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सिसकने की आवाज, बंद कमरा और 8 घंटे... आजमगढ़ के तीन मासूमों की कहानी दिल दहला देगी

आजमगढ़ में एक घर के अंदर करीब 8 घंटे तक तीन मासूम बच्चे खौफ के बीच रहे. बच्चों के पिता ने उन्हें बंधक बना लिया था. आरोप है कि इससे पहले उसने अपनी पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या कर दी. पुलिस सरेंडर करने के लिए समझाती रही, लेकिन अंदर से गोली चलने के बाद ऑपरेशन को तेज करना पड़ा.

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पत्नी और पुरोहितों की हत्या के बाद बच्चों को बना लिया था बंधक. (Photo: ITG)
पत्नी और पुरोहितों की हत्या के बाद बच्चों को बना लिया था बंधक. (Photo: ITG)

आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र का शंभूपुर गांव... तारीख 22 सितंबर. शाम ढल रही थी. एक घर में पिछले तीन दिनों से महामृत्युंजय जाप चल रहा था. घर में पूजा हो रही थी. पुरोहित बुलाए गए थे. वजह थी अरविंद सिंह से जुड़ी घरेलू परेशानी. परिवार चाहता था कि पूजा-पाठ से सब ठीक हो जाए. लेकिन किसी को नहीं पता था कि कुछ ही देर बाद यही घर चीख, गोलियों और पुलिस की घेराबंदी से घिर जाएगा.

और इस पूरी कहानी के बीच थे तीन बच्चे. एक 8 साल का शौर्य. एक 5 साल की परी. और सिर्फ 6 महीने की एक मासूम बच्ची. इन तीनों के लिए आने वाले करीब 8 घंटे शायद जिंदगी के सबसे डरावने घंटे बनने वाले थे.

परिवार के मुताबिक, अरविंद सिंह शाम करीब 5:30 बजे घर पहुंचा. उस वक्त घर में पूजा चल रही थी. तीन पुरोहित पूजा करा रहे थे. बताया गया कि अरविंद ने सबसे पहले पुरोहितों से आधार कार्ड मांगे. इस बात को लेकर उसकी पत्नी बबीता सिंह ने विरोध किया. इसके बाद विवाद बढ़ गया.

Sobs Locked Room 8 Hours Heartbreaking Story of Three Childrens in Azamgarh

परिवार के बयान के मुताबिक, अरविंद ने पहले अपनी पत्नी बबीता सिंह को गोली मार दी. इसके बाद तीन पुरोहितों में से एक किसी तरह वहां से निकल गया. बाकी दो पुरोहितों को भी गोली मार दी गई. कुछ ही मिनटों में घर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था.

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यह भी पढ़ें: आत्मा का साया, घर में अनुष्ठान, फिर पत्नी और पुरोहितों पर गोलियां... आजमगढ़ कांड के पीछे 2018 की कहानी क्या है?

पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या के बाद अरविंद ने अपने तीन बच्चों को कमरे के अंदर बंधक बना लिया. इनमें 8 साल का शौर्य. 5 साल की परी. और 6 महीने की बच्ची थी. बाहर अब पुलिस पहुंच चुकी थी. अंदर अरविंद था और उसके साथ तीन मासूम बच्चे. पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश शुरू की. कोशिश थी कि वह सरेंडर कर दे और बच्चों को सुरक्षित बाहर आने दे.

परिवार के लोगों से भी बातचीत कराने की कोशिश की गई. पुलिस अधिकारियों ने उससे बात की. लेकिन अरविंद बच्चों को अपने साथ रखने पर अड़ा रहा. पुलिस के मुताबिक, वह बच्चों को अपनी ढाल की तरह इस्तेमाल करने की बात कर रहा था.

बाहर पुलिस, अंदर तीन बच्चे

समय गुजरता गया. एक घंटा. फिर दूसरा. फिर तीसरा. पुलिस ने जल्दबाजी नहीं की. क्योंकि अंदर सिर्फ आरोपी नहीं था, उसके साथ तीन बच्चे भी थे. आठ साल के बच्चे को शायद पूरी स्थिति समझ में भी नहीं आ रही होगी. पांच साल की बच्ची के लिए बाहर खड़ी पुलिस, बंद दरवाजा और घर के भीतर का माहौल क्या मायने रखता होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. और सबसे छोटी बच्ची तो सिर्फ छह महीने की थी.

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Sobs Locked Room 8 Hours Heartbreaking Story of Three Childrens in Azamgarh

पुलिस लगातार बातचीत के जरिए मामला शांत कराने की कोशिश करती रही. लेकिन समय बीतता गया. करीब 7 घंटे तक पुलिस ने घेराबंदी बनाए रखी. फिर अचानक अंदर से गोली चलने की आवाज आई. और यहीं से ऑपरेशन का सबसे खतरनाक हिस्सा शुरू हुआ. ADG वाराणसी नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस पहले से ऑपरेशन की तैयारी कर रही थी. लेकिन पुलिस की प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना थी.

