उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. यहां इंसानों के इलाज के लिए बने इमरजेंसी वार्ड में दो आवारा सांड बेखौफ घूमते नजर आए. सांडों को देखकर अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके साथ आए तीमारदारों में दहशत फैल गई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बुधवार शाम हुई इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल में लोग अपने बीमार परिजनों का इलाज कराने और उनकी देखभाल करने आते हैं, लेकिन जब इमरजेंसी वार्ड में ही आवारा सांड घुस जाएं, तो मरीजों और उनके परिवारों की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है. गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ.
जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम दो आवारा सांड जिला अस्पताल के मुख्य द्वार से होते हुए इमरजेंसी वार्ड में घुस आए. वहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने जब सांडों को वार्ड में घूमते देखा, तो अफरा-तफरी का माहौल बन गया. एक सांड को किसी तरह बाहर भगाया गया, लेकिन दूसरा वार्ड के भीतर तक पहुंच गया. वार्ड में मरीज पहले से ही बीमारी और परेशानी से जूझ रहे थे. ऐसे में उनके सामने सांड के घूमने से डर का माहौल बन गया. मरीजों के साथ आए परिजन भी अपने परिवार के सदस्यों को बचाने की चिंता में घबरा गए. लोगों को आशंका थी कि कहीं सांड अचानक किसी मरीज या तीमारदार पर हमला न कर दे. बाद में मौजूद तीमारदारों ने हिम्मत जुटाई और काफी मशक्कत के बाद सांड को अस्पताल से बाहर खदेड़ा. इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन घटना ने अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
तीमारदार बोले, सांड किसी को चोट पहुंचा देता तो कौन जिम्मेदार होता
अस्पताल में मौजूद तीमारदार ब्रजराज सिंह ने बताया कि वह मंगलवार रात अपने मित्र को देखने जिला अस्पताल आए थे. उनके मित्र अस्पताल में भर्ती थे. इसी दौरान उन्होंने देखा कि एक सांड इमरजेंसी वार्ड में घुस आया है और इधर-उधर घूम रहा है. ब्रजराज सिंह के मुताबिक, सांड को देखकर ऐसा लग रहा था कि वह कहीं किसी को मार न दे. उन्होंने कहा कि मरीज पहले ही बीमार होने के कारण परेशान रहते हैं. अगर ऐसे में सांड किसी मरीज को चोट पहुंचा देता, तो उसकी परेशानी और बढ़ सकती थी. उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. ब्रजराज सिंह का कहना है कि रात के समय अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी होनी चाहिए, लेकिन घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी नजर नहीं आई. उन्होंने कहा कि कागजों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती होने के बावजूद अगर आवारा सांड इमरजेंसी वार्ड तक पहुंच जाते हैं, तो यह चिंता की बात है.
ब्रजराज सिंह ने बताया कि वार्ड में सांड को देखकर बेड पर लेटे मरीज घबरा गए. कई मरीज अपने बेड से उठ गए और उनके परिजन भी उन्हें बचाने के लिए आगे आने लगे. उन्होंने कहा कि आवारा जानवरों के हमले से पहले भी हादसों की खबरें सामने आती रही हैं. ऐसे में लोगों को डर था कि कहीं अस्पताल में भी कोई अनहोनी न हो जाए. तीमारदार ने मांग की कि जिला अस्पताल में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए जाएं, ताकि मरीजों को इलाज के दौरान सुरक्षित माहौल मिल सके. अस्पताल में आने वाले लोग पहले ही बीमारी और इलाज को लेकर परेशान रहते हैं. ऐसे में इमरजेंसी वार्ड में आवारा सांडों का पहुंचना उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है.
स्थानीय लोगों और तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों और मवेशियों का घूमना आम बात हो गई है. इसके बावजूद इस समस्या को रोकने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं. जिला अस्पताल जैसे स्थान पर मरीजों की सुरक्षा बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां गंभीर हालत में भी लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं. इस घटना में एक सांड को बाहर भगाने के बाद दूसरा सांड वार्ड के अंदर तक पहुंच गया. इससे यह सवाल भी उठा कि आखिर आवारा मवेशी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तक कैसे पहुंच गए और उन्हें रोकने के लिए क्या इंतजाम थे.
अधिकारियों ने सामने आकर जवाब नहीं दिया
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में सांडों के घूमने की घटना को लेकर अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने की कोशिश की गई. हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ. फिलहाल, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच अस्पताल में आवारा मवेशियों की आवाजाही रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है. इमरजेंसी वार्ड में जहां मरीजों को तुरंत इलाज और सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, वहां सांडों का बेखौफ घूमना अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. अब देखना होगा कि इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में आवारा मवेशियों को रोकने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.