है, जब भारत में विपक्ष सरकार की विदेश नीति की आलोचना कर रहा है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने पाकिस्तान को कूटनीतिक बढ़त लेने दी.
पाकिस्तान की कूटनीति के पीछे कारण
पाकिस्तान की मध्यस्थता की इच्छा के पीछे उसके अपने रणनीतिक हित हैं. वह अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारना चाहता है और खुद को एक विश्वसनीय कूटनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है.
भौगोलिक रूप से पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी है और वहां बड़ी शिया आबादी भी है, जिससे उसकी भूमिका अहम हो जाती है. साथ ही, वह मध्य पूर्व के लंबे युद्ध में फंसना नहीं चाहता क्योंकि वह पहले से ही अफगानिस्तान सीमा पर संघर्ष में उलझा हुआ है.