सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मथुरा जेल का नाम चर्चा में है. यहां महिलाओं को फांसी देने के लिए विशेष व्यवस्था मौजूद है. निर्भया मामले के दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद ने भी फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. हालांकि, अभी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है.
मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अब लोगों के मन में एक सवाल है कि अगर इस सजा पर अंतिम मुहर लगती है तो दोनों को फांसी कहां दी जाएगी? क्या मुस्कान को मेरठ जेल में ही फांसी दी जाएगी या फिर कहीं और.
दरअसल, सिर्फ मथुरा जेल में महिलाओं को फांसी देने के लिए विशेष फांसीघर मौजूद है. इसी वजह से मुस्कान को फांसी दिए जाने की स्थिति में मथुरा जेल का नाम चर्चा में आ रहा है. हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मुस्कान को निश्चित रूप से वहीं फांसी दी जाएगी. अदालत के फैसले के बाद कई कानूनी चरण बाकी हैं और अंतिम निर्णय संबंधित अधिकारियों तथा लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा.
इस बीच मेरठ के पवन जल्लाद ने कहा है कि यदि मुस्कान और साहिल को फांसी देने के लिए उन्हें आधिकारिक तौर पर बुलाया जाता है तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने मृत्युदंड के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उचित निर्णय दिया है.
पवन जल्लाद ने मुस्कान के बारे में और क्या कहा
मेरठ के पवन जल्लाद ने मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के फैसले पर संतोष जताया है. पवन उन जल्लादों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के चार दोषियों को फांसी देने की प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी. पवन का कहना है कि सौरभ राजपूत की हत्या और शव को ठिकाने लगाने का तरीका बेहद गंभीर और अमानवीय था. उनके मुताबिक, ऐसे अपराध में अदालत ने मृत्युदंड सुनाकर उचित फैसला दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें मुस्कान और साहिल को फांसी देने के लिए बुलाया जाता है तो वह इसके लिए तैयार हैं. हालांकि, पवन ने स्पष्ट किया कि फांसी देने की प्रक्रिया आधिकारिक आदेश मिलने के बाद ही आगे बढ़ सकती है. उनके मुताबिक, जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से आदेश नहीं मिलता, तब तक फांसी की तारीख या उस पर अमल को लेकर कोई निश्चित बात नहीं कही जा सकती.
फांसी से पहले डेथ वारंट क्यों जरूरी है?
मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद फांसी देने की प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं हो जाती. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. सबसे पहले सत्र अदालत के मृत्युदंड के फैसले की हाईकोर्ट से पुष्टि आवश्यक होती है. दोषी को फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी होता है. आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील और परिस्थितियों के अनुसार दया याचिका का विकल्प भी हो सकता है. जब आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तब संबंधित अदालत के आदेश और डेथ वारंट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है. डेथ वारंट में फांसी से संबंधित जरूरी निर्देश होते हैं. इसलिए केवल निचली अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने के आधार पर फांसी की तारीख तय नहीं मानी जाती. पवन जल्लाद ने भी कहा है कि उन्हें जब आधिकारिक आदेश मिलेगा, तभी वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए जाएंगे. इस मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि अदालत के फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होना है.
फांसी से पहले कैसी होती है तैयारी
पवन जल्लाद के मुताबिक, फांसी देना एक निर्धारित प्रक्रिया है और इसके लिए पहले से तैयारियां करनी पड़ती हैं. फांसीघर में इस्तेमाल होने वाली व्यवस्था की जांच की जाती है. रस्से, तख्ते और अन्य जरूरी उपकरणों को परखा जाता है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की तकनीकी समस्या न आए. उन्होंने बताया कि फांसी से पहले तैयारियों और परीक्षणों के लिए समय दिया जाता है. रस्से और फांसीघर से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच के साथ जरूरी उपकरणों को भी देखा जाता है. हालांकि, किसी विशेष मामले में ऐसी तैयारियां कब शुरू होंगी, यह संबंधित जेल प्रशासन को मिले आधिकारिक आदेश और लागू नियमों पर निर्भर करता है. मुस्कान और साहिल के मामले में अभी इस तरह की किसी अंतिम तैयारी या फांसी की तारीख की पुष्टि नहीं हुई है.
क्या है मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड
मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड मार्च 2025 में सामने आया था. मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर उनकी हत्या करने तथा शव को छिपाने के आरोप लगे थे. जांच के दौरान सामने आया कि सौरभ के शव के टुकड़े करके उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया और सीमेंट की मदद से छिपाने की कोशिश की गई थी. इस घटना ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं. पुलिस की जांच और मुकदमे की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया. 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाया. अदालत में अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी.
(मेरठ से उस्मान चौधरी के इनपुट के साथ)