यूपी में सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में एक दिन पहले मस्जिद हटाई गई थी. रविवार सुबह उसके मलबे को हटाने का काम शुरू हुआ. सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था. मलबा हटाया जा रहा था. मशीनें काम कर रही थीं. तभी कर्मचारियों की नजर जमीन के नीचे मौजूद एक भारी-भरकम स्लैब पर पड़ी. स्लैब को हटाने की कोशिश शुरू हुई.
पहले पोकलेन मशीन लगाई गई. लेकिन स्लैब इतना मजबूत था कि मशीन भी उसे नहीं तोड़ पाई. इसके बाद कटर मंगवाया गया. स्लैब को काटकर हटाया गया. और उसके नीचे जो दिखाई दिया, उसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया. जमीन के नीचे एक कुआं था.
मामला सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर का है. जिला प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बाद यहां स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई की थी. अगले दिन मलबा हटाने का काम चल रहा था. इसी दौरान जमीन के नीचे एक भारी स्लैब दिखाई दिया. स्लैब हटाने के बाद उसके नीचे कुआं नजर आया.
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शुरुआती तौर पर कुएं की गहराई करीब 20 फीट बताई जा रही है. वहीं इसका व्यास लगभग डेढ़ मीटर बताया गया है. हालांकि प्रशासन ने अभी कुएं की वास्तविक उम्र और उसके इतिहास को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है.
पोकलेन भी नहीं हटा पाई भारी स्लैब
इस पूरी कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा वह स्लैब भी है, जिसके नीचे कुआं मिला. मलबा हटाने के दौरान कर्मचारियों को एक मजबूत और भारी स्लैब मिला. उसे हटाने के लिए पोकलेन मशीन की मदद ली गई. लेकिन मशीन से भी स्लैब नहीं टूट पाया. इसके बाद कटर मंगवाया गया. स्लैब को काटने के बाद उसे हटाया गया. और फिर नीचे कुआं दिखाई दिया.

कलेक्ट्रेट परिसर में कुआं मिलने की खबर फैली तो मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. लोग एक-एक करके कुएं को देखने पहुंचने लगे. कुएं की गहराई कितनी है? यह कब बनाया गया होगा? इसका इस्तेमाल किस लिए होता होगा?ऐसे कई सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए. हालांकि इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है.
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कुएं के सामने आने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात किया गया. कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है. प्रशासन की निगरानी में मलबा हटाने का काम भी जारी है. अब सिर्फ मलबा हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन के नीचे मिले इस ढांचे की जांच भी अहम हो गई है.
SDM बोले- प्रथम दृष्टया यह कुआं ही लग रहा है
एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद की गई कार्रवाई में यह ढांचा सामने आया है. उनके मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह कुआं ही दिखाई दे रहा है और इसकी गहराई करीब 20 फीट के आसपास है. लेकिन कुएं की असली कहानी अभी सामने आनी बाकी है. यह कितना पुराना है? इसे कब बनाया गया था? इसका इस्तेमाल किस लिए होता था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे.
अब ASI की जांच पर टिकी नजर
प्रशासन के मुताबिक, मामले की जांच के लिए ASI की टीम मौके पर आएगी. जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिला यह कुआं कितना पुराना है और इसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं. फिलहाल, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे मिला यह कुआं अब चर्चा का विषय बन गया है. भारी स्लैब के नीचे करीब 20 फीट गहरा दिखाई देने वाला कुआं आखिर कब बना और इसकी कहानी क्या है? इसका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा.
बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक ने कहा- कुएं की ऐतिहासिक स्थिति की जांच हो
कुआं मिलने के बाद शिकायतकर्ता एवं बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने प्रशासन से इसकी जांच कराने की मांग की है. विकास ने कहा कि उन्हें कुएं के मिलने की जानकारी लोगों के माध्यम से और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से हुई है. कुआं कितना पुराना है, इसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच होनी चाहिए.
विकास त्यागी ने जिला प्रशासन से मौके पर ASI की टीम बुलाकर कुएं की उम्र और उसकी ऐतिहासिक स्थिति की जांच कराने की मांग की. उन्होंने पूरे परिसर का सर्वे कराने और उसकी वीडियोग्राफी की भी मांग रखी. विकास त्यागी ने कहा कि हिंदू धर्म में कुएं को पूजनीय माना जाता है और जहां कुआं होता है, वहां देवस्थल होने की संभावना भी है. उन्हें पहले से शक था कि इस स्थान पर किसी पुराने धार्मिक स्थल को हटाकर अतिक्रमण किया गया हो सकता है.