BRICS देशों के डॉलर से दूरी बनाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों पर रूस ने जवाब दिया है. भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS समिट के दौरान रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से पूछा गया कि ट्रंप BRICS को डॉलर के खिलाफ काम करने वाला एक मंच बताते हैं, जबकि रूस के BRICS देशों के साथ करीब 90 फीसदी भुगतान अब नेशनल करेंसी में हो रहा है. पेस्कोव ने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं है. सभी देश अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से फैसले लेते हैं.
पुतिन के प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा कि BRICS में शामिल देश अपने राष्ट्रीय हितों के लिए काम करते हैं. उन्होंने कहा कि रूस को अमेरिकी डॉलर और यूरो का इस्तेमाल करने के अधिकार से वंचित किया गया. ऐसे में रूस के सामने सवाल था कि वह अपनी करेंसी का इस्तेमाल क्यों न करे.
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राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता ने कहा कि रूस ने अलग-अलग देशों के साथ नेशनल करेंसी में भुगतान का प्रस्ताव इसलिए रखा, क्योंकि यह उसके राष्ट्रीय हितों के लिए ज्यादा बेहतर है. पेस्कोव ने साफ किया कि रूस इसे डीडॉलराइजेशन की नीति के तौर पर पेश नहीं करना चाहता.
'अमेरिका खुद डॉलर को नुकसान पहुंचा रहा'
पेस्कोव ने अमेरिकी नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहता है कि डॉलर दुनिया की रिजर्व करेंसी बना रहे, तो उसे ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिससे इस करेंसी पर भरोसा कम हो. उनके मुताबिक, अमेरिका खुद डॉलर में भरोसा कम कर रहा है और जैसे-जैसे भरोसा घट रहा है, वैसे-वैसे नेशनल करेंसी की तरफ भरोसा बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि यही इस पूरी प्रक्रिया की प्रकृति है.
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'डॉलर को फायदेमंद बनाइए'
पेस्कोव ने कहा कि सभी देश वही तरीका अपनाएंगे जो उनके लिए ज्यादा फायदेमंद होगा. अगर नेशनल करेंसी में भुगतान करना ज्यादा लाभदायक है, तो देश उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे. उन्होंने अमेरिका को सीधा संदेश देते हुए कहा कि अगर वह चाहता है कि दुनिया के देश फिर से ज्यादा डॉलर का इस्तेमाल करें, तो उसे डॉलर को सभी के लिए ज्यादा फायदेमंद बनाना होगा. पेस्कोव के मुताबिक, फिलहाल प्रक्रिया इसके उलट दिशा में आगे बढ़ रही है और इसमें रूस की कोई भूमिका नहीं है.