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TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर FIR, हेल्थ कैंप में इलाज के बाद महिला का पैर कटने का आरोप

पश्चिम बंगाल में घुटने के दर्द से राहत पाने की उम्मीद में एक महिला हेल्थ कैंप गई थी, लेकिन बताया जा रहा है कि इलाज के बाद समस्या कम होने के बजाय अधिक बढ़ गई. इसके बाद महिला को अपना पैर ही गंवाना पड़ गया.

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पुलिस ने जानकारी दी कि 'सेवाश्रय' हेल्थ कैंप में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में पहले ही कम से कम दो FIR दर्ज की जा चुकी हैं. (Photo: PTI)
पुलिस ने जानकारी दी कि 'सेवाश्रय' हेल्थ कैंप में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में पहले ही कम से कम दो FIR दर्ज की जा चुकी हैं. (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल में एक महिला द्वारा हेल्थ कैंप में इलाज के बाद पैर गंवाने की शिकायत पर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, आरोप है कि पश्चिम बंगाल में नेता द्वारा कुछ महीने पहले शुरू किए गए हेल्थकेयर आउटरीच प्रोग्राम 'सेवाश्रय' कैंप में घुटने के दर्द के इलाज के बाद एक महिला को अपना पैर गंवाना पड़ा.

सूत्रों के मुताबिक, अब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखोपाध्याय ने शिकायतकर्ता से बात की और उसके परिवार वालों से कहा कि वे मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए सोमवार को साल्ट लेक स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय 'स्वास्थ्य भवन' आएं.

बताया जा रहा है कि मुखोपाध्याय ने रिश्तेदारों से इलाज और कथित लापरवाही से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज लाने को कहा है. बता दें, डायमंड हार्बर के सांसद ने 'सेवाश्रय' पहल को हेल्थकेयर आउटरीच प्रोग्राम के तौर पर तब शुरू किया था जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस ने जानकारी दी कि 'सेवाश्रय' हेल्थ कैंप में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में उनके खिलाफ पहले ही कम से कम दो FIR दर्ज की जा चुकी हैं.

वहीं, तीसरी FIR तब दर्ज की गई जब दक्षिण 24 परगना जिले के महेशतला की रहने वाली मालती बिस्वास के पति प्रबीर बिस्वास ने 9 जुलाई को पुलिस से शिकायत की, पति ने बताया कि उनके इलाके में हेल्थ कैंप में मेडिकल लापरवाही के कारण उनकी पत्नी को पैर गंवाना पड़ा.

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शिकायत के अनुसार, मालती बिस्वास ने एक पूर्व TMC  पार्षद के कहने पर 8 फरवरी को हेल्थ कैंप में हिस्सा लिया था. उन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटने में लंबे समय से दर्द की शिकायत थी. उन्हें कुछ दवाएं लिखी गई थीं, जो कथित तौर पर एक मेडिकल एग्जामिनर ने लिखी थीं. उस एग्जामिनर ने पर्चे पर अपना पूरा नाम या मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लिखा था, लेकिन महिला ने उन दवाओं का सेवन किया.

बताया जा रहा है कि इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दूसरे 'सेवाश्रय' मॉडल कैंप में जाना पड़ा. आरोप है कि दूसरे कैंप के डॉक्टरों ने इलाज के लिए मोटी रकम मांगी और जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया तो उन्हें सरकारी अस्पताल भेज दिया गया.

बिस्वास को एमआर बांगुर सरकारी अस्पताल भेजा गया और बाद में 19 मार्च को राज्य सरकार द्वारा संचालित कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां 25 अप्रैल को उनके घुटने की टोटल रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई. मरीज के पति ने बताया कि समस्या बढ़ने पर  27 मई को घुटने के ऊपर से पैर काटना पड़ा.

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