यूपी के बांदा में पेट दर्द की शिकायत के बाद परिजन 20 साल की लड़की को बबेरू के अस्पताल लेकर पहुंचे थे. जांच में पता चला कि लड़की प्रेग्नेंट है और डिलीवरी का समय आ चुका है. अस्पताल में लड़की ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. लेकिन डिलीवरी के बाद परिवार ने नवजात को अपने साथ ले जाने से इनकार कर दिया. मामला पुलिस तक पहुंचा, जिसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति को सूचना देकर बच्चे को जिला अस्पताल शिफ्ट कराया जा रहा है.
मामला बांदा के बबेरू कोतवाली क्षेत्र का है. 1 सितंबर को एक 20 वर्षीय लड़की को उसके परिजन पेट दर्द की शिकायत के बाद CHC बबेरू लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने जब युवती की जांच की तो पता चला कि वह प्रेग्नेंट है और प्रसव का समय आ चुका है. इसके बाद अस्पताल की टीम ने लड़की की डिलीवरी कराई.
लड़की ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. लेकिन बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया, जब लड़की और उसके परिजनों ने नवजात को अपने साथ रखने से इनकार कर दिया.
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अस्पताल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलने पर ASP बांदा शिवराज समेत पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने डॉक्टरों और युवती के परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली. पूछताछ के दौरान परिजन बच्चे को अपने साथ ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए.
ASP शिवराज ने बताया कि CHC बबेरू से पुलिस को मेमो मिला था कि 20 साल की लड़की ने एक बच्चे को जन्म दिया है. किन्हीं परिस्थितियों के कारण जच्चा और परिजन बच्चे को अपने पास नहीं रखना चाहते और उन्होंने बच्चे का समर्पण कर दिया है.

पुलिस ने नवजात को अपनी निगरानी में लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी. बच्चे को जिला अस्पताल बांदा शिफ्ट कराया जा रहा है. साथ ही बाल कल्याण समिति और संबंधित संस्थाओं को भी जानकारी दे दी गई है. पुलिस के मुताबिक, जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट के प्रावधानों के तहत बाल समर्पण की प्रक्रिया नियमानुसार शुरू कर दी गई है.
अब संबंधित बाल कल्याण संस्थाएं नवजात की देखभाल और आगे की प्रक्रिया तय करेंगी. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में लड़की और उसके परिवार ने नवजात को अपने पास रखने से इनकार किया.