मध्य प्रदेश के उज्जैन में अप्रैल 2026 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम' के वाहन किराये के बिलों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. बिलों में जिन वाहनों को इनोवा और ट्रैवलर बताया गया, वे ई-रिक्शा, मोपेड, बाइक के नंबर निकले. इन बिलों के आधार पर 57 लाख रुपये से ज्यादा के भुगतान की बात सामने आई है. मामला सामने आने के बाद बिलों की जांच और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी के मुताबिक, मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है.
उज्जैन के तारामंडल परिसर, वसंत विहार में 3 से 5 अप्रैल 2026 तक 'महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था. इसका उद्देश्य भारत की प्राचीन कालगणना, खगोलीय परंपराओं और उज्जैन को ऐतिहासिक मध्याह्न रेखा के संदर्भ में स्थापित करने पर चर्चा करना था.
सम्मेलन में खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स, कॉस्मोलॉजी, स्पेस इकोनॉमी और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई. आयोजन के लिए मध्य प्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (MPCST) और संबंधित संस्थाओं ने व्यवस्थाएं की थीं.
लेकिन अब सम्मेलन में मेहमानों के परिवहन के लिए किराये पर ली गई गाड़ियों के बिलों की पड़ताल में सामने आई विसंगतियों ने सरकारी खर्च की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भोपाल की अदिति टूर एंड ट्रैवल्स से वाहन किराये पर लिए गए थे.
ई-रिक्शा के नंबर पर इनोवा क्रिस्टा का बिल
बिल नंबर 3061 में MP13-ZP4512 नंबर वाली गाड़ी को इनोवा क्रिस्टा बताया गया है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उज्जैन आरटीओ के रिकॉर्ड में यह नंबर ई-रिक्शा के नाम पर दर्ज है.
इस मामले में ई-रिक्शा चालक रितेश श्रीवास्तव से भी बात की गई. चालक ने बताया कि वह ई-रिक्शा का इस्तेमाल सवारी ढोने के लिए करता है और उसने इसे किसी सरकारी काम के लिए नहीं दिया था. देखें VIDEO:-
यदि बिल में दर्ज वाहन नंबर और आरटीओ रिकॉर्ड की जानकारी सही है, तो यह साफ करना जरूरी होगा कि सम्मेलन के लिए वास्तव में कौन-सी गाड़ी उपलब्ध कराई गई थी और बिल में ई-रिक्शा का नंबर कैसे दर्ज हुआ.
मोपेड को ट्रैवलर बताकर 29 हजार से ज्यादा का बिल
दूसरा मामला बिल नंबर 3054 का है. इसमें UP65-ED1523 नंबर वाली गाड़ी को टेंपो ट्रैवलर बताया गया. बिल में एक दिन के दौरान 186 किलोमीटर चलने का उल्लेख है और इसके लिए 29,242 रुपये का भुगतान दर्ज बताया गया है.
लेकिन जांच में यह नंबर उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड मोपेड का निकला. ऐसे में सवाल उठता है कि मोपेड के नंबर पर ट्रैवलर का बिल कैसे तैयार हुआ और भुगतान से पहले वाहन के दस्तावेजों का मिलान किया गया था या नहीं.
इस विसंगति पर संबंधित ट्रैवल एजेंसी का पक्ष भी अहम है. सिर्फ नंबर के अंतर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरा भुगतान गलत था, लेकिन बिल, वाहन रजिस्ट्रेशन और ड्यूटी रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है.
बाइक और ट्रक के नंबर भी जांच के दायरे में
वाहनों के नंबरों को लेकर अन्य विसंगतियों का भी दावा किया गया है. एक 26 सीटर टेंपो ट्रैवलर के बिल में DD01R9228 नंबर दर्ज होने की बात कही गई है, जबकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरटीओ रिकॉर्ड में यह नंबर ट्रक से संबंधित है.
इसी तरह, इनोवा क्रिस्टा बताई गई MP09VC6903 नंबर की गाड़ी का नंबर बाइक के नाम पर दर्ज होने का दावा किया गया है.
इन मामलों में यह जांचना जरूरी होगा कि बिलों में वाहन नंबर लिखने में गलती हुई, किसी दूसरे वाहन का इस्तेमाल हुआ या भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में कोई अन्य विसंगति है.
