
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर सर्किट हाउस में देर रात उन्हें कमरा खाली करने के लिए कहा गया. महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर बताया कि सर्किट हाउस के बाहर बड़ी भीड़ जमा होकर "जय श्री राम" के नारे लगा रही थी और जिला प्रशासन बार बार उन्हें फोन और मैसेज करके कमरा खाली करने के लिए कह रहा था. उन्होंने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनसे गोलियों का सामना करने को कहा था इसलिए वे पीछे नहीं हटेंगी.
महुआ मोइत्रा के मुताबिक वे शाम 6:30 बजे सर्किट हाउस पहुंचीं और उन्हें वही कमरा दिया गया जिसमें वे हमेशा ठहरती हैं. रात 9:20 बजे उनके कमरे में खाना पहुंचाया गया. इसके बाद रात 9:47 बजे उन्हें फोन आया जिसमें कमरा खाली करने के लिए कहा गया.
उन्होंने बताया कि रात 10:52 बजे उन्हें इसी बारे में लिखित संदेश भी मिला. उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित महिला सांसद होने के नाते जब अतिरिक्त जिलाधिकारी का फोन आया कि वे कमरा खाली कर दें तो यह बहुत हैरान करने वाली बात थी.
महुआ मोइत्रा ने सभी विपक्षी सांसदों और नेताओं को संबोधित करते हुए लिखा कि वे अपने जिला मुख्यालय के सर्किट हाउस में रुकी हैं जो सांसदों के लिए सरकारी आवास है. उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हें और अन्य नेताओं को इलाके से बाहर रखने के लिए इतना बेताब है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को टैग करते हुए लिखा कि वे 2029 तक निर्वाचित सांसद हैं और लोकसभा का सत्र एक दिन पहले ही खत्म हुआ है. उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने प्रशासन को कमरा खाली करने से मना कर दिया.
इस मामले पर समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से पूछा कि क्या यह किसी सांसद के विशेषाधिकार का उल्लंघन है.

वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि एक महिला सांसद को आधी रात को सर्किट हाउस से बाहर निकालने का आदेश दिया गया और अगले दिन भाजपा नेता महिला सशक्तिकरण की बात करेंगे. उन्होंने कहा कि जो सरकार महिला की गरिमा को भी राजनीति बना दे वह खुद को ही छोटा करती है ना कि उस महिला को जिसे वह अपमानित करना चाहती है.