यूपी के रायबरेली में हुए आदित्य प्रताप सिंह हत्याकांड में कोर्ट ने सपा नेता समेत 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में दो लोगों को बरी कर दिया गया. फैसला आने के बाद आरपी यादव के समर्थक जेल के बाहर उमड़ पड़े और जमकर नारेबाजी की. घटना से जिले में सियासी हलचल तेज हो गई है.
आपको बता दें कि रायबरेली जिला जज ने रायबरेली के बहुचर्चित आदित्य सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष व सदर प्रत्याशी आरपी यादव समेत 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. जबकि साक्ष्यों के अभाव में 2 आरोपियों को बरी कर दिया है.
14 दोषियों को उम्रकैद की सजा
रायबरेली जिला अदालत में जिला जज ने 9 अक्टूबर 2019 को रतापुर चौराहा स्थित सोमू ढाबा विवाद से जुड़ी आदित्य सिंह की हत्या के बहुचर्चित केस में 18 अगस्त 2026 को 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेज दिया, जबकि 2 लोगों को साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया.
ढाबा विवाद से शुरू हुई रंजिश
मामले के अनुसार सिकन्दरपुर निवासी आदित्य प्रताप सिंह सोमू ढाबे पर खाना खाने गए थे, जहां ढाबा संचालक सुरेश यादव से भुगतान को लेकर उनका विवाद हो गया. आरोप है कि सुरेश और उसके साथियों ने आदित्य व उसके दोस्तों की पिटाई की, जिसके बाद घर लौटते समय हमलावरों ने उनकी हत्या कर दी.
8 साल तक चली सुनवाई
घटना के अगले दिन 10 अक्टूबर 2019 को गढ़ी गांव के पास पुलिया किनारे आदित्य का शव मिला था. 11 जनवरी को पोस्टमार्टम हुआ और 25 दिसंबर 2019 को मामले में चार्जशीट दाखिल की गई. 20 जनवरी 2020 को कोर्ट में सुनवाई शुरू होने के बाद 8 साल तक यह केस चला.
बुलडोजर और कुर्की की कार्रवाई
मामले की पूरी कार्रवाई के दौरान तत्कालीन डीएम नेहा शर्मा के आदेश पर आरोपी सुरेश यादव के अवैध जमीन पर बने ढाबे को बुलडोजर से गिराया गया था. इसके अलावा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की के आदेश भी दिए गए थे.
पीड़ित परिवार और वकीलों की प्रतिक्रिया
मृतक की बहन रुचि सिंह ने फैसले पर खुशी जताई लेकिन बरी हुए आरोपियों से जान का खतरा बताते हुए हाई कोर्ट जाने की बात कही. शासकीय अधिवक्ता विवेक सिंह राठौड़ ने कठिन परिश्रम से 14 लोगों को सजा दिलाने की बात कही. वहीं सजा पाने वाले आरपी यादव ने फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने का ऐलान किया.
सजा पाने वाले व बरी हुए लोग
सजा पाने वालों में सुरेश यादव, विनोद कुमार, राम सुमेर, जयचंद्र, सौरभ शर्मा, मानू, आरपी यादव, रमेश यादव, अंकित यादव, हर्षित यादव, लव कुश कुमार, गया बक्श सिंह, अतुल तिवारी और सचिन कुमार सोनी शामिल हैं. वहीं साक्ष्यों के अभाव में अभीतेज सिंह और रामकृष्ण यादव को बरी किया गया.