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ट्रंप के 'फेल्ड स्टेट' बताने पर भड़का क्यूबा, UNGA से डिप्लोमैट्स का वॉकआउट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने UN महासभा में क्यूबा को ‘पूरी तरह विफल देश’ बताया और कहा कि वहां की कम्युनिस्ट सरकार गिर जाएगी. ट्रंप के भाषण के दौरान क्यूबा का डेलिगेशन हॉल से बाहर निकल गया. हवाना ने इसके बाद अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की बात कही.

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ट्रंप के विवादित बयान पर UN से बाहर निकला क्यूबा (Photo-screengrab)
ट्रंप के विवादित बयान पर UN से बाहर निकला क्यूबा (Photo-screengrab)

संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को अमेरिका और क्यूबा के बीच दशकों पुरानी तनातनी एक बार फिर सामने आ गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में क्यूबा को ‘पूरी तरह विफल देश’ बताया और कहा कि वहां की कम्युनिस्ट सरकार पर अब तक का सबसे ज्यादा दबाव है और वह गिर जाएगी. ट्रंप के इन बयानों के दौरान क्यूबा का डेलिगेशन UN महासभा के हॉल से बाहर निकल गया.

ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन क्यूबा में ‘बुनियादी बदलाव’ चाहता है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में कम्युनिज्म कभी नहीं आएगा, लेकिन क्यूबा में आजादी आएगी. ट्रंप ने बताया कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्यूबा के साथ बातचीत कर रहे हैं. उनके मुताबिक, रुबियो इस बातचीत में गहराई से शामिल हैं.

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क्यूबा ने कहा- हम स्वतंत्र और संप्रभु देश

ट्रंप के बयान के बाद क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार यह स्वीकार नहीं कर पा रही कि क्यूबा एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है. उन्होंने कहा कि UN में अमेरिकी राष्ट्रपति की कही बातें इस तथ्य को नहीं बदल सकतीं.

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क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने भी ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि क्यूबा अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा. उन्होंने अमेरिका पर क्यूबा को खतरे के तौर पर पेश करके उसके खिलाफ अपनी कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

छह दशक से ज्यादा पुराना विवाद

अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव नया नहीं है. दोनों देशों के रिश्तों में टकराव 1959 की क्यूबा क्रांति के बाद से बना हुआ है. अमेरिका ने क्यूबा पर छह दशक से ज्यादा समय से व्यापार प्रतिबंध लगा रखा है. ट्रंप प्रशासन ने भी क्यूबा पर दबाव बढ़ाया है. हाल के अमेरिकी ऊर्जा प्रतिबंधों के बीच क्यूबा में ईंधन की कमी और बिजली कटौती की समस्या सामने आई है.

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ट्रंप पहले भी क्यूबा को लेकर सख्त बयान दे चुके हैं. अब UN महासभा में उनका ताजा बयान और क्यूबा के डेलिगेशन का वॉकआउट दोनों देशों के बीच जारी तनाव को फिर सामने ले आया है. एक तरफ वॉशिंगटन क्यूबा में बदलाव की बात कर रहा है, वहीं हवाना अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता पर जोर दे रहा है.

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