फिर अंदर से एक फायर की आवाज आई. अब पुलिस को डर था कि कमरे के अंदर कुछ भी हो सकता है. पुलिस टीम ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद दरवाजा तोड़कर टीम अंदर दाखिल हुई. अंदर जाते ही अरविंद ने पुलिस पर लगातार फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस के मुताबिक, उसके पास रिवॉल्वर थी और उसने करीब 6 राउंड फायर किए. पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलाईं.

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लेकिन उस वक्त सबसे बड़ी चिंता थी कमरे के अंदर मौजूद बच्चे. पुलिस के मुताबिक, जब टीम कमरे के अंदर पहुंची तो 8 साल के शौर्य को गोली लगी हुई थी. वह घायल था. दो और बच्चे वहां मौजूद थे. छोटी बच्ची अरविंद के हाथ से नीचे गिर गई, जबकि बड़ी बेटी को उसने अपने सामने ढाल की तरह रखा हुआ था. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और अरविंद घायल हो गया. इसके बाद आरोपी और उसके घायल बेटे दोनों को अस्पताल भेजा गया. लेकिन शौर्य को बचाया नहीं जा सका. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

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यह भी पढ़ें: आजमगढ़ हत्याकांड: कौन थे वो 2 पुरोहित जिन्हें पूजा-पाठ के दौरान अरविंद सिंह ने मार डाला? परिजनों का छलका दर्द

आरोपी अरविंद की भी अस्पताल में मौत हो गई. एक घर में शुरू हुई यह कहानी अब पांच मौतों तक पहुंच चुकी थी. पत्नी बबीता सिंह, दो पुरोहित और आरोपी का 8 साल का बेटा शौर्य. इसके बाद अरविंद की भी मौत हो गई.

कमरे में उस वक्त दो बच्चे और थे. 5 साल की परी. और 6 महीने की उसकी छोटी बहन. घटना के बाद दोनों बच्चों को रिश्तेदारों के साथ भेजा गया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों बच्चे ट्रॉमा में थे और काफी देर तक कमरे में रहने की वजह से उनकी हालत को लेकर चिंता थी. अब उनके सामने एक ऐसा बचपन है, जिसकी सबसे डरावनी याद जुड़ गई है.

एक बच्ची ने अपनी मां को खो दिया. एक भाई को खो दिया. और दूसरी बच्ची, जो अभी सिर्फ छह महीने की है, उसे शायद अभी यह भी नहीं पता कि उसके आसपास क्या हुआ.

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आखिर अरविंद इतना बदल कैसे गया?

इस सवाल का जवाब 22 सितंबर की शाम में नहीं, बल्कि कई साल पीछे मिलता है. अरविंद के बचपन के दोस्त आशुतोष सिंह ने बताया कि 2018 में उसके बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या के बाद वह काफी बदल गया था. वह लोगों से मिलना-जुलना कम करने लगा था. गांव वालों और दोस्तों से दूरी बना ली थी. दोस्त के मुताबिक, वह अकेले रहने लगा था और पूजा-पाठ से उसे चिढ़ होने लगी थी. उसके नशे का आदी होने की बात भी दोस्त ने कही.

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परिवार के मुताबिक, सोमवार को भी घर में हो रही पूजा को लेकर अरविंद ने हंगामा किया था. इसके बाद घरवालों ने 112 पर फोन कर पुलिस को बुलाया था और मामला शांत कराया गया था.

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इसी दौरान घर में मौजूद पुरोहितों ने कथित तौर पर परिवार से कहा था कि सुनील सिंह की आत्मा की शांति नहीं हुई है. इसके बाद अरविंद के लिए महामृत्युंजय जाप शुरू कराया गया. यानी जिस पूजा का मकसद परिवार के मुताबिक, अरविंद के लिए शांति की कोशिश करना था, उसी पूजा के दौरान सब कुछ बिखर गया.

जिस रिवॉल्वर से वारदात हुई, उसका कनेक्शन भी भाई से था

इस कहानी का एक और अहम पहलू हथियार है. परिवार के मुताबिक, जिस रिवॉल्वर से अरविंद ने गोलीबारी की, वह उसके बड़े भाई सुनील सिंह की थी. सुनील की हत्या के बाद यह रिवॉल्वर अरविंद को ट्रांसफर हुई थी. सुनील की पत्नी के नाम भी एक हथियार का लाइसेंस ट्रांसफर हुआ था. बाद में वह दिल्ली चली गईं, जिसके बाद वह हथियार थाने में जमा होने की बात सामने आई. यानी 2018 में जिस परिवार ने एक भाई की हत्या देखी थी, उसी परिवार में वर्षों बाद फिर गोलियां चलीं.

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