अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरी महाराज ने राम मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. उन्होंने बताया कि नवनियुक्त CEO और सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की जॉइनिंग विधिवत हो चुकी है. गोविंद देव गिरी महाराज के मुताबिक, जितेंद्र मिश्र के पुराने दायित्व पूरे होने के बाद वह इसी सप्ताह अयोध्या पहुंचेंगे और राम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं का पूरी तरह कार्यभार संभालेंगे. उन्होंने कहा कि व्यावहारिक रूप से उनकी जॉइनिंग आज से ही मान ली गई है.
ट्रस्ट की बैठक के बाद नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका और CEO जितेंद्र मिश्र के साथ लगातार बैठकें भी हुई हैं. इन बैठकों में मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठकों में मंदिर के कर्मचारियों, सुरक्षा व्यवस्था, सेवा-पूजा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर चर्चा की गई. ट्रस्ट अब मंदिर की व्यवस्थाओं को ज्यादा व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
गोविंद देव गिरी महाराज ने साफ किया कि राम मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और उत्सवों का संचालन संतों और विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में ही होगा. वहीं मंदिर की बाहरी प्रशासनिक और व्यावहारिक व्यवस्थाओं को आधुनिक और अनुशासित तरीके से संचालित किया जाएगा. यानी धार्मिक व्यवस्था अपनी परंपरा के अनुसार चलेगी, जबकि प्रशासनिक कामकाज में आधुनिक प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा.
‘मंदिर की सेवा में श्रद्धा, व्यवस्था में आधुनिक प्रबंधन जरूरी’
गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि मंदिर का संचालन सिर्फ धार्मिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है. मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं. सुरक्षा व्यवस्था और दूसरे प्रशासनिक काम भी मंदिर के संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ऐसे कामों को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए आधुनिक प्रबंधन प्रणाली जरूरी है. उन्होंने कहा कि जितेंद्र मिश्र के अनुभव और अनुशासन का लाभ मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में लिया जाएगा.
गोविंद देव गिरी महाराज के मुताबिक, जितेंद्र मिश्र धार्मिक विचारों वाले व्यक्ति हैं और गीता का अध्ययन भी करते हैं. उन्होंने कहा कि राम मंदिर की व्यवस्था में अनुशासन और श्रद्धा के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा. मंदिर परिसर में हुई चोरी की घटना को लेकर भी गोविंद देव गिरी महाराज ने अपना रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के दरबार में एक रुपये की चोरी भी गंभीर अपराध है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जिस घटना को लेकर बाद में बड़े-बड़े आंकड़े बताए गए थे, वास्तविक घटना उतनी बड़ी नहीं थी. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की व्यवस्था की जाएगी. उनके मुताबिक, सिर्फ कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंप देना पर्याप्त नहीं है. यह देखना भी जरूरी है कि जिम्मेदारी मिलने के बाद काम सही तरीके से हो रहा है या नहीं.
राम मंदिर की दैनिक श्रृंगार आरती की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. गोविंद देव गिरी महाराज ने बताया कि नई व्यवस्था का असर अब दिखाई देना शुरू होगा. आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं को मंदिर की व्यवस्थाओं में बदलाव नजर आएगा. उन्होंने कहा कि मंदिर की व्यवस्थाओं में धीरे-धीरे जरूरी परिवर्तन किए जाएंगे. इसका उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए व्यवस्थाओं को ज्यादा सुचारू और प्रभावी बनाना है.
ट्रस्ट सीता रसोई और अन्नक्षेत्र की व्यवस्था पर भी पुनर्विचार कर रहा है. कोशिश यह है कि राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद सम्मानजनक, व्यवस्थित और बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जाए. गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि राम जी की सेवा करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे भी ज्यादा रामभक्तों की सेवा करना महत्वपूर्ण है. इसी भावना के साथ दर्शनार्थियों और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
संतों और स्थानीय लोगों को भी जोड़ने की तैयारी
गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि राम मंदिर की व्यवस्थाओं से अयोध्या के संतों और स्थानीय जनमानस को जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा. इसके साथ ही मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लगातार बेहतर करने की दिशा में काम होगा. मंदिर की धार्मिक गरिमा, परंपरा और पूजा-पद्धति को पूरी श्रद्धा के साथ बनाए रखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक प्रबंधन के अनुरूप विकसित किया जाएगा.
गोविंद देव गिरी महाराज के मुताबिक, CEO जितेंद्र मिश्र के साथ हुई बैठकों का एक उद्देश्य उन्हें मंदिर की कार्यप्रणाली और यहां काम करने वाले कर्मचारियों से परिचित कराना भी था. मंदिर के कर्मचारियों, सुरक्षा से जुड़े लोगों और पूजा-पद्धति से जुड़े कार्यकर्ताओं से उनका परिचय कराया गया. साथ ही उनकी जिम्मेदारियों को भी समझाया गया.
अब जितेंद्र मिश्र के पुराने दायित्व पूरे होने के बाद वह इसी सप्ताह अयोध्या पहुंचेंगे और राम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे. ट्रस्ट की योजना साफ है कि मंदिर की धार्मिक परंपराएं संतों और विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में चलती रहें, जबकि कर्मचारियों, सुरक्षा, प्रशासन और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यावहारिक व्यवस्थाओं को आधुनिक और अनुशासित तरीके से संचालित किया जाए.