दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग ढहने के हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. हादसे में जान गंवाने वाले सात लोगों में पांच छात्र थे. इन्हीं में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के झांसी गांव का 20 वर्षीय अभिषेक खरवार भी शामिल था. बीकॉम सेकंड ईयर में पढ़ने वाला अभिषेक अपने सपनों को पूरा करने दिल्ली गया था. वह पढ़ाई के साथ MBA की तैयारी भी कर रहा था, लेकिन एक हादसे ने उसके परिवार के सारे सपने चकनाचूर कर दिए.
मंगलवार को अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा. बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंचे पिता संतोष खरवार का दर्द देखकर वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया. इंजीनियर संतोष खरवार ने बेटे को खोने का दर्द बयां करते हुए दिल्ली में हॉस्टल और PG में रहने वाले छात्रों की परेशानियों पर भी सवाल उठाए.
2025 में पढ़ाई के लिए दिल्ली गया था अभिषेक
अभिषेक वर्ष 2025 में दिल्ली पढ़ाई करने गया था. वह बीकॉम सेकंड ईयर का छात्र था और आगे MBA करना चाहता था. परिवार को उम्मीद थी कि बेटा पढ़-लिखकर अपना भविष्य बनाएगा और परिवार का नाम रोशन करेगा. लेकिन सत्य निकेतन की बिल्डिंग गिरने की घटना में उसकी जान चली गई.
पिता संतोष खरवार ने बताया कि जब अभिषेक ने सत्या निकेतन में PG लिया था, तब वह खुद भी बेटे के साथ वहां गए थे. उस समय उन्हें ऐसी कोई बड़ी परेशानी नजर नहीं आई थी. उनका कहना है कि अगर बिल्डिंग में निर्माण कार्य या कोई दूसरा काम चल रहा था तो वहां रहने वाले छात्रों को पहले ही सुरक्षित जगह पर भेज दिया जाना चाहिए था.
पिता बोले पाल-पोसकर बड़ा किया लेकिन मिला जिंदगी भर का दर्द
अभिषेक के पिता ने हादसे के लिए बिल्डिंग मालिक को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अगर बिल्डिंग में काम कराया जा रहा था तो वहां छात्रों को रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी. उनका सवाल है कि आखिर छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?
उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को बचपन से पाल-पोसकर बड़ा करते हैं और जब वे पढ़ाई के लिए दूसरे शहर भेजते हैं तो उन्हें उम्मीद होती है कि उनका बच्चा सुरक्षित रहेगा. लेकिन ऐसी घटनाएं परिवारों को जिंदगीभर का दर्द दे जाती हैं.
'11 महीने की फीस एडवांस, फिर भी खाना खराब'
संतोष खरवार ने PG में रहने वाले छात्रों की एक और परेशानी सामने रखी. उन्होंने बताया कि कई PG संचालक छात्रों से 11 महीने की फीस एडवांस में जमा करा लेते हैं. अभिषेक के PG का किराया करीब 13 हजार रुपये महीना था. इतनी रकम देने के बावजूद खाने की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी.
उन्होंने बताया कि अभिषेक खाने को लेकर अक्सर शिकायत करता था. परिवार की तरफ से उसे कहा जाता था कि अगर PG का खाना ठीक नहीं है तो बाहर से खाना खा लिया करे. पिता का कहना है कि छात्रों से पूरा पैसा लेने के बावजूद उन्हें बेहतर सुविधाएं नहीं मिलतीं.
उनका कहना है कि 11 महीने की फीस पहले ही जमा होने की वजह से छात्र चाहकर भी PG छोड़ नहीं पाते. अगर कोई छात्र बीच में कमरा छोड़ना चाहे तो उसका जमा पैसा डूबने का डर रहता है. ऐसे में मजबूरी में बच्चों को उसी व्यवस्था में रहना पड़ता है.
5 सितंबर को हुई थी बेटे से आखिरी बात
संतोष खरवार ने बताया कि 5 सितंबर को ही उनकी अभिषेक से बात हुई थी. उन्होंने बेटे के हॉस्टल की फीस भी जमा की थी. इसके अगले दिन 6 सितंबर को उनसे अभिषेक की बात नहीं हो पाई. इसके बाद जो खबर सामने आई, उसने पूरे परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया.
बेटे के अंतिम संस्कार के दौरान अभिषेक की मां की हालत बेहद खराब थी. वह किसी से बात करने की स्थिति में नहीं थीं. बेटे को याद कर वह लगातार रोती रहीं. परिवार की आंखों के सामने 20 साल के उस बेटे की यादें थीं, जिसके लिए उन्होंने बड़े सपने देखे थे.
'आगे ऐसी घटना किसी और परिवार के साथ न हो'
अभिषेक के पिता ने दिल्ली के मुख्यमंत्री से अपील की कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था को मजबूत किया जाए. उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि जिस दर्द से उनका परिवार गुजर रहा है, वह किसी और माता-पिता को न झेलना पड़े. दिल्ली जैसे शहरों में पढ़ाई और नौकरी के लिए दूर-दराज से आने वाले हजारों छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, रहने की व्यवस्था और सुविधाओं की नियमित जांच बेहद जरूरी है.