तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत के बीच पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर वे सभी ममता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार कर वापस लौट आते हैं तो वह एक घंटे के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे देंगे. अभिषेक बनर्जी ने कहा, 'जो लोग पार्टी छोड़कर चले गए हैं और आज मुझे दोषी ठहरा रहे हैं या गालियां दे रहे हैं, मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे दीदी (ममता बनर्जी) के पास वापस लौटें. अगर वे लौट आते हैं तो मैं एक घंटे के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा.'
उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेताओं ने बीजेपी के साथ समझौता कर लिया है. अभिषेक ने कहा, 'उन्होंने बीजेपी के साथ डील कर रखी है. पहले पार्टी छोड़ो, फिर बागी गुट या बीजेपी में शामिल हो जाओ और उसके बाद अभिषेक बनर्जी को दोष दो.' उन्होंने यह भी कहा कि अगर वास्तव में पार्टी में बगावत की वजह वही हैं, तो बागी नेताओं के टीएमसी में लौटते ही वह घंटे भर के भीतर अपना पद छोड़ने को तैयार हैं. अभिषेक बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के कई सांसद और विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं.
इन नेताओं ने पार्टी में मौजूदा संकट के लिए अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया है. सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक जैसे टीएमसी नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है. ये तीनों राज्यसभा के सांसद थे. वहीं काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 20 सांसदों ने भी अलग गुट बनाकर एनडीए का समर्थन करने का दावा किया है. इन सांसदों में काकोली घोष के अलावा, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बसुनिया, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सोरेन, शताब्दी रॉय, जून मालिया, माला रॉय, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, बापी हलदार, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, असित मल, देव अधिकारी और पार्थ भौमिक समेत कई अन्य नाम शामिल हैं.
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इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 80 में से 64 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बगावत करके अलग गुट बना लिया है. बागी गुट ने खुद को असली टीएमसी बताते हुए चुनाव आयोग के सामने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी दावा ठोका है. वहीं, बंगाल विधानसभा में पार्टी के लिए आवंटित दफ्तर पर भी कब्जा कर लिया है. ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में टीएमसी विधायक दल का नेता और विपक्ष का नेता चुना गया है.
मदन मित्रा ने भी साधा निशाना
हाल ही में टीएमसी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर बागी गुट का साथ दिया है, हालांकि उन्होंने विधायक पद नहीं छोड़ा है. मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली को 'हिटलरशाही' बताते हुए आरोप लगाया कि एक व्यक्ति के नियंत्रण के कारण पार्टी कमजोर हो रही है. वहीं, सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया, जबकि सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा और पार्टी पदों से इस्तीफा दिया. प्रकाश चिक बराइक ने भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी. इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की बात कही जा रही है.
TMC कार्यालय पर चला बुलडोजर
इस बीच, दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने शनिवार को आमतला स्थित अभिषेक बनर्जी के पार्टी कार्यालय को ध्वस्त करना शुरू कर दिया. प्रशासन का कहना है कि यह इमारत बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के बनाई गई थी और निर्माण नियमों का उल्लंघन किया गया था. भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेसीबी मशीनों की मदद से कार्रवाई की गई. मौके पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी.
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तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने आमतला स्थित पार्टी कार्यालय को गिराए जाने की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया. उन्होंने कहा कि कार्यालय खरीदी गई जमीन पर सभी वैध अनुमति और स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनाया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने बीजेपी के साथ मिलकर यह कार्रवाई की है. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग करेगी और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी.
उनका दावा है कि पार्टी ने मुख्य न्यायाधीश के ओएसडी को वीडियो सौंपे हैं, जिनमें कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ता तोड़फोड़ करते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 2031 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ, तो कानून के तहत बीजेपी के पार्टी कार्यालयों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी. साथ ही उन्होंने कहा कि वीडियो में दिख रहे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और कोई भी कानून से बच नहीं पाएगा.