उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में करीब चार साल पहले प्रेम प्रसंग से शुरू हुई रंजिश आखिरकार अदालत के फैसले तक पहुंच गई. जिले की अदालत ने सनसनीखेज डबल मर्डर केस में छह लोगों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों पक्षों की भूमिका तय करते हुए यह फैसला सुनाया.
अपर सत्र न्यायाधीश नेहा आनंद की अदालत ने एक पक्ष के चार और दूसरे पक्ष के दो आरोपियों को दोषी माना. कोर्ट ने चार दोषियों पर 25-25 हजार रुपये और वादी पक्ष के दो दोषियों पर 55-55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. इस फैसले के बाद पूरे इलाके में मामले की फिर से चर्चा शुरू हो गई है.
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सरकारी वकील विनोद शुक्ला ने बताया कि यह मामला थाना जलालाबाद क्षेत्र के गांव डहर का है. 8 जून 2022 को हुई इस दोहरी हत्या ने पूरे जिले को झकझोर दिया था. शुरुआत में मामला जितना सीधा दिखाई दे रहा था, जांच में उतनी ही चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई.
प्रेम प्रसंग बना खूनी वारदात की वजह
अभियोजन के मुताबिक, ओमपाल कश्यप की पत्नी ममता का गांव के रहने वाले रमन पाल यादव से प्रेम प्रसंग हो गया था. दोनों दिल्ली में साथ काम करने चले गए थे. बाद में लॉकडाउन लगने पर दोनों वापस गांव लौट आए. गांव लौटने के बाद यह रिश्ता लगातार विवाद और तनाव की वजह बन गया.
सरकारी वकील के अनुसार, ओमपाल अपनी पत्नी और उसके प्रेमी के रिश्ते से बेहद नाराज था. इसी रंजिश में 8 जून 2022 की शाम करीब 5.30 बजे जब रमन पाल खेत पर काम कर रहा था, तब ओमपाल अपने बेटों सोनू और अमित तथा गांव के प्रमोद के साथ वहां पहुंचा.
आरोप है कि चारों ने रमन पाल पर कुल्हाड़ी, लाठी और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई. यह हत्या पूरे विवाद की पहली कड़ी बनी.
पहली हत्या के बाद बदले में हुई दूसरी हत्या
रमन पाल की हत्या की खबर मिलते ही उसके भाई सर्वेश और अजय खेत की ओर पहुंचे. अभियोजन के मुताबिक वहां पहुंचने के बाद उन्होंने बदले की भावना में रमन पाल की प्रेमिका और ओमपाल की पत्नी ममता को निशाना बनाया.
जांच में सामने आया कि दोनों भाइयों ने ममता का उसके ही दुपट्टे से गला घोंटकर हत्या कर दी. इसके बाद पूरी घटना को इस तरह पेश करने की कोशिश की गई कि दोनों हत्याएं ओमपाल और उसके बेटों ने ही की हैं.
मामले को दूसरी दिशा देने के लिए रमन पाल के भाई सर्वेश ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि रमन पाल और ममता, दोनों की हत्या ओमपाल और उसके बेटों ने की है. इसी आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की.
जांच ने खोली झूठे आरोपों की परतें
पुलिस विवेचना के दौरान घटनास्थल, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य सबूतों की गहन जांच की गई. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ममता की हत्या ओमपाल या उसके बेटों ने नहीं, बल्कि रमन पाल के भाइयों सर्वेश और अजय ने की थी.
विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की. ट्रायल के दौरान अभियोजन ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए. अदालत ने पूरे घटनाक्रम का बारीकी से परीक्षण करने के बाद दोनों पक्षों की वास्तविक भूमिका तय की.
अदालत ने रमन पाल की हत्या के लिए ओमपाल, उसके बेटों सोनू और अमित तथा प्रमोद को दोषी माना. वहीं ममता की हत्या के लिए सर्वेश और अजय को दोषी ठहराते हुए सभी छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.
'समाज में जाएगा सख्त संदेश'
सरकारी वकील विनोद शुक्ला ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय समाज के लिए बड़ा संदेश है. उनका कहना है कि जब लोग ऐसे मामलों में दोषियों को सजा मिलते देखेंगे तो कानून के प्रति विश्वास और मजबूत होगा.
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष फैसला दिया है. इससे यह संदेश जाएगा कि कानून अपने हाथ में लेने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
अभियोजन का मानना है कि इस फैसले से समाज में अपराध के प्रति डर पैदा होगा और प्रेम प्रसंग, रंजिश या बदले की भावना में होने वाली ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में भी मदद मिलेगी.