ट्रैवल एजेंसी ने बताया मानवीय भूल
अदिति टूर एंड ट्रैवल्स के मालिक देवेंद्र सक्सेना ने बिलों में सामने आई विसंगतियों पर सफाई दी. उनके मुताबिक, विभाग को भेजे गए बिल सही हैं, लेकिन कुछ बिलों में ड्राइवरों की गलती से वाहन नंबर आगे-पीछे दर्ज हो गए, जिससे भ्रम की स्थिति बनी. एजेंसी की ओर से इसे मानवीय भूल बताया गया है. हालांकि, इस स्पष्टीकरण की पुष्टि मूल बिलों, वाहन पंजीयन प्रमाणपत्रों, ड्यूटी स्लिप और भुगतान रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगी.
मीटर रीडिंग में एक दिन में 22,708 किमी का अंतर
वाहन बिलों में मीटर रीडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं. उपलब्ध विवरण के अनुसार, टेंपो ट्रैवलर के रिकॉर्ड में 3 अप्रैल को ओपनिंग रीडिंग 39,419 किमी और 4 अप्रैल को क्लोजिंग रीडिंग 39,616 किमी दर्ज है.
इसके अगले दिन, 5 अप्रैल को ओपनिंग रीडिंग 62,324 किलोमीटर लिखी गई. यानी 4 अप्रैल की दर्ज क्लोजिंग रीडिंग और 5 अप्रैल की ओपनिंग रीडिंग के बीच 22,708 किलोमीटर का अंतर है.
इतने बड़े अंतर की वजह साफ होना जरूरी है. यह पता लगाने के लिए मूल ड्यूटी स्लिप, मीटर रीडिंग और वाहन के वास्तविक इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करनी होगी. उपलब्ध जानकारी से अभी यह तय नहीं होता कि अंतर लिखने की गलती से आया या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी.
पूरे आयोजन पर 6.29 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी
महाकाल कॉन्फ्रेंस के आयोजन पर मेपकास्ट की ओर से कुल 6.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है. उपलब्ध विवरण के मुताबिक, टेंट, लाइट, साउंड, प्रोजेक्शन, ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार से जुड़े कामों के लिए सुविधा इंटरप्राइजेज को 4.18 करोड़ रुपये और मेसर्स प्रो. इवेंट को 22.12 लाख रुपये का भुगतान किया गया. वीर भारत न्यास को 12.82 लाख रुपये हैंडलिंग चार्ज के रूप में दिए जाने की बात भी कही गई है. कैटरिंग पर 1.32 करोड़ रुपये खर्च होने का विवरण सामने आया है.
वाहनों के किराये पर 57 लाख रुपये से अधिक के भुगतान को लेकर सवाल उठने के बाद अब बिलों की जांच और भुगतान को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित है.
संस्कृति विभाग और मेपकास्ट ने क्या कहा?
वाहनों के बिलों पर उठे सवालों के संबंध में मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा कि कार्यक्रम जिस विभाग का था, जिम्मेदारी उसी की थी. देखें VIDEO:-
वहीं, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी के अनुसार, परिषद ने आयोजन कराया था और गाड़ियों की व्यवस्था संस्कृति विभाग के जिम्मे थी.
कोठारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मेपकास्ट ने चार सदस्यों की समिति बनाकर जांच शुरू की है. समिति के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि वाहन नंबरों और मीटर रीडिंग में विसंगतियां कैसे आईं और भुगतान की प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई या नहीं.
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आयोजन के नाम पर खर्च और वाहन बिलों में कथित गड़बड़ियों को लेकर आपत्ति जताई.
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही हैं कि बिलों को मंजूरी देने से पहले वाहन नंबरों और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच किसने की, भुगतान के लिए किन दस्तावेजों को आधार बनाया गया और कथित विसंगतियों की जिम्मेदारी किसकी बनती है.
फिलहाल, वाहन बिलों में सामने आए अंतर जांच का विषय हैं. चार सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और संबंधित विभागों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला टाइपिंग या रिकॉर्ड संबंधी गलती का है अथवा भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हुई है.