शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही वीरांगना नगरी झांसी में भक्ति और उत्साह का रंग चढ़ने लगा है. मां दुर्गा की आराधना के बीच शहर में गरबा और डांडिया की धूम भी शुरू हो गई है. नवरात्रि के दूसरे दिन झांसी के एक स्थानीय होटल में एएस इवेंट के अंतर्गत सीजन का पहला गरबा-डांडिया कार्यक्रम आयोजित किया गया.रंग-बिरंगी रोशनी, पारंपरिक परिधानों, माता रानी के भजनों और डांडिया की खनक के बीच पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवमय नजर आया. आयोजन में करीब एक हजार महिला-पुरुषों ने उत्साह के साथ भाग लिया. किसी के कदम गरबा की लय पर थिरकते नजर आए, तो किसी ने डांडिया खेलकर नवरात्रि के उल्लास को साझा किया. छोटी-छोटी बच्चियों की आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इसके बाद माता रानी के जयकारों और भजनों के बीच देर तक नृत्य और उत्सव का सिलसिला चलता रहा.
आयोजन में भक्ति, संस्कृति और मनोरंजन का सुंदर संगम देखने को मिला
कार्यक्रम में महिलाओं ने सुंदर पारंपरिक परिधान पहनकर भारतीय संस्कृति और परंपराओं की खूबसूरती को प्रदर्शित किया. गरबा और डांडिया के माध्यम से जहां मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई, वहीं महिलाओं को एक-दूसरे से मिलने, खुशियां साझा करने और सामूहिक रूप से त्योहार मनाने का अवसर भी मिला. आयोजन में भक्ति, संस्कृति और मनोरंजन का सुंदर संगम देखने को मिला.
माला मेहरोत्रा ने बताया कि नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस गरबा-डांडिया कार्यक्रम में झांसी की महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पारंपरिक परिधानों में सजकर गरबा-डांडिया करना न केवल आनंद का अवसर है, बल्कि इससे नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है. उन्होंने सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं.
डॉ. संगीता राय ने कार्यक्रम में शामिल होकर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि माता रानी के भजनों पर नृत्य करने और जयकारे लगाने से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. उनके अनुसार ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य सनातन संस्कृति और भारतीय परंपराओं को प्रोत्साहित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहें. उन्होंने डांडिया को महिलाओं के लिए मनोरंजन, उत्साह और आपसी मेलजोल का बेहतरीन अवसर बताते हुए लोगों से ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की.
वहीं कमलेश राय ने कहा कि नवरात्रि पर गरबा-डांडिया जैसे आयोजन महिलाओं को एक साथ आने, नृत्य करने और त्योहार की खुशियां साझा करने का अवसर देते हैं. इससे महिलाओं में उत्साह बढ़ता है और आपसी मेलजोल तथा एकता को भी मजबूती मिलती है. उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए व महिलाओं को ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए.
नवरात्रि के साथ बढ़ेगी गरबा-डांडिया की रौनक
झांसी में सीजन के पहले गरबा-डांडिया आयोजन ने नवरात्रि के उत्सव को नई रौनक दे दी. करीब एक हजार लोगों की भागीदारी के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, पारंपरिक संस्कृति और सामूहिक उत्सव की झलक देखने को मिली. माता रानी की आराधना, भजनों की गूंज और डांडिया की खनक के बीच प्रतिभागियों ने नवरात्रि की खुशियां साझा कीं. आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने और भारतीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं.