
चुनाव आयोग ने गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक सीट पर इलेक्शन ऑब्जर्वर यानी चुनाव पर्यवेक्षक IAS अभय सिंह को पद से हटा दिया है. उनकी जगह 2009 बैच के IAS प्रकाश बिंदु को इलेक्शन ऑब्जर्वर बनाया गया है. अभय सिंह 2007 बैच के IAS अधिकारी हैं, वर्तमान में वह राजस्व परिषद के सदस्य हैं.
साल 2019 में CBI ने खनन घोटाले की जांच के सिलसिले में 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी. उस समय अभय सिंह बुलंदशहर के जिलाधिकारी (DM) थे. छापेमारी के दौरान उनके आवास से 47 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे.
लखनऊ, फतेहपुर, आजमगढ़, प्रयागराज, नोएडा, गोरखपुर और देवरिया में अवैध खनन के मामले में छापेमारी की गई थी. साल 2012 से 2016 के बीच समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुए खनन घोटाले में जिन तीन IAS अफसरों के घरों पर छापेमारी की गई थी, उनमें IAS बी. चंद्रकला, विवेक के साथ-साथ अभय सिंह भी शामिल थे.

उन पर आरोप लगा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार में फतेहपुर के DM रहते हुए उन्होंने खनन पट्टा आवंटन में गड़बड़ी की थी.
गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक सीट पर अभय सिंह को इलेक्शन ऑब्जर्वर बनाए जाने के बाद BJP के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अभय सिंह को इस जिम्मेदारी से हटाने की मांग की थी.
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देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी शिकायत में पुराने अवैध खनन मामले का हवाला दिया और चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अभय सिंह को ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी से हटाने का अनुरोध किया. उनकी शिकायत का मुख्य आधार साल 2019 में सामने आया वही मामला था, जिसमें सीबीआई ने कथित अवैध खनन की जांच के दौरान अभय सिंह के आवास पर छापेमारी की थी.
अब माना जा रहा है कि इसी शिकायत के कारण चुनाव आयोग ने अभय सिंह को इलेक्शन ऑब्जर्वर की ड्यूटी से हटाया है.