उत्तर प्रदेश के संभल में कब्रिस्तान के लिए आरक्षित जमीन पर बनी 'मुस्तफा कादरी मस्जिद' पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासत गरमा गई है. इस कार्रवाई के खिलाफ समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रशासन और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है.
सपा सांसद ने इसे बेहद जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया.एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बर्क ने कहा कि ये कार्रवाई पूरी तरह अवैध है और वो इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.
बर्क ने कहा, 'मस्जिद को शहीद करने के लिए ये फैसला बहुत जल्दबाजी में लिया गया है. मैं कानूनी दायरे में रहकर साफ तौर पर कह रहा हूं कि हम लोग अपनी मस्जिद और मदरसे के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं करने देंगे. हम इस जुल्म का कानूनी रूप से मुकम्मल और मुंहतोड़ जवाब देंगे.'
जियाउर्रहमान बर्क ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि जहां कहीं भी मस्जिद और मजार को निशाना बनाया जाए, उसके खिलाफ आवाज उठाएं. उन्होंने कहा कि अगर कोई भी पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी गलत करता है, तो उसके खिलाफ लड़ें, क्योंकि ये अधिकारी कानून को घोलकर नहीं पी सकते.
वक्फ ट्रिब्यूनल में चल रहा था मामला, फिर बुलडोजर क्यों?
सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा कि ये मस्जिद करीब डेढ़ सौ साल पुरानी थी. इस मस्जिद का मामला पहले से ही 'वक्फ ट्रिब्यूनल' में चल रहा है. जब मामला अदालत में है, तो प्रशासन इस पर खुद सुनवाई करके बुलडोजर कैसे चला सकता है?
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि जब ये जमीन वक्फ में दर्ज थी, तो प्रशासन इसे सरकारी जमीन कैसे बता सकता है? बर्क ने पूछा, 'क्या उत्तर प्रदेश के अंदर सबसे बड़ी ताकत तहसीलदार और डीएम ही हैं? मस्जिद के खिलाफ एकतरफा फैसला सुनाए जाने के बाद मस्जिद पक्ष को दूसरी जगह अपील दाखिल करने का समय क्यों नहीं दिया गया?'
बर्क ने कहा कि वो सरकार से सीधे नहीं लड़ सकते, लेकिन जनता की इस लड़ाई में अपने लोगों को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे.
'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर पर खुली चुनौती
इलाके में 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर और झंडे बरामद होने के मामले पर भी सांसद बर्क ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि उनके पास भी 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर और हरे रंग का झंडा है, पुलिस उन पर कौन सा मुकदमा दर्ज करेगी?
प्रशासन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'मैं अपने नबी (पैगंबर मोहम्मद) से मोहब्बत करता हूं, तो इसमें कौन सी धारा लगती है, जरा पुलिस वाले मुझे ये बताएं. पुलिस की जिम्मेदारी समाज को भयमुक्त बनाने की है, न कि डर का माहौल पैदा करने की. आप ईद-मिलादुन्नबी के पवित्र झंडे को पाकिस्तानी झंडा बता रहे हैं, ये कैसे हो सकता है?'
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'हिम्मत है तो मुझे फांसी दो'
बर्क ने आगे कहा, 'आई लव मोहम्मद कहने में कौन सा बड़ा गुनाह है? किसी भी अधिकारी को हमारा मजहबी अधिकार छीनने का हक नहीं है. मैं अपने मजहब के साथ-साथ दूसरे मजहब का भी पूरा सम्मान करता हूं. अगर आई लव मोहम्मद कहने से कुछ होता है और प्रशासन में हिम्मत है तो मुझे फांसी दे दे.'
सांसद ने ये भी दावा किया कि आने वाले दिनों में इन सभी अधिकारियों की कोर्ट में जवाबदेही तय की जाएगी. कोई भी अधिकारी गलत काम करके बच नहीं पाएगा और उन्हें कानून के सामने जवाब देना ही होगा.