ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने चुनाव में जीत दर्ज कर एक बार फिर देश की सत्ता हासिल कर ली है. इस चुनाव में उनका मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो से था. चुनाव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका, ब्राजील पर लगाए गए टैरिफ और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का मुद्दा भी चर्चा में रहा. लूला की जीत को ब्राजील की घरेलू राजनीति के साथ-साथ उसकी विदेश नीति और वैश्विक संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. ऐसे में यह भी कहा जा सकता है कि ब्राजील चुनाव में बोल्सोनारो को समर्थन देने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
लूला ने चुनाव के दौरान अमेरिकी दबाव के सामने ब्राजील के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही थी. वहीं, भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने और वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर भी उन्होंने सकारात्मक रुख दिखाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लूला को जीत की बधाई देते हुए भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा जताई है.
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ट्रंप का समर्थन और 50 फीसदी टैरिफ का दबाव
ब्राजील का यह चुनाव ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका और ब्राजील के संबंधों में तनाव की स्थिति थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताया था. इसी दौरान अमेरिका ने ब्राजील के कई उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया. ब्राजील के कुछ न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच विवाद और बढ़ा.
फ्लेवियो बोल्सोनारो ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका के साथ अपने करीबी संबंधों को मुद्दा बनाया. उन्होंने दावा किया कि जीतने पर वह ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर व्यापारिक समझौते कर सकते हैं. दूसरी तरफ, लूला ने अमेरिकी व्यापारिक दबाव के आगे झुकने से इनकार किया और कहा कि ब्राजील अपने आर्थिक फैसले खुद करेगा.
ट्रंप प्रशासन ने ब्राजील में अपराध और ड्रग तस्करी से जुड़े मुद्दों को भी उठाया. लूला सरकार पर अपराध के खिलाफ पर्याप्त सख्ती नहीं करने के आरोप लगाए गए. हालांकि, चुनाव में इन मुद्दों के अलावा अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय और देश की स्वतंत्र विदेश नीति भी अहम विषय रहे.
लूला ने संप्रभुता को बनाया बड़ा मुद्दा
लूला डा सिल्वा ने अमेरिकी टैरिफ और दबाव के बीच ब्राजील की संप्रभुता पर जोर दिया. उनका कहना था कि किसी दूसरे देश के व्यापारिक फैसलों को ब्राजील की अर्थव्यवस्था तय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने संकेत दिया कि अगर अमेरिका ब्राजील के उत्पादों के लिए अपना बाजार सीमित करता है, तो उनका देश दूसरे वैश्विक बाजारों की ओर रुख कर सकता है.
लूला का यह रुख उनकी उस नीति से जुड़ा है, जिसमें ब्राजील को किसी एक बड़ी ताकत पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ संबंध मजबूत करने की बात कही जाती है. उनके लिए व्यापार के नए अवसर तलाशना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ब्राजील की स्वतंत्र भूमिका बनाए रखना अहम रहा है.
रन-ऑफ में फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराया
चुनाव के पहले दौर में फ्लेवियो बोल्सोनारो ने लूला को कड़ी चुनौती दी थी. शुरुआती नतीजों में फ्लेवियो को करीब 47 फीसदी और लूला को 45.1 फीसदी वोट मिलने की बात सामने आई थी. इसके बाद मुकाबला दूसरे दौर यानी रन-ऑफ तक पहुंचा.
अंतिम मुकाबले में लूला ने करीब 51.8 फीसदी वोट हासिल किए और फ्लेवियो को लगभग 44 लाख वोटों के अंतर से हराया. हार के बाद बोल्सोनारो खेमे ने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए नतीजों को रद्द करने की मांग की. उसने चुनाव परिणाम स्वीकार करने से इनकार किया है. मतदान का समय बढ़ाने के पीछे कुछ इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की दिक्कतों और खराब मौसम का हवाला दिया गया था.
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भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने का संदेश
लूला की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी. पीएम मोदी ने कहा कि वह भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और गहरा और व्यापक बनाने के लिए उनके साथ काम करने को उत्सुक हैं. उन्होंने दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया.
भारत और ब्राजील, दोनों ब्रिक्स के अहम सदस्य हैं. लूला बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करते रहे हैं, जिसमें वैश्विक फैसलों में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की बात कही जाती है. ऐसे में उनकी जीत के बाद भारत-ब्राजील संबंधों, व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं अहम रहेंगी.
लूला की वापसी ऐसे समय हुई है, जब वैश्विक व्यापार में टैरिफ और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल देशों के बीच संबंधों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है. उनकी सरकार के सामने घरेलू आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ अमेरिका से संबंधों को संभालने और भारत जैसे साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने की चुनौती भी रहेगी.